Top 51 Moral Stories In Hindi In Short | सर्वश्रेष्ठ नैतिक कहानियाँ

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Moral Stories In Hindi In Short: नैतिक कहानियाँ इन हिंदी आपको यह सिखाता है कि जिंदगी में एक बेहतर व्यक्ति कैसे होना चाहिए। कहानी पढ़ना छात्रों एवं वयस्कों के लिए अन्य संस्कृतियों के लिए समझना, सम्मान और प्रशंसा विकसित करने का एक अनोखा तरीका है। बेस्ट मोरल स्टोरी इन हिंदी अथवा शार्ट मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी विथ मोरल इस लेख में सबसे अच्छी नैतिक कहानियों का संग्रह है, जो आपको इंटरनेट पर मिलेगा।

ये कहानियाँ बहुत ही रोचक हैं। जिसे पढ़कर आपको काफी मजा आएगा। यहां हम आपको शीर्ष 50+ नैतिक कहानियां दे रहे हैं।

Table of Contents

Top 10 Moral Stories in Hindi | हिंदी में शीर्ष 10 नैतिक कहानियाँ

1. शेर और तीन बैल (Moral Stories In Hindi In Short)

1. शेर और तीन बैल (Moral Stories In Hindi In Short)

short moral hindi story: एक बार की बात है। तीन बैल आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे।

वे साथ मिलकर घास चरने जाते और बिना किसी राग-द्वेष के हर चीज आपस में बाँटते थे। एक शेर काफी दिनों से उन तीनों के पीछे पड़ा था, लेकिन वह जानता था कि जब तक ये तीनों एकजुट हैं, तब तक वह उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। शेर ने उन तीनों को एक-दूसरे से अलग करने की चाल चली।

उसने बैलों के बारे में अफवाहें उड़ानी शुरू कर दी। अफवाहें सुन-सुनकर उन तीनों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई।

धीरे-धीरे वे एक-दूसरे से जलने लगे।

आखिरकार एक दिन उनमें झगड़ा हो गया और वे अलग-अलग रहने लगे। शेर के लिए यह बहुत अच्छा अवसर था। उसने इसका पूरा लाभ उठाया और एक-एक करके तीनों को उसने मार डाला और खा गया।

कहानी से सीख- Moral stories in Hindi

एकता में ही शक्ति होती है।

2. बच्चे और उनके दादाजी – Moral Based Stories in Hindi

बच्चे और उनके दादाजी – Moral Based Stories in Hindi

एक गाँव में दो चतुर बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते थे। एक दिन उनके दादाजी उनके साथ रहने के लिए आए। वह एक नाविक रह चुके थे। बच्चों को उनसे कहानियाँ सुनना अच्छा लगता था।

वह उन्हें बताते, कैसे वह समुद्री डाकुओं से लड़े। धीरे-धीरे दादाजी कहानियाँ सुनाकर ऊब गए। वह अपने हमउम्र लोगों से बातें करना चाहते थे। गाँव के पास ‘नाविक की वापसी’ नामक एक सराय थी।

बच्चों ने दादाजी को उसके बारे में बताते हुए कहा-“आपको वहाँ जाना चाहिए। वह नाविकों से भरा रहता है।” लेकिन दादाजी ने कहा-” अब मैं नए दोस्त नहीं बना सकता।”

बच्चों ने उस सराय के मालिक के बच्चों को बताया-“हमारे दादाजी एक नाविक थे। वह समुद्री डाकुओं और गड़े हुए खजाने की बहुत सी कहानियाँ जानते हैं और यह भी जानते हैं कि डाकुओं ने खज़ाना कहाँ छुपाया था।”

जल्दी ही, दादाजी को सराय से निमंत्रण आने लगे। दादाजी अब अपना समय सराय में बिताने लगे और वह अब यहाँ पर खुश थे। बच्चे भी खुश थे क्योंकि अब दादाजी हमेशा उनके साथ ही रहने वाले थे।

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3.स्कूल की दोस्ती – Hindi Moral Story

स्कूल की दोस्ती – Hindi Moral Story

नरेंद्र बिहार के एक छोटे से गांव के सर्वोदय विद्यालय में पढता था। दरअसल नरेंद्र का परिवार दिल्ली शहर का था, क्यों की नरेंद्र के पिता भारतीय सेना में थे इसलिए दो साल पहले ही उसके पिताजी का उस गांव में बदली हुई थी। नरेंद्र पढ़ाई और खेल में बहुत अच्छा था, इसलिए वह उस गांव के विद्यालय में बहुत लोकप्रिय था।

एक दिन अचानक उसके पिताजी की बदली पटना शहर में हुई। दो महीने के अंदर नरेंद्र के परिवार को वह गांव छोड़कर पटना जाना पढ़ रहा था। दूसरे विद्यालय में वह कैसे जाएगा, उसका मन लगेगा या नहीं यह सोचकर नरेंद्र परेशान था।

उसकी परेशानी को देखकर उसकी की माँ ने उसे समझाया, “बेटा, हमें यह गांव छोड़कर तो जाना ही पड़ेगा। परंतु तुम्हें ज़्यादा निराश होने की जरूरत नहीं, थोड़े ही दिनों में वहां भी तुम्हारे मित्र बन जाएंगे और तुम्हारा मन स्कूल व मित्रों में लगने लगेगा।”

Hindi Moral Story

ट्रांसफर का ऑर्डर लेकर जब नरेंद्र के पिता अपने परिवार के साथ पटना पहुँचे तो यह नया शहर नरेंद्र के मन को एकदम भा गया। वहां शीघ्र ही एक अच्छे विद्यालय में नरेंद्र को दाखिला मिल गया। परंतु जब नए विद्यालय में नरेंद्र को उसकी कक्षा के विद्यार्थियों ने चिढ़ाना शुरू किया तो उसे बहुत बुरा लगा। नरेंद्र बहुत दुखी लगने लगा।

एक दिन जब उसकी माँ ने उससे खुलकर इसका कारण पूछा तो फिर नरेंद्र ने माँ से सभी बातें स्पष्ट बता दीं। वह माँ से यह बताते हुए कि कक्षा के विद्यार्थी उसे चिढ़ाते है और उसे अपने साथ नहीं खेलने नहीं देते है।

उसकी माँ ने उसे समझाया, “बेटा विद्यालय तो जाना ही होगा। जब तुम्हें बच्चे चिढ़ाएं तो तुम कुछ मत कहना और न ही मुँह बनाना। बल्कि उनके साथ हँसने लगना। और तुम बच्चों से खुद ही बात करने की कोशिश करना। उन्हें यदि पढ़ाई में कोई दिक्कत होती हो तो उनकी मदद करना। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।”

नरेंद्र माँ की बताई तरकीब के अनुसार चलता गया। अब पुराने विद्यालय की ही तरह नरेंद्र इस विद्यालय में भी प्रसिद्ध होने लगा था। अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर उसने अध्यापकों के बीच भी अपनी अच्छी पहचान बना ली थी। अब सब बच्चे भी उससे मित्रता करने को आतुर थे।

Moral of the Story – जीवन में कोई सही निर्णय नहीं है, क्योंकि हम जो भी निर्णय लेते हैं वह नया और अप्रत्याशित होता है।

4.कपटी बाजHindi Moral Stories

4.कपटी बाज-Hindi Moral Stories

short moral stories in hindi for class 1

एक बाज एक पेड़ की डाली पर रहता था। उसी पेड़ की खोह में एक लोमड़ी रहती थी।

एक दिन, जब लोमड़ी अपनी खोह से निकली तो बाज उसमें घुस गया और अपने बच्चों को खिलाने के लिए लोमड़ी के बच्चों को उठाकर ले गया। जब लोमड़ी लौटी, तो उसने बाज से अनुरोध किया कि उसके बच्चे लौटा दे।

बाज जानता था कि लोमड़ी उसके घोंसले तक नहीं पहुँच पाएगी। उसने लोमड़ी के अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया। लोमड़ी पास के एक मंदिर गई और वहाँ से जलती हुई लकड़ी लेकर आई। उसने पेड़ के नीचे आग लगा दी। आग की गर्मी और धुएं से बाज डर गया। अपने बच्चों की जान बचाने के लिए वह जल्दी से लोमड़ी के पास आया और उसके बच्चे लौटा दिए।

कहानी से सीख- Moral of the hindi Story

निर्दयी व्यक्ति जिनका दमन करता है. उनसे उसे हमेशा खतरा रहता हैं.

5. दो भाई के दो अलग रास्ते – Short Moral Stories in Hindi for Class 1

5. दो भाई के दो अलग रास्ते – Short Moral Stories in Hindi for Class 1

केरला के एक छोटे से गांव में दो भाई रहते थे। एक का नाम मोहित था, वह शहर का सबसे बड़ा बिजनेसमैन था। तो दूसरे का नाम मंगल था, वह शराबी था। मंगल गांव में अपने भाई के पैसो से रह रहा था, और पूरा दिन सिर्फ शराब ही पिता रहता था। वह किसी की एक बात नहीं सुनता था। छोटे भाई मोहित ने भी उसे समजना बंद किया था क्यों की मंगल उसका बड़ा भाई था और वह बहुत गुस्सा होता था। लेकिन हर महीने मोहित उसे पैसो की मदद करता था।

एक दिन गांव के कुछ लोगो ने इस समस्या के बारे में दोनों भाइयों से बात करने की सोची। वे पहले बड़े भाई यानी मंगल के घर चले गए। मंगल हमेशा की तरह शराब पि कर जमीन पर लेता था। लोगों ने उसे कुर्सी पर बैठाया और ज्यादा शराब पिने की वजा पूछ ने लगे।

मंगल बोला, “मेरे पिता शराबी थे, वे अक्सर मेरी माँ और हम दोनों भाइयों को पीटा करते थे। भला तुम लोग मुझसे और क्या उम्मीद कर सकते हो। मैं भी वैसा ही हूँ।”

फिर वे छोटे भाई के पास चले गए। वो अपने काम में व्यस्त था और थोड़ी देर बाद उनसे मिलने आया।

गांव के लोगों ने इस भाई से भी वही प्रश्न किया, “आप इतने सम्मानित बिजनेसमैन हैं, सभी आपकी प्रशंसा करते हैं, आखिर आपकी प्रेरणा क्या है?”

“मेरे पिता“ मोहित ने बोला

लोगों ने आश्वर्य से पूछा , “भला वो कैसे?”

“मेरे पिता शराबी थे, नशे में वो हमें मारा- पीटा करते थे। मैं ये सब चुप -चाप देखा करता था, और तभी मैंने निश्चय कर लिया था की मैं ऐसा बिलकुल नहीं बनना चाहता। मुझे तो एक सभ्य, सम्मानित और बड़ा आदमी बनना है और मैं वही बना।” मोहित ने अपनी बात पूरी की।

Moral of Hindi Story – हमारी सोच ही है जो हमे एक अच्छा व्यक्ति बनाती है।

6. गरीब भक्त – Moral Based Stories in Hindi

6. गरीब भक्त – Moral Based Stories in Hindi

एक गाँव में एक निर्धन व्यक्ति रहता था। वह इतना निर्धन था कि मुश्किल से अपने परिवार के लिए एक वक्त का खाना जुटा पाता था। लेकिन उसने कभी अपनी निर्धनता की शिकायत किसी से नहीं की।

उसके पास जो कुछ था, वह उसी में संतुष्ट था। वह देवी का बहुत बड़ा भक्त था। इसीलिए वह पूजा करने के लिए हमेशा मंदिर जाता था। मंदिर जाने के बाद ही वह अपने कार्य पर जाता था।

एक दिन देवी को अपने इस गरीब भक्त पर दया आ गई। इसलिए एक दिन सुबह-सुबह देवी ने अपनी दिव्य शक्ति से मंदिर के बाहर एक सोने के सिक्कों से भरा थैला रख दिया।

वह भक्त मंदिर आया और आँखें बंद करके मंदिर के चारों ओर देवी का ध्यान करते हुए परिक्रमा करने लगा। आँखें बंद होने के कारण वह सोने के सिक्कों से भरा थैला नहीं देख पाया और यूँ ही चला गया। यह देखकर देवी ने सोचा, ‘समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता।’.

7. गधा और धोबीHindi Moral Story

7. गधा और धोबी-Hindi Moral Story

short moral stories in hindi for class 1

एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफ़ी कमजोर था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था।

एक दिन, धोबी को एक मरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, “मैं गधे के ऊपर इस बाघ की खाल डाल दूंगा और उसे पड़ोसियों के खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया करुंगा। किसान समझेंगे कि वह सचमुच का बाघ है और उससे डरकर दूर रहेंगे और गधा आराम से खेत चर लिया करेगा।”

धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गई।

एक रात, गधा खेत में चर रहा था कि उसे किसी गधी की रेंकने की आवाज सुनाई दी। उस आवाज को सुनकर वह इतने जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा।

गधे की आवाज सुनकर किसानों को इसकी असलियत का पता लग गया और उन्होंने गधे की खूब पिटाई की।

कहानी से सीख- Moral stories in Hindi

इसीलिए कहा गया है कि अपनी सचाई नहीं छिपानी चाहिए।

8.कछुआ और खरगोश – Kachua aur Khargosh

8.कछुआ और खरगोश – Kachua aur Khargosh

एक ज़माने में, एक खरगोश और एक कछुआ बहुत अच्छे दोस्त थे। लेकिन खरगोश को अपनी गति पर बहुत गर्व था क्योंकि कछुआ खरगोश से धीमा है। इसलिए खरगोश हमेशा अपनी धीमी गति के लिए कछुए को छेड़ता था। तो एक दिन कछुआ गुस्से में आ गया और उसने खरगोश से कहा-

“आइए आज रेस करें और देखें कि कौन जीतेगा।” खरगोश कछुआ पर हँसा और कहा, “तुम मेरे खिलाफ जीतोगे?” “चलो दौड़ लगाये।” दौड़ शुरू होते ही खरगोश तेजी से दौड़ा और कछुआ धीरे-धीरे चलता रहा।

रास्ते में एक पेड़ के पास बहुत घास थी। खरगोश ने सोचा कि कछुआ बहुत पीछे है और वह जल्दी से जाकर घास खा जाएगा। और वह खाने लगा। खाना खाने के बाद उसे नींद आने लगी। वह उसी पेड़ के नीचे सो गया।

उसने सोचा कि उसे थोड़ा आराम करना चाहिए। कछुआ धीरे-धीरे खरगोश के पास पहुंचा। लेकिन कछुआ स्मार्ट था। वह खरगोश को नहीं जगाया और आगे बढ़ता रहा। खरगोश सोता रहा। कछुआ अंत में फिनिश लाइन पर पहुंच गया। उसके बाद, खरगोश यह सोचकर उठा,

“कछुआ बहुत पीछे होगा, मुझे जाने दो और दौड़ जीतो।”

खरगोश आगे की ओर दौड़ा और कछुआ को पहले से ही देख कर चौंक गया। वह बहुत शर्मिंदा था और खेद महसूस करता था क्योंकि कछुआ जीत गया था, भले ही खरगोश तेज था। लेकिन कछुआ अपनी इच्छा शक्ति या शक्ति खोए बिना विजय की ओर आगे बढ़ता रहा।

कहानी का नैतिक है कि धीमी और स्थिर दौड़ जीत जाती है। कभी हार मत मानो। धीरे-धीरे और धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें और उसे हासिल करें। आप कभी नहीं हारेंगे।

9. दो दोस्त और भालू-Short moral Hindi story

9. दो दोस्त और भालू-Short moral Hindi story

short moral stories in hindi for class 1

निर्मल और रहीम दो दोस्त थे और वो एक बार अपने गाँव के नजदीक जंगल में घूमने गए। घूमते घूमते वो काफी अंदर चले गए और वापस लौटने लगे,अचानक से उन्हें भालू दिखा। भालू ने भी दोनों को देख लिया और

इनकी तरफ बढ़ने लगा। रहीम को पेड़ पे चढ़ने की कला मालूम थी और उसने बिना निर्मल के बारे में सोचे तुरंत पेड़ पे चढ़ गया।

निर्मल ने तुरंत अपना दिमाग लगा के जमीं पे लेट गया क्यूंकि उसने यह सुन रखा था की जानदर शर्वो को पसंद नहीं करते।

जैसे ही भालू नजदीक आया निर्मल ने सांस रोक ली। भालू ने निर्मल को सुंघा और मरा हुआ समझ के लोट गया।

थोड़ी देर बाद रहीम निचे आके निर्मल से पूछा “भालू ने तुम्हारे कान में क्या बोल के चला गया?” निर्मल ने कहा भालू ने कहा की रहीम जेसे दोस्तों से दूर रहो

कहानी से सीख- Moral stories in Hindi

जरूरत पड़ने पे काम आने वाले लोग ही दोस्त कहलाने के लायक है।

10. अपनी मदद आप स्वयं करते हैं – Moral Based Stories in Hindi

एक बार एक धनी व्यापारी व्यापार के उद्देश्य से पानी के जहाज द्वारा अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा था। वह अपने साथ कीमती रत्न एवं सोने के सिक्कों से भरा एक संदूक भी ले जा रहा था।

रास्ते में तूफान आ गया। जहाज इधर-उधर हिलोरें लेने लगा। कुछ घंटों के बाद तूफान तो थम गया, लेकिन जहाज की तली में एक छेद हो गया। अब जहाज में पानी भरने लगा।

यह देखकर कुछ लोग जहाज में ही डूब गए और कुछ सौभाग्यशाली तैरकर किनारे पहुँच गए। यह देखकर व्यापारी ने प्रार्थना करनी शुरू की, “हे भगवान! कृपा करके मेरा जीवन बचा लो।”

एक व्यक्ति व्यापारी के पास गया और बोला, “कूदो और तैरकर समुद्र के किनारे पहुँचो। भगवान उसकी मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करते हैं।” लेकिन व्यापारी ने उसकी एक न सुनी।

वह जहाज में ही रहा। थोड़ी देर में जहाज डूब गया और वह व्यापारी भी जहाज के साथ डूबकर अकाल मृत्यु का ग्रास बना।

सआदत हसन मंटो की कहानी ठंडा गोश्त

11. फलों का भगवान – Moral Stories in Hindi for Class 10

11. फलों का भगवान – Moral Stories in Hindi for Class 10

केशवलाल का अपने घर के आसपास बहुत बड़ा बगीचा था। वह बहुत मेहनत से अपने बगीचे की देखभाल पुरे साल भर करता था। ज्यादा तर बगीचे के फल वह अपने परिवार में ही देता था और कुछ बचे हुए वह बाजार में बेचता था। वह बहुत ही साधारण जीवन जीता था पर अपनी बगीचे की देखभाल बहुत अच्छे से करता था।

एक दिन अपने बेटी के साथ जब केशवलाल फल उठा रहा था तो उसने एक अजनबी को पेड की शाखा पर बैठे हुए देखा और वह अजनबी फल तोड़ रहा था। केशवलाल यह देखकर गुस्सा हो गया और वह चिल्लाया, “कौन हो तुम? तुम मेरे पेड़ पर क्या कर रहे हो? क्या तुम्हें शर्म नहीं आती दिन के समय तुम फल चुरा रहे हो?”

पेड को शाखा पर बैठे अजनबी ने केशवलाल को देखा लेकिन उसने उसकी बात का जवाब नहीं दिया और फल उठाता रहा। केशवलाल बहुत गुस्सा हो गया और फिर चिल्लाया, “पूरे साल इन पेड़ों को रखवाली मैने की है, तुम्हें मेरी इजाजत के बिना इनके फल लेने का कोई अधिकार नहीं है। नीचे आ जाओ।”

पेड पर बैठे अजनबी ने जवाब दिया, “मै नीचे क्यों आऊ? यह भगवान का बगीचा है और मैं भगवान का सेवक हूं इसलिए मुझे यह फल तोड़ने का हक है और तुम्हें भगवान के काम और उसके सेवक के बीच में नहीं आना चाहिए।” केशवलाल उसका यह जवाब सुनकर बहुत हैरान हो गया।

Moral Stories in Hindi for Class 10

केशवलाल ने एक डंडी ली और उसने अजनबी को मारना शुरू कर दिया। अजनबी चिल्लाने लगा, “तुम मुझे क्यों मार रहे हो? तुम्हें यह करने का कोई हक नहीं है।” केशवलाल ने ध्यान नहीं दिया और वह उसे लगातार मारता रहा।

अजनबी चिल्लाया, “तुम्हें भगवान से डर नहीं लगता। तुम एक मासूम इंसान को मार रहे हो?”  केशवलाल ने जवाब दिया, “मुझे डर क्‍यों लगेगा? मेरे हाथ में जो छड़ी है वह भगवान की है और मैं भी भगवान का सेवक हूं इसलिए मुझे किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं और तुम्हें भगवान के काम और उसके सेवक के बीच में नहीं बोलना चाहिए।”

अजनबी यह सुनकर चुप हो गया और फिर बोला, “रुको, मुझे मत मारो, मुझे माफ करो कि मैने तुम्हारे फल चुराए। यह तुम्हारा बगीचा है और मुझे फल तोड़ने के लिए तुम्हारी इजाजत लेनी चाहिए थी। इसलिए मुझे माफ करो और छोड दो।”

केशवलाल यह सुनकर मुस्कुराया और कहा, “क्योंकि अब तुम्हें तुम्हारी गलती का अहसास हो गया है मै तुम्हें माफ कर दूंगा।”  इसके बाद केशवलाल ने उसे छोड़ दिया और वह अजनबी वहां से चला गया।

12.अब तुम पत्थर गिनो-Moral Stories In Hindi In Short

12.अब तुम पत्थर गिनो-Moral Stories In Hindi In Short

एक अमीर आदमी एक गाँव में रहा करता था। वह बहुत कंजूस था। उसके पास कई सोने के सिक्के थे। उसने एक सिक्के में सोने के सिक्के रखे थे और उसे पिछवाड़े में गाड़ दिया। हर दिन आधी रात को कंजूस जागता था और पिछवाड़े जाकर देखता था कि सोने के सिक्के सुरक्षित हैं या नहीं।

आओ। देखते हैं कि मेरे सोने के सिक्के सुरक्षित हैं या नहीं। एक। दो। तीन। चार पाच। छह। और 1000 में।

वह हर दिन आधी रात को उठता था और सोने के सिक्के गिनता था। यह कंजूस की दिनचर्या थी। आओ। चलो देखते हैं। एक। दो। तीन। चार। पांच। और 1000 में। एक दिन कंजूस के पड़ोसी उसके पास किसी काम के लिए आए। और कहा।

मैं अपने बेटे को शिक्षा के लिए शहर भेजना चाहता हूं। लेकिन मेरे पास पैसा नहीं है। अगर आप मेरी मदद करेंगे, तो यह बहुत अच्छा होगा। महान! महान! नहीं ऐसा नहीं है। मेरा मतलब है, एक बार मेरे पास पैसा होगा, तो मैं इसे चुकाऊंगा।

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई! आप अन्य पैसे पर आनंद लेना चाहते हैं। क्या आपको शर्म नहीं आती? दफा हो जाओ। आपको एक पैसा नहीं मिलेगा। अपने बेटे को शिक्षित करना चाहते हैं।

मुझे क्या परवाह है कि आप अपने बेटे को शिक्षित करते हैं या नहीं?

आओ। जाने देना। अपने पड़ोसियों को छोड़ने के लिए कहने के बाद, कंजूस  फिर से सोने के सिक्के गिनने के लिए रात को पिछवाड़े गया। आओ। मुझे मेरे सोने के सिक्के की जाँच करने दो।

एक। दो। तीन। चार। पांच। छह। आज भी सोने के सिक्के वही हैं। जब कंजूस सोने के सिक्के गिन रहा था तभी पिछवाड़े में छिपे एक चोर ने उसे देख लिया। चोर चुपके से हर्षित हो गया 8९, 999 और 1000 में। शानदार! महान!

आज भी सोने के सिक्के वही हैं। कंजूस के घर लौटने के बाद चोर ने बर्तन से सोने के सभी सिक्के निकाल दिए। और उसने बर्तन को पत्थरों से भर दिया। और चोर वहां से चला गया।

अगली रात कंजूस सोने के सिक्के गिनने के लिए पिछवाड़े में आया। आओ। चलो देखते हैं। सोने के सिक्के कहां हैं? पत्थर। ये कैसे हुआ? मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं।

मेरे सोने के सिक्के चोरी हो गए हैं। मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। बात सुनो। बात सुनो। हमारा पड़ोसी जोर-जोर से चिल्ला रहा है। क्या हुआ? चलो देखते हैं। आओ। रुको। मैं जाकर देखूंगा। – मैं भी आऊंगा।

मैं समाप्त हो चुका हूँ। मैं समाप्त हो चुका हूँ। – क्यों? क्या हुआ? आपको क्या हुआ? – क्या हुआ? क्या हुआ? मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं नष्ट हो गया हूं। मगर क्या हुआ? – हाँ।

एक बर्तन में मेरे पास रखे 1000 सोने के सिक्के चोरी हो गए। चोरी हो गया। – क्या?

चार साल तक यह बर्तन में था। मैं रोज आकर उसे गिनता। लेकिन आज, मैं बर्बाद हो गया हूं। मैं बर्बाद हो गया हूं। – शांत हो जाओ। पहले शांत हो जाओ। शांत हो जाओ? मैं कैसे शांत होऊं? अब मैं क्या करूंगा? हे भगवान! – बात सुनो। देखो, मेरी बात सुनो।

चार साल से यहां सोने के सिक्के नहीं थे? हाँ। हाँ। आपको इतने सालों में इसकी आवश्यकता नहीं थी। हाँ। सच। सच। इसका मतलब है आपको भविष्य में भी इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह भी सच है।

आप बस यहाँ आते हैं और इसे गिनते हैं। है न? हां। हाँ।

आप भविष्य में भी गिन सकते हैं। अभी तक आप सोने के सिक्के गिनते थे। आज से आप पत्थर गिन सकते हैं। – क्या! बेशक। सोने के सिक्कों का एकमात्र उपयोग यह था कि आप इसे गिनते थे। अगर यह नहीं है तो क्या फर्क पड़ता है? आज आपके पास सोने के सिक्कों की जगह पत्थर हैं। बस।

और क्या? दोनों का कोई फायदा नहीं है। मैं समझ गया हूं कि आप क्या कह रहे हैं। – हाँ। केवल धन दौलत नहीं होनी चाहिए। – हाँ।

मेरे पास मौजूद सोने के सिक्के …. आपके बेटे को ही नहीं, बल्कि गाँव के सभी बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे। हाँ। – मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है। और मुझे सजा भी मिली है। मैं इस गलती को नहीं दोहराऊंगा। मैं नहीं करूंगा ।

कहानी का नैतिक है: अत्यधिक लालच हानिकारक है।

ईदगाह कहानी- मुंशी प्रेमचंद

13.समस्याओं का समाधान (Top 10 moral stories in hindi)

short moral stories in hindi for class 1

कई साल पहले एक बाबा गांव में आये और कई लोग अपने दुखो का समाधान पूछने उनके पास गए। बाबा ने आराम से सबके परेशानियों का हल बताया और सभी को कहा की संयम रखो और मेहनत करो ।

एक महीना तो ऐसा आराम से चलता रहा। फिर लोग हर बार उसी समस्याओं के बारे में शिकायत करने आने लगे। बाबा ने सोचा की कुछ करना पड़ेगा।

उन्होंने सबको एक पेड़ के निचे बुलाया और एक दिन उसने उन्हें एक चुटकुला सुनाया और सभी लोग हंसी में झूम उठे।

कुछ समय बाद, उन्होंने उन्हें वही चुटकुला सुनाया और उनमें से कुछ ही मुस्कुराए, जब उसने तीसरी बार वही चुटकुला सुनाया तो कोई भी नहीं हंसा।

बाबा मुस्कुराये और बोले ” जैसे तुम बार बार एक ही मजाक पे हंस नहीं सकते वैसे ही एक ही समस्या पे बार बार रो क्यों रहे हो ?”

कहानी से सीख- Moral of the Short hindi Story

चिंता करने से आपकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा.

14. चालाक गधा – Moral Based Stories in Hindi

14. चालाक गधा – Moral Based Stories in Hindi

एक दिन एक शेर अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी के तट पर गया। वहाँ नदी के दूसरे तट पर एक गधा भी पानी पी रहा था। गधे को देखकर शेन ने उसे अपना भोजन बनाने के लिए एक योजना बनाई।

शेर बोला, “प्यारे गधे, क्या नदी के उस किनारे कोई घोड़ा भी है? मेरी इच्छा उसका गाना सुनने की है।” गधे को उसकी नीयत पर तनिक भी संदेह नहीं है। वह बोला.”श्रीमान क्या घोड़ा ही गा सकता है, मैं नहीं?

लीजिए मेरा गाना सुनिए।” यह कहकर उसने अपनी आँखें बंद की और जोर-जोर से रेंकना शुरू कर दिया। मौका पाकर शेर ने नदी पार की और गधे को पकड़ लिया। गधा भी चालाक था।

वह बोला, “श्रीमान् ! मैं आपका भोजन बनने के लिए तैयार हूँ। लेकिन मैंने सुना है कि ताकतवर एवं बलशाली शेर अपना भोजन करने से पहले भगवान की प्रार्थना करते हैं।” शेर अपने को जंगल का सबसे शक्तिशाली जानवर मानता था।

इसलिए उसने प्रार्थना करने के लिए अपनी आँखें बंद कर ली। अब गधे को भागने का अच्छा मौका मिल गया। वह वहाँ से तेजी से भाग निकला। इस तरह चालाकी में वह गधा शेर पर भारी पड़ा।  

15.मेहनत पर भरोसा-Moral Stories for Childrens in Hindi

15.मेहनत पर भरोसा-Moral Stories for Childrens in Hindi

Hindi Short Stories with Moral

अनूप और कल्पेश दो अच्छे दोस्त थे। वे दोनों एक ही कक्षा में साथ में ही पढ़ते थे। पढ़ाई में दोनों ही बड़े होशियार थे। पढ़ाई करना उनका पहला काम था। अन्य चीजों पर वे बाद में ध्यान देते थे।

पढ़ाई में उन दोनों मुकाबला रहता था। कभी अनूप प्रथम आता, तो कभी कल्पेश। दोनों में यह बताना मुश्किल था कि पढ़ाई में कौन आगे है। दोनों को उनके क्लास टीचर भी बहुत चाहते थे। क्लास के सभी बच्चे उन दोनों का बहुत आदर करते थे, क्योंकि वे दोनों पढ़ाई में होक्षियार होने के साथ ही स्राथ दयातु और नम्न स्वभाव के थे।

कक्षा आठ की परीक्षा हुई। दोनों ने जमकर परीक्षा दी। परीक्षा का रिजल्ट भी घोषित हुआ। इस बार का परीक्षा में अनूप और कल्पेश तो क्या, क्लास के सभी बच्चे और खुद अध्यापक भी हैरान रह गए थे। हर परीक्षाओं में तो अनूप और कल्पेश लगभग साथ-साथ ही रहते थे, मतलब कभी अनूप कल्पेश से दस-पन्द्रह मार्क्स से आगे रहता तो कभी कल्पेश अनूप से | मगर इस बार न जाने क्या हुआ कि कल्पेश ने अनूप से लगभग पचास मार्क्स से बाजी मार ली थी।

परीक्षा के रिजल्ट के बाद दोनों स्कूल से घर लौट रहे थे। अनूप ने कल्पेश से कहा, “क्यो कल्पेश! इस बार तो तुम मुझे बहुत पीछे छोड़ गए। मेरा ऐसा भाग्य कहां, जो तुम्हारे मार्क्स पा सकू।” “नहीं अनूप! ऐसा तो नहीं।” मुस्कराता हुआ कल्पेश बोला। वह अपनी प्रशंसा सुनकर फूला नहीं समा रहा था।

Moral Stories for Childrens in Hindi

मन ही मन उसे अपने क्लास में सबसे अधिक मार्क्स से पास होने एवं अनूप के द्वार प्रशंसित होने से कल्पेश के मन में अभिमान जाग उठा। घमंड में कल्पेश के मन-मस्तिष्क पर ऐसा बुरा असर छोड़ा कि वह पढ़ाई रे धीरे-धीरे विचलित होने लगा। क्लास में जब शिक्षक पढ़ाने लगते तो वह दूसरे बच्चों से बातें करने लगता।

एक दिन शिक्षक इतिहास पढ़ा रहे थे। तीसरी पंक्ति में बैठे कल्पेश को बगल के एक लड़के से बातें करते देख शिक्षक ने कल्पेश को बहुत डांटा और छड़ी से उसे पीटा, और फिर उन्होंने पढ़ाना जारी रखा। इस सजा से कल्पेश का क्लास में बातें करना तो बन्द हो गया, परन्तु पढ़ाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह घमंड में आकर अनूप से भी कम बोलने लगा।

धीरे-धीरे परीक्षा आने लगी। क्लास के बच्चे जी जान से पढाई मे लग गए थे। कल्पेश बहुत ही आराम में था क्यों की उसे पता था की क्लास में पहला नंबर उससे कोई नहीं चीन सकता है।

परीक्षा हुई। कुछ दिनों बाद परीक्षा का रिजल्ट आ गया। इस बार अनूप क्लास में सबसे पहला आया था, जबकि कल्पेश इस बार अपना परीक्षा का रिजल्ट देखकर चौंक पड़ा। वह परीक्षा में फेल था। कल्पेश की अपनी करनी का फल मिल चुका था।

Moral of the Story – दोस्तों जिंदगी में हमेशा अपनी मेहनत पर भरोसा करो।

16.जिसकी लाठी उसकी भैंस – Might is Right

16.जिसकी लाठी उसकी भैंस – Might is Right

एक गाँव में एक दूधवाला रहता था। उसके पास बहुत सारी भैंसें थीं। वह अपनी भैंसों का बहुत ख्याल रखता था। वह अपना दूध अलग-अलग गाँवों में बेचता था। वह बहुत ईमानदार थे। उन्होंने दूध को पानी की तरह कभी भी अन्य दूधियों से नहीं जोड़ा।

Might-is-Right-जिसकी-लाठी-उसकी-भैंस

इसलिए गाँव वाले उससे दूध खरीदना पसंद करते थे। उनके ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ गई। उसने दूध कम चलाना शुरू कर दिया।

कभी-कभी वह अपने सभी ग्राहकों को दूध देने में असमर्थ था। अंकल, क्या मुझे आधा लीटर दूध मिलेगा? बेटे, मेरे पास कोई दूध नहीं बचा है। यह समाप्त हो गया है। दूधवाले ने अपने सभी ग्राहकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए एक और भैंस खरीदने का फैसला किया। वह पैसे लेकर भैंस खरीदने निकला।

भैंस के शेड में पहुंचने के बाद उसने कहा। भाई, मैं एक भैंस खरीदना चाहता हूं। आप कौन सी भैंस खरीदना चाहेंगे? आप उस भैंस को खरीद सकते हैं। दूधवाले ने भैंस को सूक्ष्मता से देखा।

उसने एक बड़ा काला भैंसा चुना। मैं यह भैंस खरीदना चाहता हूं। आप बहुत स्मार्ट हैं। आपने भैंस को चुना जो रोज 6-7 लीटर दूध देती है। वास्तव में? यह भैंस दिन में दो बार दूध देती है।

यदि आप इस भैंस को खरीदते हैं तो आप बहुत लाभ कमाएंगे। महान! उसने भैंस का भुगतान किया और भैंस को लेकर चला गया। घर पहुंचने के लिए उसे जंगल से गुजरना पड़ा। दूधवाले के सामने अचानक एक चोर आ गया। चोर के हाथ में एक छड़ी थी।

चोर ने कहा..मुझे भैंस दो या बीमार अपने सिर को छड़ी से तोड़ दो। दूधवाले ने कुछ देर सोचा और फिर कहा। ठीक है भाई। भैंस पाल लो। तुम मूर्ख हो। आप डर गए और मुझे अपनी भैंस दे दी। चोर भैंस को लेकर खुश होकर जाने वाला था …. तभी दूध वाले ने कहा। तुमने मेरी भैंस ले ली है।

कृपया मुझे अपनी छड़ी दें। मैं खाली हाथ घर कैसे जा सकता हूं? चोर ने सोचा कि वह अपनी छड़ी उसे दे देगा। तुम बहुत मूर्ख हो। छड़ी ले लो।

दफा हो जाओ। जैसे ही दूधवाले को छड़ी मिली दूधवाले ने छड़ी से उसे धमकाया और कहा। मुझे मेरी भैंस दो या बीमार इस छड़ी से अपना सिर तोड़ दो। चोर को अपनी मूर्खता का एहसास हुआ। यहाँ तुम्हारी भैंस है। अपनी छड़ी मुझे वापस दे दो।

चलो यहाँ से खो जाता है या बीमार आपको इस छड़ी के साथ बुरी तरह से पिटाई करते हैं और आपको पुलिस स्टेशन ले जाते हैं। चोर डर गया और भाग गया। दूधवाला खुशी-खुशी भैंस लेकर घर लौटा।

कहानी का नैतिक: यदि आप चालाकी से काम लेते हैं तो आप शक्तिशाली हो सकते हैं।

17. यादगार पलHindi Moral Stories

17. यादगार पल-Hindi Moral Stories

short moral stories in hindi for class 1

राहुल और नरेंद्र दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। एक बार दोनों रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा में किसी बहस के दौरान नरेंद्र ने राहुल को चेहरे पे झापड़ मारा। राहुल ने बिना कुछ कहे रेत पे लिखा ” मेरे अच्छे दोस्त ने मुझे झापड़ मारा”

कुछ समय बाद उनको मरुद्यान दिखाई दी और वो लोग उस और चल पड़े। वहां पर दोनों नहाने लगे लेकिन कुछ समय बाद राहुल को एहसास नहीं हुआ की वो किनारे के दल दल में चला गया है।

बहुत मुश्किल से नरेंद्र ने राहुल को खींच कर बहार निकाला।

राहुल बहार आने के बाद, उसने एक पत्थर पर लिखा :”आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई।”

नरेंद्र ने राहुल से उत्सुकता से पूछा ;”मैंने तुमको झापड़ मारा तो तुमनें रेत में लिखा और अभी पत्थर पे, ऐसा क्यों?”

राहुल ने उत्तर दिया; ” जब कोई ठेश पहुचाये तो उसे रेत में लिखने से क्षमा की हवाएं मिटा देंगी। लेकिन जब कोई अच्छा करे तो उसे पत्थर पे लिख के हमेशा के लिए स्थापित कर देना चाहिए।

इतना सुनते ही नरेंद्र ने राहुल को गले लगाते हुए माफ़ी मांगी और दोनों दोस्त खुशी खुशी अपनी मंजिल की तरफ चल दिए।

कहानी से सीख- Moral stories in Hindi

कोई अगर तुमसे बुरा करे तो तुम बुरा मत मनो और अगर कोई तुमसे अच्छा करे तो उसे जिंदगी भर याद रखो।

18. घर के संस्कार – Small Moral Story for Kids in Hindi

चंद्रकांत और सोमनाथ एक ही क्लास में पढ़ते थे और वे एक दूसरे के पड़ोसी भी थे। सोमनाथ पढ़ाई के साथ-साथ खेलने में भी अच्छा था और चंद्रकांत स्कूल छूटने के बाद सिर्फ खेलता और गांव भर घूमता रहता था।

एक दिन स्कूल में खेल दिवस आयोजित किया था और सोमनाथ ने कई खेल में हिस्सा लिया था। चंद्रकांत ने खेल दिवस पर कोई भी खेल में हिस्सा नहीं लिया था, वह सिर्फ अपने दोस्तों के साथ ग्राउंड पर दूसरे छात्रों का मजाक उड़ा रहा था।

अगले दिन स्कूल में प्राइज वितरण समारोह हुआ, सोमनाथ ने कई ईनाम जित लिए थे। चंद्रकांत को कई घंटे बेंच पर खड़ा किया गया। चंद्रकांत ने यह बात अपनी माँ को बताई। उसकी माँ ने उसे अपनी बेइज़्ज़त समझा। वह सोमनाथ के घर जा कर उसकी माँ से उलाहना देने ली, “अरे इनाम क्या मिल गया है कि सारे स्कूल में नचा-नचा कर दिखा रहा था। और हमारे चंद्रकांत को बेंच पर खड़ा करवा दिया।”

“किसने खड़ा करवा दिया बेंच पर? सोमनाथ ने?”” सोमनाथ की माँ ने पूछा। उन्हें पूरी स्थिति का पता नहीं था।

“हाँ, और क्या?” चंद्रकांत की माँ ने गुस्से से कहा।

“सोमनाथ को क्या पड़ी है जो बेंच पर खड़ा करवाएगा। पढ़ाई नहीं की होगी इसलिए रखा होगा।” सोमनाथ की माँ ने कहा।

“अरे तुम लोग दुश्मनी निकलवाते हैं। जलते हैं कि हम अच्छा खाते हैं अच्छा पहनते है।” चंद्रकांत की माँ ने कहा।

Hindi Story for Kids

मगर सोनू की माँ ने धीरज से काम लिया। बोली, “कल स्कूल चल कर पता करेंगे की हुआ क्या था।’”

“मैं देख लूंगी एक-एक को। स्कूल के मैनेजर से कह कर उस मास्टरनी को न निकलवा दिया तों कहना। जब देखो तब हमारे चंद्रकांत को सजा देती रहती है। अरे, और भी तो बच्चे हैं स्कूल में।’” चंद्रकांत की माँ का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था।

तभी सोमनाथ घर में आया। आते ही उसने उत्साह में कहा, “माँ, आज बड़ा ही मजा आया!!”

“हाँ, मजा क्‍यों नहीं आया होगा? चंद्रकांत को बैंच पर खड़ा करवा कर तुम्हे मजा जो आ रहा है।” चंद्रकांत की माँ बोल पड़ी।

सोमनाथ सहम गया। उसे यह पता था कि चंद्रकांत को बैच पर खड़ा किया गया था। वह धीरे से बोला, “चाची, चंद्रकांत दो दिन से होम वर्क नहीं करके ले जा रहा है। इसीलिए उसे सजा मिली। मैंने कहा मेरी कॉपी से उतार ले। वह भी वह नहीं करता।”

“हाँ, तू तो बहुत तेज है। देख लूंगी सबको” कहती हुई वह चली गई।

सोमनाथ की माँ चंद्रकांत की माँ को देखती रह गई। फिर उन्होंने सोमनाथ के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “चल, बैग रख कर हाथ मुँह घो ले। स्कूल से इतनी देर में क्यों आया?”

“माँ देखो मुझे कितने सारे इनाम मिले है।” सोमनाथ अपने इनाम अपनी माँ को दिखते हुए बोला।

Moral of Hindi Story for Kids – वो कहते है न संस्कार घर से ही आते है। दूसरों को दोष देने से पहले खुद को देखें।

19. शहद का स्वाद – Moral Story in Hindi for Education

19. शहद का स्वाद – Moral Story in Hindi for Education

कावेरी गांव में दो अच्छे मित्र रमाकांत और सुयोग रहते थे। वे दोनों सातवीं कक्षा में पढ़ते थे और अधिकतर साथ ही रहते-खेलते थे।

एक दिन स्कूल छूटने के बाद उन्होंने शहद खाने का विचार किया। बाजार से खरीदे हुए शहद मे वह स्वाद नहीं होता था इसलिए दोनों ने मधुमखियों की खोज शुरू कर दी। मधुमखियों को ढूंढ़ने के लिए उन्हें गांव के बाहरी जंगल में जाना पड़ता था। रमाकांत ने सुयोग को बताया कि गांव के थोड़े बाहर चलने के बाद नदी किनारे जंगल में एक पेड़ पर मधुमखियों का घोसला है।

योजना के अनुसार दूसरे दिन दोनों जंगल की ओर चल पड़े। रमाकांत ने अपने साथ एक लम्बी सी लकड़ी भी ले ली थी। सुयोग अपने घर से एक बड़ी सी टोकरी लेके आया था।

जब वे जंगले के नदी किनारे पहुंच गए तो मधुमखियों का घोसला देखकर बहुत खुश हुए। अब वे जल्दी से जल्दी शहद खाना चहते थे।

वे यह भी जानते ये कि मधुमखियां अपनी और अपने शहद की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहती है। संकट आते ही वे संघर्ष करने पर उतारू हो जाती हैं।

सुयोग ने अपनी बड़ी सी टोकरी पेड़ के निचे रख दी और लकड़ी पकड़ने रमाकांत की मदद करने के लिए चला गया। लकड़ी को पकड़कर दोनों बार -बार मधुमखियों के घोसले को चुबने लगे।

Moral Story in Hindi

थोड़ी ही देर बाद थोड़ा शहद सुयोग के टोकरी में गिरा और दोनों देखकर बहुत खुश हो गए। अब तक तो वहा कोई भी मधुमखियां वहा पर नहीं आयी थी पर जैसे ही सुयोग अपनी टोकरी लगे गया उस पर मधुमक्खियों के समूह ने हमला कर दिया। कई बार मना करने के बाद भी सुयोग रमाकांत की ओर भागने लगा जो की झाड़ियो के पीछे छुपा था। 

कुछ देर बाद चार-पांच मधुमक्खियों ने रमाकांत पर ही अपना हमला चढ़ा दिया। अब रमाकांत और सुयोग एक साथ दर्द से पीड़ित होकर भग्ग रहे थे। न तो सुयोग कुछ कह पा रहा था और न ही रमाकांत। दोनों ही दर्द के मारे भाग रहे थे।

कुछ देर बाद सुयोग का चेहरा सूज कर भारी हो गया। आंखों का पूरी तरह खुल पाना भी मुश्किल था। कपिल की जीभ भी सूज कर फूल गई।  दोनों मित्र ने अपने जीवन का सबक सिख लिया था और स्वादिष्ट शहद का स्वाद ही नहीं ले पाए क्यों की सुयोग अपनी टोकरऋ वही छोड़कर होगा था।

20. हँसना मना है –Moral Stories In Hindi In Short

शांति और अरुण अच्छे दोस्त थे। उन्होंने साथ में बहुत मस्ती की। उन्होंने कक्षा में रहस्य साझा किए। उन्होंने साथ में बहुत मस्ती की। उन्होंने कक्षा में रहस्य साझा किए। वे घर के रास्ते पर दौड़ पड़े। वह हमेशा हंसमुख थी। एक दिन, शांति धीरे-धीरे कक्षा में आई।

उसका सिर मुड़ा हुआ था। वह उदास लग रही थी। क्या किसी ने तुम्हें डाँटा था? अरुण से पूछा। शांति ने सिर हिला दिया। शांति ने सिर हिला दिया।

वह बैठ गई और उसने ऊपर नहीं देखा। उसने प्रेजेंट का जवाब नहीं दिया! जब सोना ने अपना नाम मिसकॉल किया। सोना मिस ने फिर कहा, इस बार जोर से, शांति कुमार! शांति ने हाथ उठाया। क्या आपके गले में खराश है? उसके शिक्षक ने उससे पूछा। शांति ने सिर हिला दिया।

उसके गाल लाल थे और ऐसा लग रहा था जैसे उसे बुखार था। क्या आप ठीक महसूस कर रहे हैं? सोना मिस ने पूछा। क्या आप ठीक महसूस कर रहे हैं? सोना मिस ने पूछा। शांति ने सिर हिलाया, फिर भी हिम्मत नहीं हुई।

अभी भी देखने की हिम्मत नहीं कर रहा है। शांति इतनी उदास क्यों दिखती है? शांति इतनी उदास क्यों दिखती है? क्या आपका छोटा भाई ठीक है? क्या आपका पिल्ला ठीक है? क्या आपका पिल्ला ठीक है? क्या आपकी दादी ठीक हैं?

शांति अपने प्रत्येक मित्र को अपना सिर हिलाती रही। शांति अपने प्रत्येक मित्र को अपना सिर हिलाती रही। लेकिन उसने नहीं देखा। अरुण उसे मुस्कुराना चाहता था। उसका अंदाजा था! उसने अपने बैग से कुछ निकाला। उसने अपने बैग से कुछ निकाला।

जैसे ही वह इसे शांति को दिखाने के लिए दौड़ा, यह उसके हाथ से फिसल गया। शांति ने उसकी ओर कुछ उड़ते हुए देखा और उसने उसे पकड़ लिया। यह एक बड़ा, हरा, रबर मेंढक था! यह एक बड़ा, हरा, रबर मेंढक था!

शांति की आँखें खुली की खुली रह गईं। फिर उसने हँसने के लिए अपना मुँह खोला। फिर उसने हँसने के लिए अपना मुँह खोला। अरुण और उसके दोस्तों ने देखा कि वह पूरे दिन मुस्कुराया या बात क्यों नहीं की! उसके सामने के चार दांत गायब हो गए थे!

21. मछली और मेंढक–बेस्ट मोरल स्टोरीज इन हिंदी

21. मछली और मेंढक की कहानी – Hindi Moral Story

एक तालाब  था।  उस तालाब में दो बड़ी मछलियां -सहस्त्रबुद्धी और सतबुद्धी रहती थीं। 

उनका एक दोस्त “मेंढक” था जिसका – नाम एक बुद्धि था। वो अक्सर उस तालाब के किनारे बहुत समय बिताया करते थे।

एक बार एक शाम, तालाब के किनारे जब वे मज़े कर  रहे थे, तभी उन्होंने मछुआरों को अपनी ओर आते देखा। मछुआरों के पास उनका जाल और टोकरी थी, जिनमें मछलियां भरी हुयी थी।

उस तालाब से गुजरते समय, मछुआरों ने देखा कि तालाब में बहुत सी मछलिया हैं । वे एक दुसरे  से बोले –“ क्यों न हम हम कल सुबह यहाँ आकर मछलियां पकड़े ? यह तालाब बहुत गहरा नहीं है और बड़ी बड़ी  मछलियों से भरा हुआ है “

मेंढक यह सब सुनकर उदास हो गया था और बोलै -“ प्यारी मछलियों अब  हमें कुछ योजना बनानी पड़ेगी, -कहाँ जाना है या छिपना है। वर्ना ये हमें कल पकड़ लेंगे !”

मछलियों ने ज्यादा परवाह न करते हुए कहा, “हे मित्र, मछुआरों की इस वार्ता से चिंतित न हो। वे नहीं आएंगे। फिर भी अगर वो आये, तो मुझे इस तालाब में बहुत ही गहरे पानी में स्थित एक सुरक्षित जगह पता है। हम वह छुप सकते हैं। 

इस पर दूसरी मछली भी बोली – “मैं कुछ मछुआरों की वजह से अपने  पूर्वजों के घर को नहीं छोडूंगी। मै भी गहरे पानी में सुरक्षित स्थान पर अपने आप को और अपने परिवार को भी बचा लूंगी ।”

लेकिन मेंढक को ये बात समझ नहीं आ रही थी। उसने कहा, “ठीक है आप यही रुकिए, लेकिन मैं अपने परिवार को लेकर तुरंत ही किसी दूसरे तलाब को चला जाता हूँ ।

योजना अनुसार अगली सुबह, मछुआरे तालाब में आये और जाल डाल कई मछलियों, मेढ़क और केकड़ों को पकड़ लिया। अपने को चालक समझ रही सहस्त्रबुद्धि और सतबुद्दी ने बचने के लिए कड़ी कोशिश की, लेकिन उनकी कोई तरकीब काम नहीं आई। जब मछुआरों ने अपने जाल को तालाब के किनारे पर लिया तो वे पहले ही मर चुकी थीे।

होशियार  मेंढक – एकबुद्धी ने , पहले से ही छुप ने के लिए एक अन्य तालाब ढूंढ लिया। अपने दोस्तों के लिए चिंतित होने के कारण , वह सतह पर आया और मछुआरों को अपने दोस्तों को साथ जाते देख , वह काफी उदास हो गया।

उसने अपनी पत्नी से कहा, “वे बहुत प्रतिभाशाली थे, लेकिन खतरे को भांप नहीं सके” (Moral Stories in Hindi)

कहानी से शिक्षा (Moral of the story) – खतरे के को उसके पहले संकेत पर भांप ले , और ज़िम्मेदारी के साथ अपने आप को बचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें।

22.भूखा लालची शेरबेडटाइम स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी

22.भूखा लालची शेर-Hindi Moral Stories

short moral stories in hindi for class 1

जंगल में गर्मी के मौसम में एक शेर अपने गुफा से निकला क्यूंकि उसको बहुत भूख लगी हुई थी। उसको सामने एक खरगोश दिखा और उसने तुरंत उसको अपने पंजे में कैद कर लिया।

उसने कुछ हिचकिचाहट के साथ सोचा “इससे मेरा पेट नहीं भरेगा” |

इसी बिच शेर को थोड़ी दूर में भागता हुआ एक हिरन दिखाई दिया। हिरन को देखते ही शेर का दिल गदगद हो गया और वह तुरंत खरगोश को छोड़ के वह हिरन की और भागा।

आहट पाते ही हिरन तुरंत घने जंगल में गायब हो गया। इसी बिच खरगोश भी वहां से भाग चूका था। वापस आके खरगोश को वहां ना पा कर शेर नेअफ़सोस किया।

कहानी से सीख- Moral stories in Hindi

जितना अपने पास में हो उससे संतुष्ट होना चाहिए ,दुर की चीज़ो के पीछे भागने से अपनी चीजें भी खो जाती है।

23. अच्छी आदतें – Moral Stories in Hindi for Kids

एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े का हैट हवा से उड़ गया। उसके पास ही तीन लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा, “मेरा हैट उड़ गया है, उसे पकड़ो। नहीं तो मै बिना हैट का हो जाऊंगा।”

वे लड़के उसकी बात पर ध्यान न देकर टोपी के उड़ने का मजा लेते हुए हंसने लगे। इतने में नीतू नाम की एक लड़की, जो स्कूल में पढ़ती थी, उसी रास्ते पर आ पहुंची।

उसने तुरंत ही दौड़कर वह हैट पकड़ लिया और अपने कपड़े से धूल झाड़कर तथा पोंछकर उस बूढ़े को दे दिया। उसके बाद वे सब लड़के स्कूल चले गए।

गुरूजी ने हैट वाली यह घटना स्कूल की खिड़की से देखी थी। इसलिए स्कूल की सुबह की असेम्ली में उन्होंने सब विद्यार्थियों के सामने वह हैट वाली बात कही और नीतू के अच्छे काम के लिए को भेंट दी।

जो तीन लड़के गरीब की हैट उड़ते देखकर हंसे थे, वे इस घटना का देखकर बहुत लज्जित और दुखी हुए।

24. सोने का अंडा – Moral stories in Hindi

24. सोने का अंडा – Moral stories in Hindi

किसी छोटे से गांव में एक गरीब किसान अपने परिवार के साथ रहा करता था। वह दिनभर खेत में काम करता था, लेकिन परिवार में सदस्यों की संख्या ज्यादा होने के कारण उसके लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो रहा था।

अपनी इस लाचारी को देखते हुए किसान हमेशा दुखी रहता और पैसा कमाने के नए-नए तरीकों के बारे में सोचता रहता।

उसकी इस हालत को देखते हुए उसके एक दोस्त ने उसे खेती के साथ मुर्गी पालने का सुझाव दिया। उसके दोस्त ने कहा कि अगर तुम खेती के साथ-साथ मुर्गी के अंडे बेचोगे, तो तुम्हारी कमाई अच्छी होगी। इससे तुम अपने परिवार को भरपेट खाना खिला पाओगे।

यह सुनकर किसान खुश तो हुआ, लेकिन बोला कि भाई मेरे पास तो मुर्गी खरीदने के भी पैसे नहीं हैं। ऐसे में मैं क्या खाक मुर्गी के अंडे बेचूंगा।

किसान की यह बात सुन उसका दोस्त बोला, भाई इतना भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। थोड़े पैसे मुझ से ले लो और दो-चार मुर्गी खरीद लो। बाद में जब पैसे आ जाएं, तो मुझे मेरे पैसे लौटा देना। उसकी यह बात सुनकर किसान राजी हो गया और कुछ पैसे दोस्त से ले लिए।

अगले दिन किसान पैसे लेकर बाजार की ओर निकल पड़ा। वहां जाकर उसने पांच से छह मुर्गियां खरीद लीं। बाकी, जो पैसे बचे उनसे मुर्गियों के लिए उसने दाना ले लिया। मुर्गी और दाना लेने के फौरन बाद वह घर की ओर रवाना हो गया। आखिर खेत पर भी तो जाना था।

घर लौटते ही उसने अपनी पत्नी को आवाज लगाई और कहा, सुनती हो, मैं मुर्गियां ले आया हूं। इन्हें ले जाओ और अच्छे से दाना-पानी दे देना। कल से ये जितने भी अंडे देंगी, उन्हें बेचकर थोड़ी कमाई हो जाया करेगी।

पत्नी के बाहर आते ही वह मुर्गियां और दाने उसके हाथ में थमाकर खेत की ओर चला गया। दिनभर खेत पर काम करने के बाद जब किसान वापस लौटा, तो अपनी पत्नी को देखकर हैरान हो गया। उसकी पत्नी ने मैले-कुचैले कपड़ों की जगह नई चमकदार रेशमी साड़ी पहने हुए थी। हाथों में सोने की चूड़ियां और गले में मोतियों का हार था।

यह सब देख उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अचानक उसकी पत्नी के हाथ ऐसा कौन-सा खजाना लग गया, जिससे उसने नए-नए कपड़े खरीद लिए। उसने अपनी पत्नी से पूछा यह सब क्या है? कैसे और कहां से आया यह सब? पत्नी मुस्कुरा कर बोली, बस यूं समझ लो ईश्वर की कृपा बरस चली है।

किसान फिर बोला, अरे! बताओ तो सही, ऐसा कैसे हो गया? पत्नी बोली आप जो मुर्गियां लाए थे, उसमें से एक मुर्गी ने सोने का अंडा दिया था। यह सुनते ही किसान एक दम से उछल पड़ता है और कहता है, क्या सच कह रही हो। पत्नी कहती है, हां सच में तभी तो यह सब आया और पति के हाथ में रुपयों से भरी थैली थमा देती है।

सोने के अंडे के बारे में जानकर किसान खुश तो बहुत होता है, लेकिन तसल्ली के लिए सब कुछ अपनी आंखों से देखना चाहता है। इसके लिए वह सुबह तड़के ही मुर्गियों के पास बैठ जाता है, तभी उनमें से एक मुर्गी सोने का अंडा देती है।

सोने का अंडा देख, वह खुशी से फूला नहीं समाता है। उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता है। वह अंडे को हाथ में उठाता है और अपनी पत्नी को आवाज लगाता है। पत्नी के आते ही वह कहता है, अब हम गरीब नहीं रहे। हम दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन जाएंगे।

किसान की यह बात सुनकर पत्नी कहती है कि पागल हो गए हो क्या? एक अंडे से कोई दुनिया का अमीर आदमी कैसे बन सकता है, लोगों के पास तो पता नहीं कितना-कितना सोना पड़ा है। पत्नी के इस तंज पर किसान कहता है, सोचो जब यह मुर्गी सोने का अंडा देती है, तो क्यों न एक साथ इसके पेट में मौजूद सारे अंडे निकाल लिए जाएं। पत्नी थोड़ा सोचती है, फिर उसे पति की बात जच जाती है। वह भागकर एक तेज धार वाला चाकू ले आती है।

किसान पत्नी के हाथों से चाकू लेकर एक झटके में मुर्गी का पेट चीर देता है। मुर्गी का पेट फटते ही मुर्गी मर जाती है और किसान के हाथ एक भी अंडा नहीं लगता। यह देख किसान और उसकी पत्नी को अपने किए पर बहुत पछतावा होता है।

कहानी से सीख:- सोने का अंडा देने वाली मुर्गी की कहानी से यह सीख मिलती हैं कि किसी भी मनुष्य को जितना है, उतने में ही संतोष करना चाहिए। लालच कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि लालच बुरी बला है।

25. चिड़िया की कहानी मोरल स्टोरीज हिंदी

चिड़िया की कहानी मोरल स्टोरी

Moral story in Hindi about bird

“मनमोहक वन” नामक एक सुन्दर जंगल था और उसके एक नन्ही चिड़िया रहा करती थी।  

सभी जानवर बड़े प्यार से रहते थे।  किसी गर्मी के दिन की बात है वह भीषण आग लग गयी। 

सभी जानवर सभी परेशान थे, काफी डर रहे थे और सोच रहे थे के क्या करें ?? 

तभी थोड़ी ही देर में जंगल में भगदड़ मच गयी। हवा तेज़ थी और देखते ही देखते आंग तेज़ी के साथ फैलने लगी।  

हर किसी को अपनी जान की चिंता थी। जान बचने के लिए सभी जानवर इधर से उधर भाग रहे थे। 

नन्हीं चिड़िया ने  देखा क़ि लोग भयभीत हैं और जंगल में आग लगी है।  वह उड़ सकती थी। खुद को बचा सकती थी लेकिन उसने सोचा के उसे अन्य जानवरो की मदद करनी चाहिए। 

पर वे बेचारी क्या कर सकती थी – जल्दी ही पास की नदी में गयी और अपनी छोटी सी चोच में पानी भरकर लाई और आग में डालने लगी.

नन्हीं चिड़िया बार बार नदी में जाकर अपनी चोच में थोड़ा थोड़ा पानी लाती और डालती। उधर एक उल्लू गुजर रहा था और उसने चिड़िया की इस हरकत को देखा और मन ही मन बोला क़ि ये चिड़िया कितनी वेवकूफ है. 

इस आग को क्या भला ये चोंच में पानी भरकर बुझा सकती है?

उल्लू  यही सोचता हुआ चिड़िया का मज़ाक उड़ने के उद्देश्य से चिड़िया के पास जाता है और बोलता है –“यह क्या कर रही हो ? क्या तुम मूर्ख हो जो इस तरह से आग बुझा ने की कोशीश कर रही हो? क्या ऐसे आग बुझाई जा सकती है ?”

नन्हीं चिड़िया ने अत्यंत ही विनम्रता के साथ उत्तर दिया- “मेरे छोटे से प्रयास से शायद ही कुछ होगा, शायद ही ये आग बुझेगी, लेकिन क्या हम हाथ पे हाथ धरे बैठे रहें ? हमसे जो भी होसके वह करना है।  प्रयास ही बड़ी चीज़ है। मैं अपना प्रयास करती रहूंगी फिर आग चाहे कितनी भी भयंकर हो” 

चिड़िया की यह बात सुन  – उल्लू बहुत प्रभावित हुआ और अन्य जानवरो को प्रेरित कर चिड़िया की मदद करने लगा | (Moral Stories in Hindi)

शिक्षा  (Moral of the story)

हमें सदा हर संभव प्रयास करना चाहिए।  इंसान परेशानी के समय घबराकर हार मान लेता है लेकिन हमें  प्रयास करते रहना चाहिए। 

26. कौवा और लोमड़ी-Hindi Moral short story

26. कौवा और लोमड़ी-Hindi Moral short story

short moral stories in hindi for class 1

एक बार एक कौवे ने एक दूकान से वडा चोंच में लेके भाग गया। वह उड़ते उड़ते थोड़ी दूर में एक पेड़ पे जाके बैठ गया। इसी बिच एक लोमड़ी ने कौवे के चोंच में बड़ा देख लिया और तुरंत वह कौवे की बड़ाई करने लगा की कौवा कितना सुन्दर है उसके पंख कितने सुनहरे है और वह बहुत अच्छा गाता है।

लोमड़ी ने कहा “तुम्हरी आवाज़ कितनी अच्छी है एक गाना सुना दो तो मजा आ जाए। “कौवा आत्म मुग्ध होके जैसे ही गाने के लिए मुँह खोला उसके चोंच से बड़ा निचे गिर गया।

और लोमड़ी उसे खा के वह से चला गया।

कहानी से सीख- Moral of the short hindi Story

दूसरों को मुर्ख मत बनाओ वरना तुम खुद मुर्ख बन जाओगे

27.चौकीदारShort Hindi Story with Good Moral

short moral stories in hindi for class 1

एक कंपनी के मैनेजर,राहुल को अपने कंपनी के लिए चौकीदार चाहिए था। उसके लिए उन्होने ने इश्तेहार निकाला। बहुत लोग इंटरव्यू देने आये. लेकिन मैनेजर को कोई भी पसंद नहीं आ रहा था। आखिर में राजू नाम का एक व्यक्ति बैठा था जो इंटरव्यू के लिए बैठा था

राहुल ने मोदी से पूछा “आप थके हुए लग रहे है ? कोई बीमारी है क्या ?” राजू ने जबाब दिया नहीं साहब, ऐसी कोई बिमारी नहीं है ,लेकिन नींद नहीं आने की बिमारी है। ” राहुल ने तुरंत उसको रात के चौकदारी के लिए रख लिया क्यूंकि वह चाह के भी सो नहीं सकता।

कहानी से सीख – moral of the story

अपनी असलियत नहीं छुपाना चाहिए।

28. मेहनत के सपने – Hindi Kahaniyan

28. मेहनत के सपने – Hindi Kahaniyan

एक गांव में एक भिखारी रहता था जो बेहद आलसी और गरीब था। वह मेहनत वाला कोई काम नहीं करना चाहता था लेकिन वह अमीर बनने के सपने देखता था। उसे उसका रोज का खाना भी भिक में ही मिलता था।

एक दिन गांव में बड़ी सी शादी थी। शादी के दिन दूल्हे ने उसे दूध का मटका दिया। भिकारी दूध को उबाला, उसमें से कूछ दूध पीया और बाकी दूध मटके में डाल दिया। उसने दूध में थोड़ा सा दही मिलाकर दूध को दही जमाने के लिए रख दिया। फिर वह आराम करने के लिए लेट गया।

वह दूध के मटके को देखकर बेहद खुश होता रहा और सोते हुए भी उस दही के मटके के बारे में सपने देखने लगा। उसने सोचा कि अगर वह अमीर बन गया तो उसके सारे दुख दूर हो जाएंगे। फिर उसका ध्यान उस दूध के मटके की तरफ चला गया जिसमें उसने दही जमाने के लिए रखा था।

वह सपने देखता रहा, “सुबह तक दूध का मटका दही में बदल जाएगा। मै दही में मदानी मार के उसमें से मक्खन निकालूंगा और फिर मै मक्खन को गर्म करके उसका घी बनाऊंगा। फिर मै बाजार जाकर उस घी को बेचूंगा और उसमें से पैसे कमाऊंगा।

Bacchon ki Kahani

उस पैसे से मैं एक मुर्गी खरीदूंगा। वह मुर्गी अंडे देगी और थोड़े समय बाद उन अंडों में से और मुर्गियां और मुर्गें निकलेंगे। यह मुर्गे और मुर्गियां बहुत सारे अंडे पैदा करेंगे। फिर कुछ समय में मेरा खुद का मुर्गी फार्म होगा।” वह सोचता रहा।

“फिर मै अपने फार्म की सारी मुर्गियां बेच दूंगा और फिर उससे गांव खरीदूंगा और दूध का व्यापार शुरू करूंगा। मुझसे फिर सारे गांव के लोग दूध खरीदेंगे। मैं बहुत आमिर बन जाऊंगा। सब लोग मेरा आदर करेंगे और अगर वह कोई भी गलत काम करेगा तो मै उसे गुस्सा करूंगा। उसे सही काम आदत डालने के लिए मैं उसे डंडे से भी मारूंगा।” अपने सपने में उस भिकारी ने अपने पलंग के पास रखे डंडे को उठा लिया और उस डंडे को मटके पर मार दिया। दूध का मटका टूट गया और वह अपने सपने से जाग गया। फिर उसे अहसास हुआ कि वह दिन में सपने देख रहा था।

Moral of the Story – आपके सपने मेहनत के बिना कभी पूरे नहीं होंगे।

29. रास्ते का पत्थर और ज़िम्मेदारी-Moral Stories In Hindi In Short

29. रास्ते का पत्थर और ज़िम्मेदारी-Moral Stories In Hindi In Short

एक बार एक राजा ने रास्ते में बड़ा सा गोल पत्थर रखवा दिया। उस रास्ते से बहुत सारे लोग आते जाते है। सभी को वह पत्थर दिखता है। सभी को उससे आने-जाने में दिक्कत भी होती है , लेकिन कोई भी उस पत्थर को हटाता नहीं है। राजा के कुछ मंत्री भी वहाँ से जाते है।

 बहुत लोग इस बात के लिये राजा को जिम्मेदार मानते है कि राजा रास्ते की सफाई नहीं करवाता है। इस तरह कुछ दिन बीत जाते है लेकिन कोई पत्थर नहीं हटाता है। एक दिन एक किसान सब्जी लेकर आता रहता है। वह पत्थर को देखकर रुक जाता है। वह अपना सब्जी का बोझ नीचे रखकर पत्थर को हटाने के लिये जाता है।

वह बहुत कोशिश करता है। लेकिन पत्थर हिलता नहीं है। वह किसान हार नहीं मानता है। वह फिर से कोशिश करता है और इस बार वह पत्थर को हटाने में सफल हो जाता है। पत्थर हटा कर जैसे ही वह अपना सब्जी का बोझ उठाने जाता है तो देखता की पत्थर की जगह पर एक थैला रखा है।

वह थैला उठा लेता है। वह थैला खोल कर देखता है तो उसमे सोने के सिक्के रहते है और उसमे एक कागज की पर्ची रहती है। उस पर लिखा रहता है कि राजा की तरफ से रास्ते का पत्थर हटाने के लिये इनाम। 

इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हर स्मस्या एक मौके की तरह है। स्मस्या हमें जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती है। इसलिये स्मास्या का डट कर सामना करना चाहिये उनसे भागना नहीं चाहिये।

30. आदत का जिम्मेदार – चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी

एक आदमी को रोज़ दारू पीने की बुरी आदत पड़ गयी थी। उसकी इस आदत से घरवाले बड़े परेशान रहते थे। गांव के लोगों ने उसे समझाने कि भी बहुत कोशिश कि, लेकिन वो हर किसी को एक ही जवाब देता, “मैंने ये आदत नहीं पकड़ी, इस आदत ने मुझे पकड़ रखा है।”

वास्तव में सचमुच वो इस आदत को छोड़ना चाहता था, पर कई कोशिशों के बावजूद वो ऐसा नहीं कर पा रहा था। उसके परिवार वालों ने सोचा कि शायद शादी करवा देने से वो ये आदत छोड़ दे सकता है, इसलिए उसकी शादी करा दी गयी।

पर कुछ दिनों तक सब ठीक चला और फिर से वह शराब पिने लगा। उसकी पत्नी भी अब काफी चिंतित रहने लगी, और उसने निश्चय किया कि वह किसी न किसी तरह अपने पति की इस आदत को छुड़वा ही लेगी।

एक दिन गांव में प्रसिद्ध साधु महाराज आ गए। वो अपने पति को लेकर उनके आश्रम पहुंची। साधु ने कहा, “बताओ पुत्री तुम्हारी क्या समस्या है?”

पत्नी ने दुखी स्वर में सारी बातें साधु महाराज को बता दी। साधु महाराज उनकी बातें सुनकर समस्या कि जड़ समझ चुके थे, और समाधान देने के लिए उन्होंने पति-पत्नी को अगले दिन आने के लिए कहा।

अगले दिन वे आश्रम पहुंचे तो उन्होंने देखा कि साधु महाराज एक पेड़ को पकड़ के खड़े है। उन्होंने साधु से पूछा कि आप ये क्या कर रहे हैं, और पेड़ को इस तरह क्यों पकडे हुए हैं?

Hindi Mein Kahaniyan

साधु ने कहा, “आप लोग जाइये और कल आइयेगा”  फिर चौथे दिन भी पति-पत्नी पहुंचे तो देखा कि फिर से साधु पेड़ को पकड़ के खड़े हैं।

उन्होंने पूछा, “महाराज माफ़ करिये पर आप ये क्या कर रहे हैं? आप इस पेड़ को छोड़ क्यों नहीं देते?”

साधु बोले, “मैं क्या करूँ बालक ये पेड़ मुझे छोड़ ही नहीं रहा है?”

पति हँसते हुए बोला, “महाराज आप पेड़ को पकडे हुए हैं, पेड़ आप को नहीं! आप जब चाहें उसे छोड़ सकते हैं”

साधू-महाराज गंभीर होते हुए बोले, “इतने दिनों से मै तुम्हे क्या समझाने कि कोशिश कर रहा हूँ। यही न कि तुम दारू पिने की आदत को पकडे हुए हो, ये आदत तुम्हे नहीं पकडे हुए है!”

पति को अपनी गलती का अहसास हो चुका था। वह समझ गया कि किसी भी आदत के लिए वह खुद जिम्मेदार है, और वह अपनी इच्छा शक्ति के बल पर जब चाहे उसे छोड़ सकता है।

31. सबसे शक्तिशाली आशीर्वाद – Moral stories in hindi for kids

31. सबसे शक्तिशाली आशीर्वाद – Moral stories in hindi for kids

पटना शहर में एक गरीब दर्जी अपने इकलौते बेटे के साथ एक छोटे से घर में रहता था। उसका सपना था की उसका बेटा बहुत अच्छी पढ़ाई करके एक अच्छी से नौकरी करे। इसलिए उन्होंने तय किया कि उसके बेटे को सबसे अच्छी शिक्षा मिलेगी, चाहे उनकी वर्तमान स्थिति कैसी भी हो।

पिता दिन रात मेहनत करता और अपने बेटे के पढाई का खर्चा उठता। बेटा ही खूब मन लगाकर पढता।

एक दिन पिता का सपना सच हो गया। बेटा पढ़ लिख कर बहुत बड़ा आदमी बन गया और वह अब शहर की सबसे अच्छी कंपनी का मुखिया था।

एक दिन बेटा अपने बड़े और आलिशान ऑफिस में बैठा हुआ था, तभी उसके पिता उसका ऑफिस देखने आये। बेटा अपने ऑफिस की शानदार कुर्सी पर बैठा हुआ था। पिता का देख बेटा खुश हो गया और अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया।

पिता ने बेटे को कुर्सी पर बैठाया और बेटे के पीछे खड़े हो गए और उसके कंधो पर अपना हाथ रखते हुए कहा “बेटा, तुम्हे पता है कि आज इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली इंसान का एहसास किसे होता होगा?”

पिता आगे कुछ और बोल पाते तभी बेटे ने कहा “पिता जी मैं हूँ सबसे शक्तिशाली इंसान।” पिता ने सोचा था कि बेटा उन्हें ही सबसे शक्तिशाली कहेगा लेकिन बेटे के इस जवाब से उन्हें बहुत निराशा हुई।

“ठीक कहा बेटा” इतना कहते ही पिता बेटे के ऑफिस से जाने ही लगे थे कि एक बार और पीछे मुड़ कर वही सवाल बेटे से किया “बेटा, तुम्हे अभी भी लगता है कि तुम सबसे शक्तिशाली हो?”

बेटे ने कहा “नहीं पिता जी, इस दुनिया में अगर कोई सबसे शक्तिशाली है तो वो आप हैं”

“लेकिन अभी तो तुमने कहा था कि तुम ही सबसे शक्तिशाली हो” पिता ने फिर पुछा

“हाँ, वो मैंने इसलिए कहा था क्यूंकि उस वक़्त दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान के हाथ मेरे कंधे पर थे, इसलिए उस वक़्त मैं खुद को सबसे शक्तिशाली मेहसूस कर रहा था” बेटे ने जवाब दिया ये सुन पिता की आँखों में आंसू आ गए और उन्होंने अपने बेटे को गले से लगा लिया।

Moral of Hindi Stories – माता पिता का आशीर्वाद ही है जो हमें इस दुनिया के सबसे शक्तिशाली बना सकता है।

32. कैसे आया जूता – Moral Story in Hindi

एक बार की बात है एक राजा था। उसका एक बड़ा-सा राज्य था। एक दिन उसे देश घूमने का विचार आया और उसने देश भ्रमण की योजना बनाई और घूमने निकल पड़ा। जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल आया। उसने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़ पत्थर थे वे मेरे पैरों में चुभ गए और इसके लिए कुछ इंतजाम करना चाहिए।

कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने सैनिकों व मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें चमड़े से ढंक दी जाएं। राजा का ऐसा आदेश सुनकर सब सकते में आ गए। लेकिन किसी ने भी मना करने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे रुपए की जरूरत थी। लेकिन फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद राजा के एक बुद्घिमान मंत्री ने एक युक्ति निकाली। उसने राजा के पास जाकर डरते हुए कहा कि मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूँ।

अगर आप इतने रुपयों को अनावश्यक रूप से बर्बाद न करना चाहें तो एक अच्छी तरकीब मेरे पास है। जिससे आपका काम भी हो जाएगा और अनावश्यक रुपयों की बर्बादी भी बच जाएगी। राजा आश्चर्यचकित था क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी आज्ञा न मानने की बात कही थी। उसने कहा बताओ क्या सुझाव है। मंत्री ने कहा कि पूरे देश की सड़कों को चमड़े से ढंकने के बजाय आप चमड़े के एक टुकड़े का उपयोग कर अपने पैरों को ही क्यों नहीं ढंक लेते। राजा ने अचरज की दृष्टि से मंत्री को देखा और उसके सुझाव को मानते हुए अपने लिए जूता बनवाने का आदेश दे दिया।

कहानी से शिक्षा: हमेशा ऐसे हल के बारे में सोचना चाहिए जो ज्यादा उपयोगी हो। जल्दबाजी में अप्रायोगिक हल सोचना बुद्धिमानी नहीं है। दूसरों के साथ बातचीत से भी अच्छे हल निकाले जा सकते हैं।

33. क्या अच्छा क्या बुरा- Short Story in Hindi

33. क्या अच्छा क्या बुरा- Short Story in Hindi

किसी गांव में एक किसान था। उसका कहना था कि ईश्वर जो भी करते हैं, हमारे भले के लिए करते हैं। एक दिन उसका घोड़ा रस्सी तुड़ाकर जंगल की ओर भाग गया। इस पर उसके पड़ोसियों ने आकर दुख जताया। लेकिन किसान शांत रहा।

दो दिन बाद किसान का घोड़ा वापस आ गया और अपने साथ तीन जंगली घोड़े और लाया। लोगों ने आकर ख़ुशी प्रकट की। लेकिन किसान शांत रहा। दो दिन बाद उन्हीं में से एक जंगली घोड़े की सवारी करते समय उसका पुत्र गिर गया। उसकी एक टांग टूट गयी। पड़ोसियों ने फिर आकर अफसोस प्रगट किया। लेकिन किसान फिर भी शांत ही रहा।

अगले दिन राजा की सेना के लोग गांव आये और गांव के नौजवानों को जबरदस्ती सेना में भर्ती करने लगे। किसान का लड़का पैर टूट होने की वजह से बच गया।

हममें से कोई नहीं जानता कि हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा? इसलिए ईश्वर जो करते है, हमें उसे अपने लिए अच्छा ही मानना चाहिए।

Moral of Story- सीख: हमेशा ईश्वर के निर्णय को उदारतापूर्वक स्वीकार करना चाहिए। वे कभी किसी का बुरा नहीं करते।

34. रेगिस्तान की यात्रा – Acchi Kahaniyan with Moral

34. रेगिस्तान की यात्रा – Acchi Kahaniyan with Moral

एक आदमी रेगिस्तान में यात्रा कर रहा था। साथ में था उसका ऊंट और ऊंट पर लदा था ढेर सारा सामान। ऊंट और वह दोनों ही पसीने से तर बतर थे। गरमी से थक कर उस आदमी ने फैसला किया कि अब वह कहीं आराम करेगा। इसलिए यात्रा बीच में ही रूक गई। ऊंट की पीठ से अपना तंबू उतारकर आदमी ने एक जगह गाढ़ दिया और उसके अंदर जाकर सुस्ताने लगा।

ऊंट भी छाया चाहता था मगर आदमी ने डपटकर उसे धूप में ही खड़े रहने का हुक्म सुना दिया। उस ने तंबू में करीब दो घंटे तक आराम किया। जब सूरज थोड़ा सा ढल गया, तब उस ने भोजन किया और ऊंट पर सवार होकर यात्रा के लिए चल पड़ा। ऊंट बेचारा मन मसोसकर रह गया। उसे गुस्स तो बहुत आ रहा था अपने निर्दयी मालिक पर, पर अब वो कुछ नहीं कर सकता था।

रात हो गई। मौसम ठण्डा होने लगा था। रेगिस्तान में दिन जितने गरम होते हैं, रातें उतनी ही ठण्डी होती हैं। आधी रात होते-होते उस आदमी के दांत ठंड से किटकिटाने लगे तो उसने फिर ऊंट को रोका और उसकी पीठ से तंबू उतराकर रेत में ही लगाया तथा उसके अंदर घुसकर आराम करने का विचार किया।

इस बार ऊंट पहले से ही तैयार था। उसने कहा, ”मालिक, मुझे भी ठंड लग रही है।“

”तो?“ आदमी ने घूरकर उसकी ओर देखा और टैंट में घुस गया। ऊंट बार बार तंबू में सिर घुसेड़कर पूछता, ”मालिक मैं भी अंदर आ जाऊं?“

Moral stories in Hindi for Class 8

उस आदमी ने सोचा कि ऐसे तो यह बेहूदा ऊंट मुझे सोने ही नहीं देगा। इसलिए उसने कहा, ”ठीक है, तुम भी अपना सिर तंबू के अंदर कर लो।“ ऊंट खुश हो गया। वह मन ही मन मुस्करा रहा था।

कुछ ही समय गुजरा था कि ऊंट ने फिर कहा, ”वाह मालिक, मजा आ गया। अब मेरे सिर को ठंड नहीं लग रही है। आप बुरा न मानें तो अपनी अगली टांगें भी तंबू के अंदर कर लूं।“ आदमी ने सोचा इसमें बुराई क्या है? उसने अपने पैर सिकोड़ लिए और ऊंट ने गरदन और अगली टांगें भी टैंट में कर लीं।

आदमी की आंखें झपकी ही थी कि ऊंट जोर जोर से कराहने लगा। आदमी ने पूछा, ”अब क्या हुआ?“ ऊंट बोला, ”ऐसे तो मैं बीमार हो जाऊंगा मालिक! आधा शरीर गरम और आधा ठंडा हो रहा है। देख लीजिए, अगर मैं बीमार हो गया तो आपको भी यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ेगी।“

वह आदमी बेचारा सोच में पड़ गया। फिर बोला, ”तो क्या करूं?“ ”करें क्या मालिक? मैं अपना बाकी शरीर भी अंदर कर लेता हूं।“ ऊंट बोला।

”नहीं, नहीं! इस तंबू में दो की जगह नहीं है।“ ”हां, यह बात तो है मालिक।“ ऊंट बोला, ”ऐसा कीजिए, आप थोड़ा बाहर निकल जाइए। मैं अंदर लेट जाता हूं।“ यह कहकर ऊंट तंबू में घुस गया और आदमी को सारी रात रेगिस्तान की ठंड में गुजरानी पड़ी।

इस तरह समझदार ऊंट ने अपना बदला चुकाकर सारा हिसाब किताब बराबर कर लिया। अगली यात्रा पर ऊंट के मालिक ने बड़ा तंबू खरीद ने का सोचा, उसे उसका सबक मिल चूका था।

35. मछुआरा और नन्ही मछली –Moral stories in hindi for kids

35. मछुआरा और नन्ही मछली –Moral stories in hindi for kids

एक मछुआरे को बहुत भूख लगी थी। दिनभर नदी किनारे बैठकर मछली पकड़ता रहा पर उसे मछली नहीं मिली।

हाँ, शाम के समय एक छोटी मछली अवश्य हाथ लगी। मछुआरे ने उसी से संतोष करना चाहा, पर मछली बोली,

“मुझ पर दया करो, मैं अभी बहुत छोटी हूँ। मुझे खाकर तुम्हारा पेट नहीं भरेगा।

जल में जाकर मैं शीघ्र ही बड़ी हो जाऊँगी तब तुम मुझे खा लेना।” मछुआरे ने कहा,

“बड़ी कठिनाई से तू मेरे हाथ लगी है। बाद का पता नहीं, मैं तो तुझे अभी ही खाऊँगा।”

Moral of Story

शिक्षा : बड़े वादे से छोटा लाभ ही भला है।

36. दोस्त का महत्व (Hindi short stories with moral for kids )

36. दोस्त का महत्व (Hindi short stories with moral for kids )

वेद गर्मी की छुट्टी में अपनी नानी के घर जाता है। वहां वेद को खूब मजा आता है , क्योंकि नानी के आम का बगीचा है। वहां वेद ढेर सारे आम खाता है और खेलता है। उसके पांच दोस्त भी हैं , पर उन्हें वेद आम नहीं खिलाता है।

एक  दिन की बात है , वेद को खेलते खेलते चोट लग गई। वेद के दोस्तों ने वेद को उठाकर घर पहुंचाया और उसकी मम्मी से उसके चोट लगने की बात बताई , इस पर वेद को मालिश किया गया।

मम्मी ने उन दोस्तों को धन्यवाद किया और उन्हें ढेर सारे आम खिलाएं। वेद जब ठीक हुआ तो उसे दोस्त का महत्व समझ में आ गया था। अब वह उनके साथ खेलता और खूब आम खाता था।

नैतिक शिक्षा – दोस्त सुख – दुःख के साथी होते है। उनसे प्यार करना चाहिए कोई बात छुपाना नहीं चाहिए।

37. सबसे कीमती चीज – बच्चों की कहानियाँ

37. सबसे कीमती चीज – बच्चों की कहानियाँ

सीलमपुर गांव में एक भिखारी रहता था। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करता था। उसे ठीक से खाने या पिने नहीं मिलता था, जिस वजह से उसका बूढ़ा शरीर सूखकर कांटा हो गया था। वह अपने आप को बहुत ही कमज़ोर महसूस करने लगा था।

एक दिन वह रास्ते के एक ओर बैठकर गिड़गिड़ाते हुए भीख मांगा करता था। एक बालक उस रास्ते से रोज अपने स्कूल के लिए निकलता था। भिखारी को देखकर उसे बड़ा बुरा लगता। उसका मन बहुत ही दुखी होता।

वह छोटा बालक सोचता,  “आखिर यह आदमी क्यों भीख मांगता है? भगवान उसे उठा क्यों नहीं लेते?”

एक दिन उससे न रहा गया। वह भिखारी के पास गया और अपनी टिफिन में से कुछ रोटियां देते हुए बोला, “बाबा, तुम्हारी ऐसी हालत हो गई है फिर भी तुम जीना चाहते हो तुम भीख मांगते हो, पर ईश्वर से यह प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह तुम्हें अपने पास बुला ले?

भिखारी ने हस्ते हुए बोला, “बेटा तुम जो कह रहे हो, वही बात मेरे मन में भी उठती है। मैं भगवान से रोज प्रार्थना करता हूं, पर वह मेरी सुनता ही नहीं। शायद वह चाहता है कि मैं इस धरती पर रहूं, जिससे दुनिया के लोग मुझे देखें और समझें कि एक दिन मैं भी उनकी ही तरह था, लेकिन वह दिन भी आ सकता है, जबकि वे मेरी तरह हो सकते हैं। इसलिए बेटा किसी को घमंड नहीं करना चाहिए।

लड़का भिखारी की ओर देखता रह गया। उसने जो कहा था, उसमें कितनी बड़ी सच्चाई समाई हुई थी। हमारी जिंदगी सबसे कीमती चीज है।

38. हाथी को चुनौती देने वाला भँवरा – Hindi Moral Stories

38. हाथी को चुनौती देने वाला भँवरा – Hindi Moral Stories

एक दिन, गोबर में रहने वाले भँवरे की निगाह मेज पर रखी शराब की खाली बोतल पर पड़ी।

वह बोतल के पास गया और उसमें बची- खुची बूंदें पी गया जिससे उसे नशा चढ़ गया।

इसके बाद वह खुशी – खुशी गुंजन करता हुआ वापस गोबर के ढेर में चला गया। पास से ही एक हाथी गुजर रहा था।

गोबर की गंध की वजह से वह दूर हट गया और सीधा जाने लगा। नशे में चूर भँवरे को लगा कि हाथी उससे डर गया है।

उसने वहीं से भँवरे को आवाज लगाई और उसे लड़ने की चुनौतीदेने लगा।

“इधर आ, मोटे! मुझसे मुकाबला कर। देखते हैं कौन जीतता है, वह हाथी की ओर देखकर चिल्लाया।

हाथी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। नशे की धुन में भँवरा उसे लगातार चुनौती देता रहा।

आखिरकार, हाथी का धीरज खत्म हो गया। उसने गुस्से में आकर भँवरे पर गोबर और पानी फेंक दिया। भँवरे की वहीं जान निकल गई।

Moral of Story

शिक्षा : शराब का नशा व्यक्ति को अपने बारे में गलतफहमी पैदा कर देता है।

39.मां की ममता – Short Hindi stories with moral

39.मां की ममता – Short Hindi stories with moral

आम के पेड़ पर एक सुरीली नाम की चिड़िया रहती थी। उसने खूब सुंदर घोंसला बनाया हुआ था। जिसमें उसके छोटे-छोटे बच्चे साथ में रहते थे। वह बच्चे अभी उड़ना नहीं जानते थे , इसीलिए सुरीली उन सभी को खाना ला कर खिलाती थी।

एक दिन जब बरसात तेज हो रही थी। तभी सुरीली के बच्चों को जोर से भूख लगने लगी। बच्चे खूब जोर से रोने लगे , इतना जोर की देखते-देखते सभी बच्चे रो रहे थे। सुरीली से अपने बच्चों के रोना अच्छा नहीं लग रहा था। वह उन्हें चुप करा रही थी , किंतु बच्चे भूख से तड़प रहे थे इसलिए वह चुप नहीं हो रहे थे।

सुरीली सोच में पड़ गई , इतनी तेज बारिश में खाना कहां से लाऊंगी। मगर खाना नहीं लाया तो बच्चों का भूख कैसे शांत होगा। काफी देर सोचने के बाद सुरीली ने एक लंबी उड़ान भरी और पंडित जी के घर पहुंच गई।

पंडित जी ने प्रसाद में मिले चावल दाल और फलों को आंगन में रखा हुआ था। चिड़िया ने देखा और बच्चों के लिए अपने मुंह में ढेर सारा चावल रख लिया। और झटपट वहां से उड़ गई।

घोसले में पहुंचकर चिड़िया ने सभी बच्चों को चावल का दाना खिलाया। बच्चों का पेट भर गया , वह सब चुप हो गए और आपस में खेलने लगे।

मोरल –

संसार में मां की ममता का कोई जोड़ नहीं है अपनी जान विपत्ति में डालकर भी अपने बच्चों के हित में कार्य करती है।

40. गधा, मुर्गा और शेर –Moral Stories In Hindi In Short

40. गधा, मुर्गा और शेर –Moral Stories In Hindi In Short

एक बाड़े में एक गधा, एक मुर्गा साथ रहा करते थे। एक दिन एक शेर उस गधे के ऊपर झपटने ही वाला था कि मुर्गे ने उसे देख लिया और जोर से चिल्ला दिया।

शेर अचानक उसकी आवाज सुनकर डर गया और भागने लगा। गधे ने शेर को भागते देखा तो बहुत प्रसन्न हुआ।

उसने सोचा कि अगर मैं जंगल के राजा शेर का पीछा करूँ तो सारे जानवर उसका बहुत सम्मान करेंगे।

यह सोचकर वह शेर के पीछे दौड़ पड़ा। अचानक शेर पलट गया और गधे पर झपट पड़ा। गधे की मौत वहीं पर हो गई और वह तुरंत मर गया।

Moral of Story

शिक्षा : घमंड नादानी से शुरू होता है और बर्बादी से खत्म होता है।

41. दो भाई और पिता New moral story in Hindi

एक बार की बात है, एक गांव में दो भाई अपने पिता के निर्देशन में, उन्होंने अपनी पोल्ट्री फार्म में काम करने लगे। अपने पिता के साथ काम करने के कुछ साल बाद।

बड़े भाई ने देखा, कि पिता अपने छोटे भाई को ज्यादा जिम्मेदारी और इनाम दे रहा है। बड़े भाई को यह अनुचित लगा। क्योंकि दोनों समान रूप से अच्छा काम करते थे।

और वह बड़े होने के नाते, अधिक जिम्मेदारी और इनाम उसे देना चाहिए। वह अपने पिता के पास गया और कहा, “मैं अभी बड़ा हूं, लेकिन तुम मेरे छोटे भाई को ज्यादा जिम्मेदारी दिया। ऐसा क्यों?”

पिता ने कहा, “मैं तुम्हें बताता हूं। लेकिन पहले तुम रामू के पोल्ट्री फॉर्म में जाओ, और पूछो कि क्या उनके पास बिक्री करने के लिए कोई टर्की पक्षी है? हमें अपने स्टॉक में जोड़ने की आवश्यकता है।”

वह अपने पिता के निर्देशानुसार गया, और जल्दी जवाब के साथ लौटा। “हां पिता उनके पास टर्की पक्षी है, जो हमें जो हमें बेच सकते हैं। पिता ने कहा, “ठीक है, कृपया जाकर उनसे कीमत पूछिए।”

वह फिर से गया, और लौट आया। उन्होंने अपने पिता से कहा, “कि हम पति टर्की पक्षी ₹100 पर खरीद सकते हैं।” पिता ने कहा, “अच्छा ठीक है, अब जाओ और पूछो कि वह कल तक उन्हें पहुंचा सकते हैं।”

बड़े बेटे गए, और जवाब के साथ वापस लौटे। “हां वह कर सकते हैं।” इन सब के बाद पिता ने अपने छोटे बेटे को बुलाया। और कहा, “रामू के पोल्ट्री फार्म में जाओ,

और देखो की, उनके पास बिक्री करने के लिए कोई टर्की पक्षी है या नहीं?” छोटे बेटे उनके निर्देशानुसार गया, और जवाब लेकर लौटा। “हां पिताजी, उनके पास बिक्री करने के लिए टर्की है।

उनके पास 5 टर्की है, जो पति ₹100 की है। और चार टर्की है, जो प्रति ₹80 की है। मैंने उन्हें पांचों को देने के लिए कहा। अगर हमें उन चारों को भी चाहिए, तो हम उसे खरीद सकते हैं।”

इसके बाद पिता ने अपने बड़े बेटे के और देखा। जिसे अब एहसास हुआ, कि उनके छोटे भाई को अधिक जिम्मेदारी क्यों दी गई थी। फिर उन्होंने अपने छोटे भाई की प्रशंसा की।

नैतिक शिक्षा : जो अधिक समझता है, हमें उनसे कुछ सीखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।

42. सच्ची सफलता और विफलता – वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

रमेश और सुरेश जुड़वाँ भाई थे। वे बचपन से एक ही स्कूल में और एक ही कक्षा में पढ़ते थे। अब वे दोनों १० वि कक्षा के छात्र थे।

42. सच्ची सफलता और विफलता – वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

उनकी ही कक्षा में अनिकेत नाम का एक छात्र था जो बहुत ही अमीर परिवार से से था। एक दिन अनिकेत अपने जन्मदिन पर बहुत महंगा मोबाइल लेकर कर स्कूल आया। सभी उसे देख कर बहुत चकित थे। हर कोई उस मोबाइल के बारे में बातें कर रहा था, कि तभी कक्षा के एक छात्र ने अनिकेत से पुछा, “यार, ये इतना महंगा मोबाइल आपको किसने दिया?”

“मेरे भाई ने मुझे यह मोबाइल गिफ्ट किया है, कल ही वह विदेश से आया है।” अनिकेत अपना मोबाइल दिखते हुए बोला।

यह सुनकर कक्षा में सभी उसके भाई की तारीफ़ करने लगे, हर कोइ यही सोच रहा था कि काश उनका भी ऐसा कोई भाई होता। रमेश भी कुछ ऐसा ही सोच रहा था, उसने सुरेश से कहा, “काश हमारा भी कोई ऐसा भाई होता!”

पर सुरेश की सोच अलग थी, उसने कहा, “काश मैं भी ऐसा बड़ा भाई बन पाता!”

 Moral of Hindi Stories – हमारी सफलता और विफलता हमारे दृष्टिकोण पर काफी हद तक निर्भर करती है। हमारी सोच ही है जो हमे एक अच्छा व्यक्ति बनाती है।

43. एक पेंच का मूल्य Best education story in Hindi

एक बार की बात है, एक उद्योगपति था। बह बहुत ही अमीर आदमी था, उसकी कई फ़ैक्टरी था। एक बार उसकी एक फ़ैक्टरी में उत्पादन लाइन बेवजह टूट गई।

इससे उसे प्रतिदिन लाखों का नुकसान हो रहा था। कोई भी यह पता लगाने में सक्षम नहीं था, कि उत्पादन लाइन में क्या समस्या है। अंत में, उद्योगपति एक विशेषज्ञ को खोजने में सक्षम रहे।

फिर जब विशेषज्ञ आया, तो उसने उत्पादन लाइन कि अच्छी तरह से जांच की। उसने इधर उधर देखा, फिर एक बिंदु पर उसने स्कू ड्राइवर लिया और सिर्फ एक स्कू को घुमा दिया।

और उसके साथ साथ, पूरी उत्पादन लाइन ठीक से काम करने लगी। फिर काम खत्म होने के बाद विशेषज्ञ ने ₹10000 के एक बिल उद्योगपति को प्रस्तुत किया।

प्रभावित होकर, उद्योगपति ने बिल के एक आइटम संस्करण की मांग की। कुछ ही मिनटों के बाद विशेषज्ञ ने आइटम के बिल के साथ वापस आ गए।

बिल में लिखा था, “स्कू टाइट करने के लिए ₹100, यह जानने के लिए कि कौन सा स्कू टाइट करना है ₹9900।”

नैतिक शिक्षा : एक व्यक्ति, अपने जीवन में लंबे समय तक कड़ी मेहनत करने के बाद। किसी भी चीज में कुशल या विशेषज्ञ बनते हैं।

44. राजू की समझदारी –Moral stories in Hindi for Class 8

44. राजू की समझदारी –Moral stories in Hindi for Class 8

जतनपुर में लोग बीमार हो रहे थे। डॉक्टर ने बीमारी का कारण मक्खी को बताया। जतनपुर के पास एक कूड़ेदान है। उस पर ढेर सारी मक्खियां रहती है। वह उड़कर सभी घरों में जाती , वहां रखा खाना गंदा कर देती। उस खाने को खाकर लोग बीमार हो रहे थे।

राजू दूसरी क्लास में पढ़ता है। उसकी मैडम ने मक्खियों के कारण फैलने वाले बीमारी को बताया।

राजू ने मक्खियों को भगाने की ठान ली।

घर आकर मां को मक्खियों के बारे में बताया। वह हमारे खाने को गंदा कर देती है। घर में आकर गंदगी फैल आती है। इसे घर से बाहर भगाना चाहिए।

राजू बाजार से एक फिनाइल लेकर आया।

उसके पानी से घर में साफ सफाई हुई। रसोई घर में खाना को ढकवा दिया। जिसके कारण मक्खियों को खाना नहीं मिल पाया।

दो दिन में मक्खियां घर से बाहर भाग गई।

फिर घर के अंदर कभी नहीं आई।

मोरल –

स्वयं की सतर्कता से बड़ी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।

45. जंगल का तोता – Panchatantra Short Stories in Hindi with Moral

45. जंगल का तोता – Panchatantra Short Stories in Hindi with Moral

एक शहर में मसाले बेच ने वाले का एक बहुत बड़ा व्यापारी था। आसपास के गांवों के लोग उसकी दुकानों पर मसाले खरीदने आते थे। शहर में सेठ के कई दुकाने थी। आसपास के गांवों में भी मसलो की कोई दुकाने नहीं थी इसलिए सेठ खुद ही कभी-कभी मसाले बेचने के लिए जाता था।

एक बार सेठ गांव में कुछ मसाले बेच ने के लिए गया था। वहां से लौटते समय एक पेड़ के नीचे वह आराम करने बैठ गया और थोड़ी ही देर में उसे नींद आ गई। जब वह नींद से जागा तो उसने अपने आसपास तोतों का समूह देखा। हरे रंग, लाल चोंच और गले पर काली पटृी वाले तोतों को देखकर सेठ ने सोचा, कितने सुंदर हैं ये तोते। एक दो तोतों को साथ ले जाऊं तो परिवार के लोग बहुत खुश होंगे।

यह सोचकर सेठ ने अपना गमछा तोतों के झुण्ड पर फेंका और एक तोता पकड़ लिया। इस तोते को सेठ अपने घर ले गया।

सेठ ने घर पहुंचकर तोते के लिए सोने का पिंजरा बनवाया। उसमें तोते के लिए बैठक और एक झूला रखवाया। पानी पीने के लिए कटोरी और खाने के लिए एक छोटी सी तश्तरी भी रखवाई। तोता सोने के पिंजरे में रहने लगा। उसे अमरूद, मिर्च आदि मनपसंद वस्तुएं खाने को दी जाने लगीं।

घर के बच्चे तथा सेठ तोते से बातें भी करते। तोता थोड़ा थोड़ा बोलना भी सीख गया। तोते के साथ बातें करने में सबको बहुत आनंद आने लगा।

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कुछ दिनों बाद सेठ को गांव में से कुछ मसलो की आर्डर आयी और उसने खुद ही जाने का फैसला किया। जाते वक्त उसने अपने तोते से कहा, ”तोते राम, मैं गांव में जा रहा हूं। लौटते समय मैं तेरे माता पिता व सगे संबंधियों से मिलूंगा। तुझे उनके लिए कोई संदेश भेजना हो तो बता?“

तोते ने कहा,”सेठ जी, उन सबसे कहना, तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा भी नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद से रह रहा है।“

सेठ अपने मसाले बेचकर लौटते समय उसी पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रूका। तभी तोतों का एक समूह उस पर टूट पड़ा। वे उसे चोंच से मारने लगे। उनमें से एक तोते ने सेठ से पूछा, ”सेठ जी, हमारा तोता क्या कर रहा है?“

सेठ ने उन्हें शांत करते हुए कहा, ”तोता भूखा नहीं है, तोता प्यासा नहीं है। तोता सोने के पिंजरे के अंदर आनंद कर रहा है।“

यह सुनकर सभी तोते बिना कुछ बोले जमीन पर मुर्दों की तरह लुढ़क गए। सेठ उनके पास गया उसने तोतों को हिला डुलाकर देखा, पर ऐसा लगा जैसे सारे तोते आघात से मर गए हों।

सेठ जी घर पर आए। सेठ को देखते ही तोते ने अपने माता पिता एवं सगे संबंधियों के समाचार पूछे।

सेठ ने कहा, ”तेरे माता पिता और सगे संबंधियों को जब मैंने तेरा संदेश सुनाया तो सभी लुढ़क गए। क्या उन्हें आघाल लगा होगा?“

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पिंजरे के तोते ने कोई जवाब नहीं दिया। सेठ की बात सुनकर वह स्वयं भी पिंजरे में झूले से नीचे गिर पड़ा। सेठ ने यह देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उसने पिंजरे का दरवाजा खोला और तोते को हिला डुलाकर देखा। सेठ जी को लगा वह तोता भी आघात से मर गया है। सेठ जी ने तोते को पिंजरे से बाहर निकालकर थोड़ी दूर पर रख दिया। मौका देखकर तोता पंख फड़फड़ाता हुआ उड़ गया।

जाते जाते उसने कहा, ”सेठ जी, मैं आपका आभारी हूं। मुझे अपने माता पिता का संदेश मिल गया है। मैं उनसे मिलने जा रहा हूं। आपका पिंजरा सोने का था, लेकिन वह पिंजरा था। मेरे लिए वह जेल थी।“ तोता उड़ता हुआ जंगल में अपने माता पिता और सगे संबंधियों के पास पहुंच गया। उसे लौटकर आया हुआ देख सब खुश हो गए।

अब मुक्त वातावरण में तोता सबके साथ आनंद से रहने लगा।

46. अलीबाबा और खजाना –Moral Stories In Hindi In Short

46. अलीबाबा और खजाना –Moral Stories In Hindi In Short

पर्शिया में अलीबाबा और कासिम नामक दो भाई रहते थे। कासिम एक धनवान सौदागर था पर अलीबाबा एक गरीब लकड़हारा था।

एक दिन अलीबाबा जंगल में लकड़ी काटने गया हुआ था। वहाँ उसने चालीस लुटेरों को घोड़े पर सवार आते देखा। एक गुफा के सामने उनका नेता घोड़े से उतरा और बोला,

“खुल जा सिमसिम!” गुफा का दरवाजा खुल गया और लुटेरे भीतर चले गए। थोड़ी देर बाद वे बाहर आए। उनके नेता ने फिर कहा,

“बंद हो जा सिम सिम!” और गुफा का दरवाजा बंद हो गया। उनके जाने के बाद अलीबाबा उसी तरह बोलकर गुफा में चला गया।

वहाँ उसने ढेर सारे सोने, जवाहरात, अशर्पिफयाँ और तरह तरह की बहुमूल्य वस्तुएँ देखीं। जितना भर सकता था अपने थैले में भरकर, गधे की पीठ पर लादा और घर आ गया।

अलीबाबा ने अपने भाई कासिम को जाकर सारी बातें बताईं। कासिम उन जादुई शब्दों को याद करता हुआ गुफा के पास जाकर बोला, “खुल जा सिमसिम!” गुफा का दरवाजा खुला, कासिम भीतर गया और दरवाजा बंद हो गया।

अपार संपत्ति देखकर वह अपने सुध-बुध खो बैठा। थैले भरे पर जादुई शब्द वह भूल गया। वह वहीं बंद रहा और लुटेरों के आने पर वह मारा गया।

Moral of Story

शिक्षा : सोच समझ कर कार्य करना चाहिए।

47.अभिमानी राजा Nice moral stories in Hindi

एक बार की बात है, एक राज्य था, जिस पर एक अत्याचारी राजा का शासन था। वह इतना घमंडी था, कि वह अपने अलावा किसी और की प्रशंसा नहीं कर सकता था।

एक बार, उनके राज्य में एक ऋषि आए। कुछ दिनों के भीतर राज्य में फैले ऋषि की प्रशंसा। वह दयालु और बुद्धिमान था। उन्होंने अपने प्रश्नों को, बुद्धिमानी से उत्तर देकर लोगों की मदद की।

एक दिन, राजा ने एक योजना के बारे में सोचा। फिर राजा ने ऋषि को अपने महल में आमंत्रित करने के लिए अपने पहरेदारों को भेजो। ऋषि ने उनका आमंत्रण स्वीकार कर लिया।

47.अभिमानी राजा Nice moral stories in Hindi

उस दिन के लिए, सार्वजनिक घोषणाएं की गई। नियत दिन पर, ऋषि मुस्कुराते हुए आए। राजा ने ऋषि का स्वागत किया। राजा ने मंत्री को कहा, कि वह उसकी बुद्धि के बारे में सुने।

और उसे अपने लिए देखना चाहता था। फिर राजा ने कहा, “मैं आपसे एक सवाल पूछूंगा।” जवाब में ऋषि मुस्कुराया, राजा हाथ में, एक कपड़े की थैली लिए हुए था।

उन्होंने सवाल किया, “बताओ मेरे हाथ में क्या है?” ऋषि ने उत्तर दिया, “तुम उस थैली के अंदर एक पक्षी को पकड़े हुए हो।” राजा थोड़ा आश्चर्यचकित था, फिर भी शांति से उत्तर दिया।

“हां, आप सही है, अब बताइए यह जीवित है या मृत? यदि आप एक बुद्धिमान हैं, तो आप जवाब देने में सक्षम होंगे।” राजा ने टिप्पणी की

राजा की योजना थी, यदि ऋषि कहते हैं कि पक्षी जीवित है। तो वह पक्षी की गर्दन को कुचल देगा, और सभी को एक मृत पक्षी दिखाएगा।

और यदि वह ऐसा कहता है, कि यह एक मृत पक्षी है। तो मैं पक्षी को जीवित रहने दूंगा, और सभी को दिखाऊंगा कि यह जीवित है।

राजा ने सोचा कि चाहे वह कुछ भी कहे, जीत हमारा होगा। ऋषि ने कहां, “खैर, यह आपके हाथ में है। आप इसे ठीक कर सकते हैं, अगर यह जीवित है या मृत है।

नैतिक शिक्षा : अपनी पसंद और प्रयास से, हम यह तय कर सकते हैं, कि हमारे जीवन का क्या बनाना है।

48. बुद्धि की जीत-Small moral stories in hindi

48. बुद्धि की जीत-Small moral stories in hindi

एक गाँव में कुश्ती का आयोजन हुआ था। दूर-दूर के सभी गाँवो से बड़े-बड़े पहलवान आये हुए थे। सभी पहलवान हट्टे कट्ठे थे। पहलवानों की भीड़ में कालू पहलवान सबसे दमदार था, जिसने आज तक एक भी कुश्ती नहीं हारी।

कुश्ती का प्रोग्राम चालु हुआ। बारी-बारी से सभी पहलवानों के बीच में कुश्ती हुई. कुश्ती के अंतिम पड़ाव में सभी पहलवानों को कालू से भिड़ना होता था, लेकिन कालू के सामने कोई टिक नहीं पाता था।

आख़िरकार इस कुश्ती प्रतियोगिता का विजेता भी कालू ही रहा।

गाँव के सरपंच ने कालू का हाथ ऊपर कर उसे विजेता घोषित कर दिया और इनाम की पांच लाख को स्वीकार करने के लिए मंच पर बुलाया।

कालू भरी भीड़ में चिल्लाते हुए बोला कि–क्या इस भीड़ में कोई ऐसा बंदा हैं जो मुझे हरा सकता हैं। अगर मुझसे जीत गया तो ये पांच लाख उसके और अगर हार गया तो उसको मुझे एक लाख रूपये देने होंगे। क्या किसी को ये चुनौती मंजूर हैं?

भीड़ के सभी नौजवान एक दुसरे का मुंह देखने लगे। कोई आगे नहीं आया। किसी को आगे न आता देख कालू हंसने लगा।

तभी एक दुबला-पतला आदमी आया और बोला मुझे तुमसे कुश्ती खेलनी हैं।

दोनों मैदान में उतर गए, सभी लोग कालू के लिए तालियाँ बजा रहे थे। किसी ने गुल्लू का नाम तक नहीं लिया।

अब गुल्लू और कालू के बीच कुश्ती शुरू हुई. गुल्लू किसी तरह से खुद को बचा कर आगे भाग रहा था। सभी लोग गुल्लू की मुर्खता पर हंस रहे थे।

गुल्लू को भी लग रहा था कि उसने अखाड़े के अन्दर आकर गलती कर दी हैं, लेकिन वापस बाहर गया तो एक लाख देने होंगे।

गुल्लू ने अपना दिमाग चलाया और चालाकी से उसको पीछे से पकड़ लिया और कालू को खूब गुदगुदी की।

कालू ने किसी तरह उसको छुड़ाया और सामने ले आया। अगली बार जैसे ही कालू ने हाथ उठाया गुल्लू ने उसके टांगो के निचे से निकल कर उसकी टांगे खींच दी और कालू घिर पड़ा।

भीड़ अब गुल्लू-गुल्लू करने लगी। कालू ने अपना होश खो दिया, लेकिन किसी तरह वह खड़ा हुआ। एक बार फिर दोनों आमने सामने थे। एक बार फिर गुल्लू ने कालू की टांगो के नीचे से होकर घुटनों के बीच दे मारा। कालू घिर पड़ा और फिर खड़ा नहीं हुआ।

सरपंच ने गुल्लू का हाथ ऊपर किया और उसको विजेता घोषित किया। शर्त के अनुसार गुल्लू पांच लाख जीत गया।

कहानी की सीख – बुद्धि के आगे बल को झुकना ही पड़ता हैं।

49. गधे से प्रेरणा – School Moral Stories in Hindi

49. गधे से प्रेरणा – School Moral Stories in Hindi

पवन अपने गधे को लेकर दूसरे गांव से लौट रहा था। गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण सीधे एक बड़े गहरे गड्डे में गिर गया।

उसे निकलने के लिए पवन ने पूरी कोशिश की लेकिन वह उस गधे को निकाल नहीं पाया।

बहुत कोशिशों के बाद, जब शाम हो गयी और अँधेरा होने लगा तो पवन को लगा की उसके गधे को उस गड्डे से निकालना अब असंभव हैं। तो उसने उसे जिन्दा ही मिट्टी से ढक देने का सोचा और वह ऊपर से मिट्टी डालने लगा।

बहुत देर तक मिट्टी डालने के बाद पवन अपने घर चला गया।

पर ढेर सारी मिट्टी डालने के कारण वह गधा अपने ऊपर गिरे हुए मिट्टी की मदद से धीरे-धीरे उस पर अपना पैर रख-रख कर उस गड्डे के ऊपर चढ़ गया।

अगले दिन जब पवन सुबह उठा तो उसने देखा उसका गधा उसके घर के बहार ही खड़ा था। गधे को अपने घर देखकर उसे यकीन ही नहीं हो रहा था।

कभी हार मत मानो। जिंदगी में चमत्कार होते ही रहेंगे।

50. हैमलिन का बांसुरी वाला –Child moral stories in hindi

50. हैमलिन का बांसुरी वाला –Child moral stories in hindi

जर्मनी में हैमलिन नामक एक छोटा-सा शहर था। वहाँ बहुत सारे चूहे रहते थे। वहाँ के लोग चूहों से परेशान होकर मेयर के पास गए। मेयर को चूहों से बचने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था।

तभी बाँसुरी धरी एक व्यक्ति ने मेयर से कहा, “श्रीमान! मैं बाँसुरी बजाता हूँ। मुझे पता चला है कि चूहों ने आपके नाक में दम कर रखा है। मैं उन्हें यहाँ से ले जा सकता हूँ पर मुझे बदले में क्या मिलेगा?”

मेयर ने कहा, “मैं तुम्हें एक हजार सोने की अशर्पिफयाँ दूँगा । बाँसुरी वाला राजी हो गया। सड़क पर चलते-चलते उसने अपनी बाँसुरी की धुन छेड़ दी। हर दिशा से चूहे निकल-निकल कर उसके पीछे-पीछे चलने लगे।

बांसुरी वाला चलते-चलते उन्हें नदी के किनारे ले गया। सभी चूहे पानी में गिरकर डूब गए।

अब अपना पुरस्कार लेने के लिए बांसुरी वाला मेयर के पास गया। मेयर ने उसे एक हजार चाँदी के सिक्कों की थैली दी। क्रुद्ध बांसुरी वाला चुपचाप बाहर चला गया और दूसरी धुन अपनी बाँसुरी पर बजाने लगा।

इस बार चूहों की जगह शहर के सभी बच्चे सम्मोहित होकर उसके पीछे-पीछे चलने लगे। बांसुरी वाला उन्हें एक पहाड़ी पर ले गया और कभी दोबारा दिखाई नहीं दिया।

Moral of Story

शिक्षा : बुरे काम का बुरा नतीजा होता है।

51. ख्याल रखना New moral stories in Hindi 2021

एक बार की बात है, एक सर्कस ग्रुप में एक छोटी लड़की और एक युवा महिला थी। वे एक साथ प्रदर्शन करते थे। युवा महिला छोटी लड़की को गुर सिखाती,

वह आज्ञाकारिता के साथ सीखती। शो में उनके अभिनय में, युवती के हाथ में एक पोल बैलेंस रहती थी। और छोटी लड़की को, इसके ऊपर चढ़ना पढ़ती थी।

और जब छोटी लड़की शीर्ष पर पहुंची थी, तो युबा महिला ने अपना संतुलन बनाए रखती। और युवती इसे लेकर घूमती थी।

अपने अभिनय के दौरान, से दोनों जानते थे संतुलन बनाए रखने। और किसी भी चोट को रोकने के लिए, पूरा ध्यान रखती।

एक दिन युवा महिला ने, छोटी लड़की से कहा। “सुनो प्रिया, हमारे अभिनय के दौरान, मैं तुम्हें देखूंगी और तुम मुझे देखोगी। ताकि हम एक दूसरे की संतुलन बनाए रखने में मदद कर सके।

और किसी भी दुर्घटना होने से रोक सके, और अपना कार्य पूरा कर सकें।” लेकिन छोटी लड़की ने जवाब दिया,

” दीदी, मुझे लगता है कि हममें से प्रत्येक के लिए यह बेहतर होगा, कि हम स्वयं को देखें।

खुद की देखभाल करने का मतलब है, हम दोनों की देखभाल करना। मुझे यकीन है, कि हम किसी भी दुर्घटना से बचेंगे। और अपना कार्य पूरा करेंगे।

नैतिक शिक्षा : खुद की देखभाल करना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिसे आप दूसरों की देखभाल के लिए कर सकते हैं।

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शुक्रिया ✌💖😊

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25 Responses

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