अहम – बेवफा लव स्टोरी इन हिंदी | Sade love story in hindi

मोस्ट रोमांटिक लव स्टोरी इन हिंदी

sade love story in hindi: जब भी कोई आम सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपनी नौ से पांच की नौकरी से ऊब जाता है तो उसे तीन ही रास्ते समझ आते है एमबीए, आईएएस और स्टार्टअप ( द पिचर्स- द वायरल फीवर)

पहला प्रयास (true sad love story in hindi)

प्रकाश भी ऐसा ही था, जब पहली बार मुझसे कंपनी में मिला था तो अपना नाम परकास (प्रकाश नहीं) बताया था और कहा था की वो किसी भी मुद्दे पे परकास डाल सकता है। दरभंगा का रहने वाला था, 2 साल की सॉफ्टवेयर की नौकरी एक नामी गिरामी कंपनी में काम करने के बाद कुछ बड़ा करने की चाहत उसे दिल्ली खींच लायी आईएएस की तैयारी करने के लिए।

मेरा अच्छा मित्र था तो मुझे इनकी कहानी करीब से पता है, जब उसने पहला प्रयास किया तो इंटरव्यू तक पहुंच गया लेकिन मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाया तो बोला ई इक्साम तो मैया है सारे इक्क्सामो की”, जब कोई ये परीक्षा देने बैठता है तो यह फिर आपकी जीवनशैली बन जाता है, आपकी माशूका, आपका पहला सफ़ेद बाल, आपके शरीर का एक अंग, आपकी इज़्ज़त, आपकी उम्मीद और भी बहुत कुछ ।

यह परीक्षा ज़िन्दगी बदल देती है किसी न किसी तरीके से, यह आपको वो दे देती है जो अपने सोचा न हो कभी । यह परीक्षा आपके अंदर का कवि, साहित्यकार, आलोचक, दार्शनिक, नौकरशाह, अवसाद और पता नहीं क्या क्या निकाल के रख देती है । और हर परीक्षार्थी की अलग कहानी (चाहे उसका चयन हो या न हो) बुन देती है ।

दूसरा प्रयास, फिर वो आती है, ज़िन्दगी में । (sad love story in hindi boy)

लेकिन वो सुन्दर नहीं है, उसकी ज़ात की नहीं है, उसके राज्य की भी नहीं है, बस प्रकाश के अखड़पन पर फ़िदा है, प्रकाश की बातें उसे समझ नहीं आती थी लेकिन प्रकाश का साथ उसे अच्छा लगता था, प्रकाश बस पढ़ता रहता था, भारतीय राजव्यवस्था, भारतीय इतिहास, फ्रंटलाइन और पता नहीं क्या क्या, उसके कमरे में किताबों का अम्बार लगा रहता था, पता नहीं किस किस चीज़ की फोटोकॉपी करवा के रखी थी, कमरा रद्दी की दूकान ज्यादा लगता था लेकिन जब वो आयी उसने सब संवार दिया ।

प्रकाश को उसने अपना सब कुछ दे दिया, अपनी लगन, निष्ठा, आत्मसम्मान, अनुराग, दुआ, प्रार्थना, उसे सिर्फ देना आता था, पहली बार ज़िन्दगी में किसी की महिला दोस्त को देखकर जलन महसूस हुई थी मुझे, आखिर कोई इतना अच्छा कैसा हो सकता है ।

वो उसके लिए नोट्स बनाती, खाना बनाती, उसके कपड़े धोती, प्रकाश की आँखों में उसके लिए एक दिन आंसू आ गए उसकी कर्तव्यपरायडता देखकर, इतनी लगन से तो सिर्फ माँ अपने बेटे की सेवा करती है लेकिन प्रकाश ने अपने आपको संभाला अभी मैं कमजोर पड़ गया तो परीक्षा में मजबूत कैसे रहूँगा, ” आखिर वो मेरी दोस्त है, बीवी नहीं ” (लेकिन बीवियां भी इतना कहा करती है), लेकिन प्रकाश सोचता है एक दिन वो उसे सब कुछ देगा जो वो उसे अभी तक नहीं दे पाया ।

परिणाम आ जाता है और प्री में नहीं होता, प्रकाश टूट जाता है, उसकी गोद में सर रखकर दिन रात रोता है, वो उसको सम्बल देती है, वो उसकी माँ, बेहेन, प्रेयसी, दोस्त सब बन जाती है लेकिन प्रकाश अपनी नाकामी बर्दाश्त नही कर पता और धीमे धीमे अवसाद में चला जाता है ।

तीसरा प्रयास (love story in hindi sad)

प्रकाश से ज्यादा इस बार वो मेहनत करती है उसके लिए, उसके नोट्स बनाती है, मंदिर जाती है, सोमवार का व्रत रखती है (निर्जला), प्रकाश पूछता है तो इतना सब क्यों कर रही हो मेरे लिए, वो कहती है ” पगले मैं खुद से ज्यादा तुझे प्यार करती हूँ”, प्रकाश पूछता है “क्यों”, वो कहती है “बस ऐसे ही” , प्रकाश कहता है “मुझे तुम्हे खोने से डर लगता है” , वो बस हंस देती है ।

प्री-मेन-इंटरव्यू इस बार एक झटके में पार हो जाता है, दोनों साथ यूपीएससी भवन, धौलपुर हाउस परिणाम देखने जाते है, रैंक आती है दो सौ में, प्रकाश वहीं रोने लग जाता है, लोग उसे घेर लेते है, 4 साल की मेहनत आख़िरकार रंग ला ही गयी, घर पर फ़ोन करके बताता है की सिलेक्शन हो गया है, उसके दरभंगा में खुशियों का आलम हो जाता है।

लेकिन वो बस दूर से खड़े उसे देख रही होती है, धीमे धीमे आंसू का एक क़तरा उसकी एक आँख से गिरता है, वो खुश है लेकिन प्रकाश के तो पैर ही ज़मीन पर नहीं पढ़ रहे, अगले दो हफ्तों तक प्रकाश नए परीक्षार्थियों को ज्ञान देता है, रणनीति सिखाता है, जो कभी उसकी प्रेयसी ने उसके लिए बनाई थी, धीमे धीमे प्रकाश में घमंड आ जाता है, किसी भी इंटरव्यू में वो यही बताता है कि “उसकी” मेहनत से ये सब हुआ, प्रकाश सोचता है की अगर वो न भी होती तो भी परीक्षा तो पास कर ही ले जाता।

प्रकाश के पापा को अब मोटा दहेज़ चाहिए और लड़की किसी राजनेता या अफसर की होनी चाहिए आखिर प्रकाश भी तो अफसर है, उस रियलिटी में उसकी प्रेयसी कही फिट नहीं बैठती, प्रकाश उसे इस बात से अवगत कराता है वो रोती है लेकिन अपने को संभाल लेती है, जब तक वो चट्टान बन कर प्रकाश के पीछे खड़ी रही तब तक प्रकाश को वो औसत नहीं लगी, आज प्रकाश ने खुद उसे चट्टान से रास्ते का पत्थर बना दिया।

वो प्रकाश से मिन्नत नहीं करती कि वो उसकी ज़िन्दगी में रुक जाए, शायद वो प्रकाश को प्रकाश से ज्यादा जानती थी, थोड़ा आत्म सम्मान तो उसमे अब भी बाकी था, वो शहर छोड़ देती है, दिल्ली दिलवालो की है लेकिन दिल सिर्फ शायद कुछ चुनिंदा लोगों के पास ही मिला था उसे। (1)

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