12 बेस्ट परियों की कहानी | Pariyon ki Kahaniya in hindi

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Pariyon ki kahaniya in hindi: एक समय था जब बच्चे सुबह स्कूल जाते थे। दिन में घर लौट कर अपना होमवर्क पूरा करते और शाम को जी भर कर मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलते रहते थे।शाम होते ही खाना खाने के बाद सारे बच्चे दादी दादा या नाना-नानी के कमरे में इकट्ठे हो जाते थे। ताकि नाना-नानी या दादा-दादी से मजेदार राजा-रानी ,परी,दुष्ट राक्षस या कोई और कहानी सुनने को मिले।

सभी बच्चे या तो दादी को घेर कर बैठ जाते या दादी की गोद में लेट जाते ।फिर शुरू होती दादी की कहानियां का सिलसिला। कभी दादी रानी राजा के महलों की सैर कराती तो कभी परीलोक के दर्शन कराती , और कभी दुष्ट राक्षस की कहानी सुनाकर खूब डराती थी। कभी-कभी तो छोटे-छोटे बच्चे कहानी सुनते सुनते ही कहानी खत्म होने से पहले ही सपनों में खो कर सो जाते थे ।बस यही सिलसिला हर रोज चलता रहता था।

धीरे धीरे समय बदला, चीजें बदली। अब दादी नानी की कहानियाँ जल्दी कहाँ सुनने को मिलती है। तो मैं आपलोगों के लिए 12 बेहतरीन परियों की कहानियाँ लेकर आया हूँ। जिसे पढ़कर आप उन्हीं बचपन की यदों में खो जाएंगे।

नन्ही परी और राजकुमारी की कहानी (fairy tales in hindi story)

किसी जमाने में विक्रमगढ़ नाम का एक राज्य हुआ करता था। उस राज्य के राजा की दो रानियां थीं। बड़ी रानी का रूप सामान्य था, लेकिन छोटी रानी काफी सुंदर थी। इस वजह से राजा छोटी रानी को अधिक प्रेम करता था और वह छोटी रानी की हर बात भी माना करता था। एक दिन छोटी रानी ने राजा से बड़ी रानी की शिकायत कर दी। राजा बड़ी रानी से नाराज हो गए, जिससे दुखी होकर बड़ी रानी महल छोड़कर जंगल की तरफ जाने लगी।

रास्ते में एक नदी पड़ी, जिसके किनारे पर एक अनार का पेड़ था। बड़ी रानी उसी पेड़ के नीचे बैठ गई और रोने लगी। उसकी रोने की आवाज सुनकर वहां पर एक नन्ही परी आई।

उस नन्ही परी ने रानी से उसके रोने की वजह पूछी। रानी ने रोते हुए उसे अपनी सारी बात बता दी।

बड़ी रानी की बात सुनकर नन्ही परी ने कहा, ‘इस नदी में तीन डुबकी लगा कर स्नान करो। फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ लो। ऐसा करने से तुम भी रूपवान हो जाओगी, लेकिन मैंने जितना बताया है सिर्फ उतना ही करना। न इससे ज्यादा करना और न ही कम करना।’

ऐसा कह कर नन्ही परी वहां से गायब से हो गई।

इसके बाद बड़ी रानी ने परी की बात मानते हुए वैसा ही किया। रानी ने जैसे ही नदी में पहली डुबकी लगाई, तो उसके शरीर का रंग साफ हो गया।

दूसरी डुबकी लगाने पर रानी का शरीर सुंदर कपड़े और जेवर से सज गया।

तीसरी डुबकी लगाते ही, रानी के बाल लंबे, घने और सुंदर हो गए।

अब बड़ी रानी बहुत ही सुंदर हो गई थी।

इसके बाद जैसा नन्ही परी ने कहा था, नदी में तीन डुबकी लगाने के बाद रानी ने अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ लिया। तोड़ते ही वह अनार फूट गया और अनार के सारे बीज सैनिक बन गए।

उन सैनिकों ने रानी के लिए एक पालकी तैयार की, जिसमें बड़ी रानी को बैठाकर वो वापस राज्य में लेकर आ गए।

राजमहल पहुंच कर जब बड़ी रानी राजा से मिली, तो उसने नन्ही परी वाली सारी घटना राजा को बता दी। अब राजा को अपनी हरकत पर पछतावा होने लगा और उन्होंने इस बार छोटी रानी को महल से बाहर निकाल दिया।

जब बड़ी रानी राजा को नन्ही परी की घटना बता रही थी, तो छोटी रानी छुपकर ये सारी बातें सुन रही थी। इसी वजह से महल से बाहर निकलने पर वह सीधे नदी के किनारे गई और उसी अनार के पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगी।

छोटी रानी के रोने की आवाज सुनकर नन्ही परी वहां प्रकट हो गई और उसने रानी से उसके रोने की वजह पूछी।

छोटी रानी ने झूठ बोलते हुए नन्ही परी को बताया कि बड़ी रानी के कहने पर राजा ने उसे महल से बाहर निकाल दिया है।

यह सुनकर नन्ही परी ने छोटी रानी से भी कहा कि पहले इस नदी में तीन बार डुबकी लगाओ। फिर इसी अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ लो, लेकिन न इससे ज्यादा करना और न इससे कम करना।

ऐसा कह कर नन्ही परी वहां से फिर गायब हो गई।

नन्ही परी की बात सुनकर छोटी रानी बहुत खुश हुई। वह नदी में गई और जैसी ही पहली जुबकी लगाई, उसका शरीर पहले से भी ज्यादा निखर गया।

दूसरी डुबकी लगाते ही, उसका शरीर भी सुंदर कपड़े और जेवर से सज गया।

तीसरी डुबकी लगाने पर छोटी रोनी के बाल और काले, घने, लंबे और सुंदर हो गए।

अब छोटी रानी पहले से भी ज्यादा सुंदर दिखने लगी थी, लेकिन छोटी रानी ने सोचा कि अगर वह तीन डुबकी लगाने से इतनी सुंदर हो सकती है, तो और डुबकियां लगाने पर वह और अधिक सुंदर हो जाएगी।

उसने ऐसा सोचकर कई सारी डुबकियां लगा ली। ऐसा करने पर छोटी रानी के शरीर के सारे कपड़े फटे और पुराने हो गए। उसके सारे गहने गायब हो गए। उसके शरीर का रंग भी गहरा हो गया। शरीर पर दाग और दाने निकल गए। छोटी रानी अब पहले की तरह सुंदर नहीं लग रही थी।

रोते हुए वह नदी से बाहर आई और अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा। अनार तोड़ते ही वह फूट गया। उससे एक सांप निकला और वह रानी को खा गया।

कहानी से सीख: नन्ही परी और छोटी रानी की कहानी हमें सीख देती है कि दूसरे लोगों के लिए कभी बुरा नहीं सोचना चाहिए।

परियों की अनोखी दुनिया (story of fairy tales in hindi)

परियों की अनोखी दुनिया (story of fairy tales in hindi)

एक गांव मे रेनू नाम की लड़की अपने पिता और सौतेली माँ के साथ रहती थी। उसकी एक सौतेली बहन भी थी। रेनू की माँ अपनी बेटी टी को तो बहुत प्यार से रखती थी पर उसको वह पुरे दिन घर के काम मे लगाए रखती।

और उसे खाने को भी ठीक से नहीं देती थी। एक दिन रेनू की माँ खाना बनाने के लिए लकड़ियाँ काट रही थी। तभी उसको बहुत प्यास लगती है। वो अपनी बेटी को आवाज लगाती है।

पर उसकी बेटी गहरी नींद मे सो रही होती है।

तब रेनू पानी लेकर आ जाती है।और बोलती है वो सोई हुई है इसीलिए मैं पानी लेकर आ गयी। उसकी माँ पानी को यह कहते हुए फेंक देती है कि तेरे हाथों से छुआ हुआ पानी मैं नहीं पी सकती।

अपनी माँ को तो खा गयी। अब मुझे कुछ मिलाकर पिला देगी और वहाँ से चली जाती है। रेनू बहुत उदास हो जाती है।

उसकी माँ अंदर जाकर जब देखती है। घर मे पानी बिलकुल नहीं है। तो रेनू को चिल्लाकर बुलाती है। और उससे कहती है पानी क्या मैं भरकर लाऊंगी?

रेनू बोलती है नहीं माँ मैं बस लेने जा ही रही थी। और बाल्टी लेकर कुँए पर पानी लेने पहुँच जाती है।

पर पानी भरते मे रस्सी टूट जाती है और बाल्टी कुँए मे गिर जाती है। तब रेनू परेशान होकर घर वापस आ जाती है। जब माँ पूछती है तो वह सब बात बता देती है।

तब उसकी माँ उसको बहुत सुनाती है और कहती है जब तक बाल्टी वापस नहीं लेकर आ जाती। तब तक घर वापस मत आना। आयी तो मैं तेरे हाथ पैर तोड़ दूँगी।

रेनू वापस कुँए पर आ जाती है और बिना सोचे समझे कुँए मे कूद जाती है।

जब उसको होश आता है तब वो एक अलग ही दुनिया मे होती है। जो बहुत सुन्दर होती है। रेनू को यह सब देखकर बहुत अच्छा लगता है। जब वो घूमते हुए थक जाती है तो पेड़ के नीचे बैठ जाती है।

उसको भूख भी लगी होती है। उसको सामने एक हवेली दिखाई देती है। वो उसमें जाकर देखती है तो उसे वहाँ एक परी मिलती है। परी उससे पूछती है। तुम यहाँ क्या लेने आयी हो ,क्योंकि हर कोई यहाँ कुछ न कुछ लेने ही आता है।

तब रेनू बाल्टी लेने वाली बात परी को बताती है। रेनू की बात सुनकर परी सब समझ जाती है। और उससे बोलती है। बेटी तुम मेरे साथ चलो। और उसको एक कमरे मे ले जाती है।

उस कमरे मे कई प्रकार के पकवान रखे होते है। परी रेनू को कहती है पहले तुम कुछ खा लो। तुम्हें भूख लगी होगी। रेनू अच्छी तरह से पेट भरकर खाना खा लेती है।

तब परी उसको उस जगह ले जाती है। जहाँ बाल्टियाँ रखी होती है। उनमे से वह रेनू को अपनी बाल्टी ढ़ूढ़ने को कहती है। रेनू देखती है ,वहाँ पर तो सोने ,चाँदी की बाल्टियां रखी होती है।

तभी उसकी नजर अपनी टूटी हुई लोहे की बाल्टी पर पड़ती है। वो अपनी बाल्टी को उठा लेती है।

परी यह देखकर रेनू को बोलती है ,बेटी तुम बहुत सच्चे दिल वाली हो। इतना सब देखकर भी तुमको कोई लालच नहीं आया। और तुमने अपनी टूटी बाल्टी ही उठायी।

इससे मैं बहुत खुश हूँ। और तुमको उपहार देना चाहती हूँ ,तभी परी अपनी छड़ी घुमाती है और रेनू के हाथ मे लोहे की बाल्टी को सोने की बना देती है और उसको सोने ,चांदी से पूरा भर देती है।

यह देखकर रेनू ‘परी ‘को धन्यवाद करते हुए अपने घर को चल देती है।

जुड़वाँ परी बहनें (stories of fairy tales in hindi)

जुड़वाँ परी बहनें (stories of fairy tales in hindi)

परीलोक मे संगीता नाम की परी के 2 जुड़वाँ परी बेटियाँ हुई, उसने उनके नाम नीता और मीता रखे।

नीता और मीता जब बड़ी हुई तो नीता सीधी और मीता बहुत तेज थी। मीता सभी लोगों को परेशान करती रहती थी और नीता सभी का बहुत ख्याल रखती थी।

एक दिन परीलोक मे जादूगर वहाँ से गुजर रहा था। तभी मीता उसे टकला कहकर चिढ़ाने लगी। तब जादूगर संगीता के पास उसकी शिकायत करने जाता है।

तब मीता कहती है यह मैं नहीं थी। वो तो नीता होगी। माँ आपको तो पता है मैं पूरा दिन यही पर थी। ऐसा कहकर मीता बच जाती है। मीता कुछ न कुछ काम बिगाड़ती और उसका इल्जाम नीता पर डाल देती है।

परीलोक की रानी का बेटा जिगर नीता को प्यार करता था। नीता भी उसको पसंद करती थी। जिगर नीता को एक दिन घूमाने के लिए बाहर चलने को कहता है। तब नीता दूसरे दिन उसको चलने की हां कर देती है।

उन दोनों की बातें मीता सुन रही होती है। उसे यह पसंद न था कि जिगर नीता को पसंद करता था। दूसरे दिन संगीता किसी काम से घर से बाहर जाती है। और नीता जिगर के साथ घूमने के लिए अपने कमरे मे तैयार हो रही होती है।

तभी मीता बाहर से कमरे को बंद कर जाती है। और नीता की जगह जिगर के साथ चली जाती है। वो सोचती है ,आज माँ तो देर से आएगी। तो नीता के बारे मे किसी को कुछ पता नहीं चलेगा।

पर संगीता जल्दी वापस आ जाती है। वो घर बंद देखकर चौक जाती है। जब वो कमरा खोलती है तो अंदर नीता बेहोश पड़ी होती है। वो उसको उठाती है और उससे पूछती है।

तब नीता बताती है मुझे मीता बंद करके चली गयी थी। धुप न मिलने की वजह से मेरी शक्तियाँ कमजोर हो गयी थी जिस वजह से मे बेहोश हो गयी। तभी मीता घूमकर वापस आती है।

तो माँ को देखकर वो डर जाती है। संगीता जब मीता को बोलती है। तुम अपनी शैतानियों से कब बाज आओगी?

तुम्हारी वजह से आज नीता बेहोश हो गयी। उसे कुछ हो जाता तो तुम क्या करती। बचपन मे तो तुम ऐसी नहीं थी। अब ऐसी कैसे हो गयी हो। तब मीता को अपनी गलती का एहसास होता है। और वो नीता से माफी मांगती है।

नीता उसको माफ़ करके गले से लगा लेती है। फिर दोनों बहने आपस मे प्यार से रहने लग जाती हैं। मीता अब सबको परेशान करना छोड़ देती है।

अभिमान नहीं करना चाहिए (Pariyon ki Kahani in Hindi )

महारानी के लाड-प्यार ने शीतल परी को और बिगड़ैल बना दिया था। यदि महारानी परी शुरू से ही अपने बच्चें को प्रेम के साथ-साथ कठिन अनुशासन का पाठ पढ़ाया होता तो आज यह दिन नहीं आता शायद सही कहा गया है की माता- पिता को कुम्हार की भाँति बच्चों को बाहर से सहलाना चाहिए और अंदर से कठोर बन उनको अच्छा शेप (उनका सर्वांगीण विकास करने का प्रयास करना चाहिए क्लास में नंबर ज्यादा लाना ही मात्र आयश्यक या महत्वपूर्ण नहीं हैं। एक्स्ट्रा करिकुलम भी आवश्यक हैं। ) देना चाहिए।  Pariyon Ki Kahani.

शीतल परी को अपने जादू का, साथ ही अपने राजकुमारी होने का भी घमंड हो गया था। अपने जादुई शक्ति साथ ही अपने पद का दुरूपयोग कर वो अक्सर अन्य परियों को परेशान करती रहती थी। महारानी की पुत्री होने की वजह से उससे कोई उलझता भी नहीं था।

एक दिन तो उसने अति कर दिया महल को छोड़कर वह निचे के गांव में चली आई और रूप बदलकर छोटे-छोटे बच्चों के साथ खेलने लगी खेल-खेल में उसने अपने जादू से सभी बच्चों को खेलने का खिलौना बनाकर अपने साथ महल में लेकर चली आई, और कठपुतली की तरह उनके साथ खेलने लगी।

शरारती परी उन्हें कभी पटक देती तो कभी उनकी टाँग खींच देती थी। जिससे उन बच्चों को बहुत दर्द होता था लेकिन जादू की वजह से उनकी आवाज भी नहीं निकल रही थी।

इधर निचे गांव में कई बच्चों के गायब होने की वजह से पुरे गांव में रोने बिलखने की आवाजें आने लगी सभी अपने-अपने बच्चों को खोजने लगे। कोई जंगलो में खोजता, कोई झरने के आस-पास खोजता हैं तो पहाड़ों के गुफाओं में खोजने लगा। पूरा गांव बच्चों के लेकर बहुत चिंतित हो गया। Pariyon ki kahani.

अंत में सब खोजते-खोजते थक गए और गांव के सबसे सिद्ध बाबा के पास रोते -रोते पहुँचे। बाबा उनके आने से पहले ही गांव पर आन-पड़ी समस्या के लिए ध्यान-मग्न थे।

गुलाबी परी की कहानी (story of fairy tales in hindi)

गुलाबी परी की कहानी (story of fairy tales in hindi)

ख़ुशी को रात को सोने से पहले कहानी सुनने का बहुत शौक है। वह कक्षा चार में पढ़ती है।

वह अपनी माँ से कहती है- “माँ” आज रात मुझे कहानी सुनाओगी न!”

माँ कहती है- “हाँ बेटा! अभी कुछ देर रुको। मैं रसोई का काम ख़त्म करके जल्दी ही आती हूँ।”

अब ख़ुशी ने- जल्दी से नाईट सूट पहना और अपने पलंग पर आकर लेट गई।

थोड़ी देर में माँ का काम ख़त्म हुआ तो वो भी उसके पास आ कर लेट गईं|

माँ बोलीं- “हाँ! अब बताओ कौन सी कहानी सुनाऊँ आज?”

ख़ुशी बोली-“माँ, आज वो परियों वाली कहानी सुनाओ न,” ख़ुशी को परियों की कहानी सुनना बहुत पसंद है। वह हर तीसरे दिन कोई न कोई परियों वाली ही कहानी सुनना चाहती है।

माँ बोलीं-“अच्छा चलो, आज मैं तुम्हें गुलाबी परी की कहानी सुनाती हूँ,” माँ ने कहानी शुरू की –

“बहुत समय पहले की बात है, परीलोक में बहुत सारी परियाँ रहती थीं। उनमें से गुलाबी परी सबसे प्यारी थी। वह रानी परी की सबसे चहेती परी भी थी। गुलाबी परी यदि कोई इच्छा करती तो वह उसे ज़रूर पूरा करती।

एक दिन खेलते–खेलते गुलाबी परी के मन में आया कि क्यों न पृथ्वीलोक पर सैर के लिए जाया जाए। उसने पृथ्वीलोक और वहां के लोगों के बारे में बहुत सुना हुआ था। वे लोग कैसे रहते हैं, वह जानना चाहती थी। उसने अपनी यह इच्छा रानी परी के सामने रखी। पहले तो रानी परी ने ना-नुकुर किया फिर मान गई। आखिर वह गुलाबी परी की इच्छा को कैसे टाल सकती थी।

रानी परी ने कहा, “पर मेरी एक शर्त है। पृथ्वीलोक पर तुम सिर्फ रात में ही जा सकती हो। और सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही तुम्हें वापस आना होगा। सूरज की किरणें तुम्हारे ऊपर नहीं पड़नी चाहिए। नहीं तो तुम्हारे पंख पिघल जाएंगे और तुम वापस नहीं आ पाओगी। तुम्हें हमेशा के लिए मनुष्यों के साथ रहना पड़ेगा।”

गुलाबी परी ने जल्दी से कहा- “ठीक है!”वह तो पृथ्वीलोक पर जाने के नाम से ही उत्साहित थी।

रानी परी ने कहा- “लेकिन तुम अकेले नहीं जाओगी। तुम्हारे साथ तुम्हारी तीन और परी बहनें भी तुम्हारी सुरक्षा के लिए जाएंगी। सब्ज़ परी, नील परी और लाल परी,”।

गुलाबी परी और भी खुश हो गई। “ये सब तो मेरी सहेलियाँ हैं! अब तो और भी मज़ा आएगा। हम सब वहाँ जा कर मज़े करेंगे, किसी बाग़ में खेलेंगे और नृत्य करेंगे।” बाक़ी परियाँ भी बहुत खुश हो गईं, आखिर उनको भी पृथ्वीलोक पर जाने का मौका मिल रहा था। वे सब रात का बेसब्री से इंतज़ार करने लगीं।

जैसे ही पृथ्वीलोक पर अँधेरा छाया, चारों परियाँ तैयार हो गईं। रानी परी ने एक बार फिर से अपनी चेतावनी दोहराई, “याद रहे, सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही परीलोक वापस आना होगा।” फिर रानी माँ ने सभी परियों को आँखें बंद करने को कहा।

थोड़ी देर बाद जब चारों परियों ने आँखें खोलीं तो वे सब एक हरे भरे बाग़ में थीं। चारों तरफ सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हुए थे। तितलियाँ फूलों पर मंडरा रहीं थीं। हवा में ठंडक थी। उन परियों को ये हरियाली इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने नाचना शुरू कर दिया। धीमा-धीमा संगीत न जाने कहाँ से आ रहा था।”

कहानी खत्म हुई और ख़ुशी को अपनी माँ कि गोद में ही कहानी सुनते – सुनते नीद आ गई|

फूलों की राजकुमारी थंबलीना की कहानी (Bedtime Story In Hindi)

फूलों की राजकुमारी थंबलीना की कहानी (Thumbelina Bedtime Story In Hindi)

एक समय की बात है,एक औरत अकेली रहती थी 1 दिन में है अपनी दोस्त से मिलने गई उसकी दोस्त परी थी उसने परी से कहा कि वह बहुत अकेली है काश मेरी कोई बच्ची होती। परी ने कहा तुम बहुत अच्छी हो इसलिए मैं तुम्हारी मदद करूंगी परी ने उसे एक भेज दिया और घर जाकर गमले में उगाने के लिए कहा। औरत ने वैसा ही किया घर जाकर वह बीज पौधे में बहुत दिया। 

बीच फोटो उसने से एक पौधा निकला और फिर वह बड़ा होकर उसने एक सुंदर फूल खिला। औरत ने ऐसा फूल पहले कभी नहीं देखा था उसने उस फूल को प्यार से चूमा और वैसे ही उसकी पंखुड़ियां खुल गई और उसके अंदर एक बहुत ही प्यारी सी बच्ची बैठी थी। वह सिर्फ अंगूठे के बराबर की थी इसीलिए औरत ने उसका नाम थंबलीना रखा। 

औरत ने उसके लिए एक छोटा सा बिस्तर बनाया एक रात थंबलीना आराम से सो रही थी तभी अचानक एक मेंढक खिड़की से उसे घूरने लगा और अपने पुत्र का विवाह उससे कराने के इरादे से उसे अपने साथ उठाकर ले गया।मेंढक ने थंबलीना को तलाब में 1 पत्ते के ऊपर खड़ा कर दिया थंबलीना मेंढक से विवाह नहीं करना चाहती थीमैं जोर-जोर से चिल्लाकर सहायता मांगने लगी।

ठंड का मौसम बढ़ता जा रहा था ठंड से कांपती हुई थंबलीना आगे जंगल में बढ़ती जा रही थी तभी उसे एक दरवाजा दिखाई दिया उसने दरवाजा खटखटाया तो चूहे ने अंदर से दरवाजा खोला उसने उस से मदद मांगी चूहे ने उसे खाना खिलाया और वहां रुकने दिया।  थंबलीना वहां बहुत दिन रही परंतु जैसे ही उसे पता चला कि चूहा उसकी शादी अपने दोस्त छछूंदर से कराना चाहता है वह वहां से भाग गई। उसे रास्ते में एक घायल  चिड़िया मिली उसने उसकी खूब सेवा की और उसे ठीक कर दिया।

चिड़िया थम लीना की सहायता करना चाहती थी इसलिए जंगल में फंसी थंबलीना  को वह अपनी पीठ पर बिठाकर इतनी दूर उड़ाकर ले गई जो जगह बहुत सुंदर थी। चिड़िया ने थंबलीना को एक फूल की पत्ती पर लिटा दिया और वह वहां आराम करने लगी और सो गई।तभी एक मधुर आवाज सुनकर वह जाग उठी उसके सामने फूलों का राजा खड़ा था थंबलीना की सुंदरता पर मोहित होकर फूलों के राजा ने थंबलीना को विवाह का प्रस्ताव रखा।

चिड़िया ने थंबलीना को फूलों के राजा की अच्छाइयों के बारे में बताया और कहां राजा बहुत ही नेक दिल और दयावान है  थम लीना ने विवाह का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और फूलों की रानी बन गई फूलों के राजा और फूलों की रानी दोनों खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

सिंड्रेला की कहानी (cinderella pariyon ki kahani)

सिंड्रेला की कहानी (cinderella pariyon ki kahani)-Cinderella Ki Kahani

Cinderella Ki Kahani: बहुत समय पहले की बात है, एक शहर में एक व्यक्ति रहते थे।जब उनकी शादी हुई तो, उनकी पत्नी ने एक प्यारी सी परी जैसी बेटी को जन्म दिया।

जिसका नाम दोनो ने ही बड़े प्यार से सिंड्रेला रखा। सिंड्रेला के जन्म के 1-2 साल बाद ही उसकी मां का देहांत हो गया। अब उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली।

सिंड्रेला की सौतेली मां बहुत ही दुष्ट औरत थी। वह सिंड्रेला को बिल्कुल भी अच्छा नहीं मानती थी। उसकी दो बहनें और हुई।

थोड़े ही दिनों बाद उसके पिता का भी देहांत हो गया। सिंड्रेला के पास अपना कहने के लिए अब कोई भी नहीं था। बचपन से ही उसकी सौतेली मां उससे बहुत काम करवाया करती थी।

उसकी पढ़ाई लिखाई भी पूरी नहीं की गई। उसको घर का नौकर बना दिया।लेकिन सिंड्रेला ने कभी भी कुछ नहीं कहा, सब अपनी किस्मत समझकर स्वीकार कर लिया। अब वह बड़ी हो चुकी थी।

जितनी वह दिल की अच्छी थी, उसका रूप भी बड़े होने के साथ निखरता गया। वह उस नगर की सबसे सुंदर युवती बन गयी।

लेकिन उसकी मां ने इस कारण उसका नगर में घूमना ही बन्द करवा दिया। उसको फटे पुराने वस्त्र पहनने को दिए जाते ताकि वह बदसूरत दिखे , खाना भी उसको बचा कुचा दिया जाता था।

वह अपनी खिड़की से ही लोगों को इधर-उधर आते जाते देखा करती थी।

उसके दुःख अब कुछ ही दिनों के मेहमान थे।

एक दिन उस नगर के राजकुमार का जन्मदिन था। राजा ने घोषणा करवाई कि अपने पुत्र के जन्मदिन के शुभावसर पर वे एक बड़ा सा भोज रखेंगे। जिसमे राजकुमार के लिए लड़की भी देखी जयगी।

राजकुमार को जो भी लड़की पसन्द आएगी वह उससे ही शादी करेगा।

राजा के आदेश से दूत बनकर एक सैनिक सभी घरों में गया और जन्मदिन के भोज का निमंत्रण दे दिया। आखिर में वह सिंड्रेला के घर पहुंचा। उसने दरवाजा खटखटाया।

सिंड्रेला की सौतेली मां ने दरवाजा खोला, तब वह दूत बोला, ” माजी, राजकुमार के जन्मदिन का भोज है, आप सब आइएगा। खास कर युवतियों को आना है।

राजकुमार उन्हीं में से अपनी पत्नी चुनने वाले हैं।

यह सुनकर वह बहुत खुश हुई। सिंड्रेला ने  भी यह बात सुन ली। वह काम कर रही थी। वह अपनी मां के पास आई एयर बोली, ” मां मुझे भी जन्मदिन के भोज में जाना है,” लेकिन यह सुनते ही उसकी सौतेली मां ने उसे बहुत मारा और वहां जाने से साफ मना कर दिया। वह चाहती थी कि उसकी दोनो बेटियों में से ही कोई राजकुमार के साथ विवाह करे।

लेकिन उसकी बेटियां तो सुंदर थी ही नहीं, अतः वह सिंड्रेला को नही देना चाहती थी। उसने सिंड्रेला को बहुत सारा काम दे दिया ताकि उसे जन्मदिन में जाने का मौका ही न मिले।

 जन्मदिन का दिन आ ही गया।

शाम को सभी को जाना था। सिंड्रेला की सौतेली मां ने सिंड्रेला को अपनी दोनो बेटियों के लिए ड्रेस बनाने के लिए दे दी। ताकि उसे अपने लिए कुछ करने का मौका ही न मिले।

सिंड्रेला ने दिनभर दोनो की ड्रेश बनाई। अब शाम होने वाली थी। उसके घर के सभी लोग तैयार होकर पार्टी में चले गए।

सिंड्रेला घर पर बैठे बैठे रो रही थी। वह अपनी मां को याद कर रही थी और सोच रही थी कि काश उसकी भी माँ जिंदा होती तो, आज वह भी सुंदर बन कर उस भोज में जा पाती।

अचानक सिंड्रेला के कमरे में बहुत रोशनी हुई। हर बहुत सी धुंध के बीच एक परी प्रकट हुई। परी बिल्कुल सिंड्रेला की मां की तरह दिख रही थी।

अपनी मां को अपने सामने देख वह उसके गके से लग गयी। और बहुत रोने लगी। परी ने सिंड्रेला को चुप कराया और कहा, ” तुम राजकुमार की जन्मदिन के भोज में जाना चाहती हो न! मैं तुम्हें तैयार करूँगी।”

  सिंड्रेला ने कहा, ” मेरे पास तो अच्छे कपड़े ही नहीं है। मैं क्या पहनकर वहां जाऊँगी वहां तो सब बहुत ही सुंदर बनकर आए होंगे।”

परी ने झट से अपनी जादू की छड़ी घुमाई और सिंड्रेला एक राजकुमारी के रूप में परिवर्तित हो गयी। सुंदर तो वह थी ही, अब वह विश्व की सबसे सुंदर लड़की लग रही थीं।

उसकी सुंदर ड्रेस, जूतियां , सुनहरे बाल उसकव सबसे अलग बना रहे थे।

लेकिन परी ने उसे एक बात समझाई, ” मेरा यह जादू, रात के 12 बजे तक ही रहेगा। तुम उससे पहले ही वापस आ जाना।”सिंड्रेला मांन गयी।

Pari ki Kahani Interesting Part- परी ने पास में पड़े हुए कद्दुओ से एक शाही बोगी का इंतजाम कर दिया। सिंड्रेला उसमे बैठकर राजमहल की ओर चल दी।

वह जलसे में पहुंच चुकी थी। उसने जैसे ही राजमहल में प्रवेश लिया जबकि नजर उस पर ही टिक गई। बाहर से आए हुए मेहमान और राजकुमार भी सिंड्रेला को ही एकटक देखे जा रहे थे।

उसकी सौतेली मां और बहनों ने भी उसे नहीं पहचाना।

राजकुमार ने फैसला कर लिया कि अब तो वह उसी से विवाह करेगा।

वह सिंड्रेला के पास गया और उसकव डांस के लिए अपना हाथ दिया। सिंड्रेला मान गयी। दोनों एक – दूसरे के साथ बहुत देर तक डांस करते रहे। सिंड्रेला को समय का पता ही नहीं चला।

12 बजने में कुछ ही पल शेष थे। अचानक उसकी नजर घड़ी पर गयी। उसने देखा कि मध्यरात्रि तो होने ही वाली है, उसे अब परी की बात याद आ गयी।

उसने राजकुमार का हाथ छोड़ दिया और वहां से भागने लगी। राजकुमार भी उसके पीछे-पीछे भागा। हड़बड़ी में सिंड्रेला की एक जूती वहीं महल में छूट गयी। सिंड्रेला तो जा चुकी थी।

राजकुमार के हाथ उसका केवल एक सैंडल ही रह गया। राजकुमार को बहुत अफसोस हुआ कि वह उसका नाम भी न पूछ सका।

अगले दिन राजकुमार स्वयं जाकर नगर में उस जुती वाली लड़की को खोजने निकला। उसने घर घर जाकर लड़कियों को वह जूती पहनाई लेकिन किसी को भी वह जुती नहीं हुई।

किसी को वह छोटी पड़ जा रही थी औऱ किसी के लिए बड़ी। फिर राजकुमार अंत मे निराश होकर नगर के आखिरी घर, सिंड्रेला के घर पर पहुंचा।

सिंड्रेला की दोनो सौतेली बहनों ने उस जूती को पहनने की कोशिश की लेकिन कोई भिबुस जुती को बहुत कोशिशों के बाद भी अपने पर पर नहीं डाल सका।

तब राजकुमार की नजर पास में खड़ी एक सीधी साधी लड़की पर पड़ी। उसने उसको बुलाया। उससे भी आग्रह कीया की  आप इस जुती को पहने। सिंड्रेला की मां ने भी कुछ नहीं कहा,

उसने सोचा यह इसकी थोड़े ही है, अपने आप कोशिश करती है।

सिंड्रेला जूती के पास गई और जुती पहनी उसको जूती आ गयी। तभी वह भागकर अंदर गयी और दोनों जूतियों को पहन लाई। राजकुमार बहुत खुश हुआ। और उसको अपने साथ महल ले गया।

दोनो की शादी हुई और वे एकसाथ प्रेम से रहने लगे।

शरारती परी को मिला सबक: (hindi pariyon ki kahani)  

हिमालय के बीचों बीच एक पहाड़ के चोटी के पास घने जंगलों के बिच, एक रहस्यमयी परियों की दुनिया थी।  मनुष्यों के लिए वहाँ पहुँचना असंभव था। पहाड़ी के ठीक निचे वनवासी भाइयों का एक गांव था, जिनमे सन्यासी और तपस्वी भी रहते थे।   

उस गांव के तपस्वि लोगो को परियों के दुनिया बारे में पता था। जो सिद्ध महात्मा थे वे समय समय पर परियों के महल में भी जाते थे। परियों की रानी उन महात्माओं को अपने राजदरबार में पुरे मान-सम्मान के साथ उचित स्थान पर बैठाती थी।

परियों के महल के ठीक निचे वाले पहाड़ से एक बहुत ही सुन्दर और शीतल जल का झरना निचे की तरफ बहता

था। इसी झरने के जल का उपयोग करते थे। Pariyon ki kahani .

परियों का महल बहुत ही भव्य और सुन्दर था। उस महल के अंदर एक अलग ही दुनिया बस्ती थी। उस महल के अंदर सभी सुख- सुविधा उपस्थित था। महल के अंदर बड़े-बड़े हिमालय को चुनौती देती पहाड़ियाँ थी। साथ ही सप्तसमुद्र के बराबर कई समुद्र मौजूद थे। हर तरफ उड़ते बाग़-बगीचे थे। साथ ही इस महल में बड़े परी से लेकर छोटी परी भी रहती थी।

परियों के रानी की एक बेटी थी जिसका नाम शीतल था, लेकिन अपने नाम के विपरीत वह बहुत शरारती थी। शीतलता वाला कोई गुण उसके अंदर नहीं था। वह हमेशा अपने शरारत से महल में कोई न कोई मुसीबत उत्पन्न करती ही रहती थी।

एक बार उसने अपनी शरारत से महल के अंदर की दुनिया में अपने विशेष शक्तियों का उपयोग करके सभी परियों को तितली बना दिया था और दिनभर उनके पीछे-पीछे दौड़ते रही और उनको परेशान करती रही। महारानी के डाँटने पर उसने अपना जादू वापस लिया और सभी तितलियों को वापस परी बना दिया।

परी के वरदान की कहानी | Angel Boon Story In Hindi

परी के वरदान की कहानी | Angel Boon Story In Hindi

एक गांव में नंदू नाम का लड़का रहता था, जो अपने माता-पिता की दिल से सेवा करता और उनकी हर बात मानता था। नंदू मन लगाकर पढ़ाई करता था और हमेशा सबकी मदद को तैयार रहता था। गांव के सभी लोग उसे बहुत प्यार करते थे।

नंदू के पिता दिन भर फेरी लगाकर सब्जी बेचा करते थे और उसकी मां घर संभालती थी। उसकी एक छोटी बहन थी, जिससे वह बहुत प्यार करता था। पिता की कमाई से घर और पढ़ाई का खर्चा निकल जाता था।

स्कूल जाने से पहले नंदू सुबह सारी सब्जियां धोकर ठेली पर सजा देता था, जिससे उसके पिता को मदद मिल जाती थी। एक दिन उसके पिता बारिश में भीग गए और बीमार पड़ गए। फिर एक दिन अचानक उनकी मृत्यु हो गई।

इस हादसे से पूरा परिवार हिल गया। घर में सभी पैसे-पैसे के लिए मोहताज हो गए। नंदू के मां की तबीयत भी खराब रहने लगी। नंदू समझ नहीं पा रहा था कि कैसे वह परिवार की मदद करे। नंदू ठेली लगाना तो चाहता था, लेकिन अभी वह सिर्फ 8 साल का था। इतनी कम उम्र में वह इस काम को नहीं संभाल सकता था।

नंदू ने अपनी मां से रामायण, महाभारत के साथ-साथ दैवीय चमत्कार की कहानियां सुनी थीं। उसके मन में विचार आया कि भगवान तो सभी की मदद करते हैं, उसकी भी जरूर करेंगे। ये सोचकर एक दिन तड़के ही वह मंदिर पहुंच गया।

उसने वहां जाकर हाथ जोड़ा और बोला- भगवान मैं छोटा बालक हूं। पूजा करना नहीं आता, लेकिन तुमसे विनती करता हूं की रास्ता दिखाओ। इस तरह नंदू स्कूल जाने के क्रम में नियम से रोज मंदिर जाता और भगवान से विनती करता। इस तरह करते-करते उसे कई महीने गुजर गए। इस दौरान न तो भगवान ने दर्शन दिए और न ही परेशानी दूर हुई। कभी-कभी नंदू निराश हो जाता कि उसे पूजा करना नहीं आता, इसलिए भगवान दर्शन नहीं दे रहे। वरना वह तो सबकी मदद करते हैं। फिर भी उसने मंदिर जाना और पूजा करना नहीं छोड़ा।

आखिरकार एक दिन देवी मां को उस नन्हे भक्त पर दया आ गई। एक दिन जब नंदू बिस्तर पर गहरी नींद में सोया था, उसे लगा आकाश से एक तेज रोशनी आ रही है और पूरा कमरा रोशनी से भर गया। कुछ देर बाद उस रोशनी से हाथ में छड़ी लिए नन्ही परी निकली, जो बिल्कुल वैसी ही थी, जैसा उसने किताबों में पढ़ा था।

नंदू को यकीन नहीं हो रहा था। वह भौचक्का से बस उसे देखे ही जा रहा था। तभी परी ने मुस्कुराते हुए कहा- नंदू मैं सच में तुम्हारे सामने खड़ी हूं। नंदू ने तुरंत कहा- तो क्या तुम परी हो?

परी ने मुस्कुराते हुए कहा – हां।

तुम यहां कैसे? घड़बड़ाहट में नंदू की आवाज नहीं निकल रही थी।

परी ने फिर हंसते हुए कहा- नंदू! मुझे देवी मां से भेजा है।

देवी मां…नंदू आवेग में चिल्ला उठा।

हां नंदू, बोलो तुम्हें क्या चाहिए ?

नंदू खुशी से चिल्लाते हुए बोला- अगर तुम्हें सचमुच देवी मां ने भेजा है तो मेरी मां को ठीक कर दो।

परी बोली- ठीक है नंदू। कल तक तुम्हारी मां ठीक हो जाएगी, लेकिन मैं तो तुम्हें वरदान देने आई थी, तुमने अपने लिए कुछ मांगा ही नहीं।

नंदू बोला- मेरी मां ठीक होगी तो पूरे परिवार की देखभाल कर लेगी। बच्चों पर पहला अधिकार मां का होता है। इसलिए मैंने मां के लिए मांगा।

परी खुश होकर बोली- नंदू तुम बहुत अच्छे हो। तुम मुझसे एक और वरदान मांग सकते हो।

इसपर नंदू बोला- परी मुझे ऐसा वरदान दो कि मैं बड़ा होकर अच्छे रास्ते पर चल सकूं। परी ने खुश होते हुए नंदू को एक अंगूठी दी और बोली, इसे पहनकर जो मांगोगे वो मुराद पूरी होगी, लेकिन जिस दिन गलत काम के लिए इस अंगूठी का इस्तेमाल करोगे तो इसकी शक्ति खत्म हो जाएगी। एक बात और इस अंगूठी का जिक्र किसी से न करना, वरना गायब हो जाएगी। ऐसा कहकर परी वहां से चली गई।

सुबह उठकर जब नंदू ने देखा तो अंगूठी उसकी उंगली में मौजूद थी। उसने देखा की मां पूरी तरह से ठीक हो चुकी है और घर के काम कर रही है। वह अपनी मां को सारी बात बताना चाहता था, लेकिन फिर परी की बात याद आ गई और वह चुप हो गया। मेहनत के बल पर अब उसका परिवार सुख से रहने लगा।

कहानी से सीख : इंसान को लालच कभी नहीं करना चाहिए। कर्म पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता।

राजकुमार और जलपरी (pariyon ki kahaniya in hindi)

राजकुमार और जलपरी (pariyon ki kahaniya in hindi)

 एक राज्य था किशनपुर वहां एक बहुत ही प्रतापी राजा का राज्य था। वे बहुत ही अच्छे और दयालु राजा थे। उनका एक पुत्र था।

जो कि किशनपुर राज्य का राजकुमार था। वह बहुत ही होशियार और बुध्दिमान था। उसे शिकार खेलने का बहुत शौक था।

  एक दिन वह शिकार खेलने के लिए घने जंगल की ओर जा रहा था। तब उसके पिता ने उसे कहा, ” राजकुमार आपको अभी उस जंगल के बारे में अधिक जानकारी नहीं है।

यदि आपको किसी कारणवश वहीं रुकना पड़े तो किसी के माध्यम से हमे सूचित कर दीजिएगा। नहीं तो हमे आपकी चिंता लगी रहेगी।”

  राजकुमार ने अपने पिता की बात मान ली और चल दिये जंगल की ओर।

   दिन में ही उन्हें एक अच्छा सा शिकार हिरन के रूप में दिख गया। राजकुमार ने हिरन का शिकार कर लिया। और सैनिकों को सौंप दिया। लेकिन आगे चलकर, राजकुमार का घोड़ा अचानक दौड़ पड़ा जिस कारण,

राजकुमार अपने सैनिकों के झुंड से अलग हो गए तथा अपना रास्ता भटक गए। रात हो चली और राजकुमार जंगल मे ही भटकते रहे।

तभी उन्हें जंगल से एक मधुर आवाज आई। मध्यरात्रि का समय था। राजकुमार आवाज की दिशा में आगे बढे तो वह एक तालाब के पास जा पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक सुंदर सी लड़की मछलियों से बातें कर रही है।

राजकुमार उस लड़की के पास गए और उसको अपने बारे में बताया फिर उससे, उसके बारे में पूछा।

  लड़की बोली, ” मैं जलपरी हूँ। पहले मैं भी इन मछलियों की तरह ही एक मछली थी। एक दिन जब मैं पानी मे तैर रही थी तो मेरे सामने एक परी प्रकट हुई जो कि मुझे देखकर बहुत प्रभावित हुई। और खुश होकर मुझे यह रूप दिया।”

   राजकुमार ने फिर अपना हाल बताया कि वह कैसे इस जंगल मे फंस गया। राजकुमार को भूख भी लगी थी। जलपरी ने बिन बोले ही उसके सामने अपने जादू से खाने के कई व्यंजन रख दिये। राजकुमार ने उन्हें खाया और उसका पेट भर गया।

फिर उन्होंने खूब सारी बातें की। सुबह होने ही वाली थी। जलपरी ने कहा, ” अब मुझे जाना होगा। तुम्हारे सैनिक भी तुम्हें ढूंढते हुए इधर आ रहे हैं। तुम यही उनका इंतजार करो।” इतना कहकर जलपरी चली गयी।

कुछ ही देर में वहां सैनिक भी आ पहुंचे। फिर राजकुमार अपने सैनिकों के साथ वापस महल चले गए।उन्होंने मन ही मन परी का धन्यवाद भी दिया।

भाई बहन और परी (नन्ही परी की कहानी)

एक समय की बात है एक गांव में दो भाई बहन मोनू और चिंकी रहते थे। वह अपने चाचा चाची के साथ ही रहते थे क्यूंकि कुछ साल पहले उनके माता-पिता का देहांत हो चूका था।

उनकी चाची उन दोनों बच्चो से चिढ़ती थी और वो उनसे घर का सारा काम करवाती थी और उनको पर्याप्त खाना भी नहीं देती थी।

मगर चाचा उन दोनों बच्चो से खूब प्यार करता था। चाची को ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं था और इस कारण अकसर दोनों में लड़ाई भी होती रहती थी। मगर चाचा अपनी पत्नी की ज़िद के आगे बेबस था।

चाची उन दोनों बच्चो को दूर जंगल में जाकर छोड़ना चाहती थी ताकि उनसे छुटकारा मिल सके। इसलिए उसने अपने पति को सारी बात बताई तो चाचा बहुत नाराज हुआ। 

चाची ने उन दोनों बच्चों को जंगल में छोड़ने का प्लान बनाया इसके लिए उसने अपने पति से बात की तो वह बहुत नाराज हुआ उसने उसे ऐसा करने से रोकने की बहुत कोशिश की मगर उसकी पत्नी ने उसकी एक न सुनी। उन दोनों की बातों को चिंकी ने चुपके से सुन लिया था।

अगले दिन चाचा चाची दोनों बच्चों को साथ लेकर जंगल में घूमने के बहाने ले गए और रास्ते में खूब मीठी-मीठी बातें की।

चिंकी अपनी चाची की इस चालाकी को पहले ही भांप चुकी थी इसलिए वह अपने साथ कांच की कुछ गोलियां साथ लेकर आयी थी जिन्हें वह रास्ते में बिखेरती जा रही थी।

जंगल में काफी दूर जाने के बाद दोनों बच्चे थक्कर सो गए और चाचा चाची उन्हें उसी हाल में छोड़ कर जंगल में छोड़ कर वापस घर आ गए।

शाम हो जाने पर जब दोनों बच्चे नींद से जागे तो उन्होंने अपने आप को अकेला पाया तो वह समझ गए कि क्या हुआ है।

चिंकी ने अपने भाई से कहा कि तुम चिंता ना करो हम घर जरूर पहुंचेंगे, आओ मेरे पीछे पीछे चलो। और वह दोनों अपनी बिछाए हुई कांच की गोलियों को देखते हुए घर की ओर लौट आए।

दोनों को घर पर देखकर चाची आग बबूला हो गई मगर वह चालाकी से उनसे कहने लगी अरे बच्चों तुम जंगल में कहां रह गए थे मैंने तुम्हें बहुत तलाश किया और यहां मैं कितनी परेशान हो रही थी चलो अच्छा हुआ तुम सही सलामत घर लौट आए हो।

चाची अब अपने मन में पहले की अपेक्षा और ज्यादा गुस्से में भरी हुई थी इसलिए अब उन दोनों बच्चों से पहले से ज्यादा काम कराने लगी और दुख भी देने लगी।

इस बार चाची ने उन दोनों को घर से बहुत दूर जंगल में छोड़ने का प्लान बनाया और अगले दिन फिर अपने पति के साथ मिलकर दोनों को जंगल में घुमाने के बहाने लेकर जाने लगे तो चिंकी को पहले की तरह चाची की चालाकी फिर समझ में आ गयी।

वो जानती थी कि चाची इस बार कुछ बड़ी साजिश करना चाहती है लेकिन इस बार चिंकी के पास पहले की तरह कांच की गोलियां नहीं थी और उसकी जगह उसने कुछ चने अपने पास रख लिए और रास्ते में उन्हें बिखेरती जाती।

घने जंगल में पहुंचने के बाद चाची मीठी मीठी बातें करने लगी और उसकी वह मीठी मीठी बातें सुनकर दोनों बच्चों को जल्दी ही नींद आ गई और गहरी नींद में सो गए, सोने के बाद चाची चाचा चाची दोनों बच्चों को वहीं छोड़कर घर आ गए।

शाम को जब दोनों बच्चों की नींद खुली तो उन्होंने घर जाने के लिए फिर वही तरीका आजमाया लेकिन इस बार उन्होंने रास्ते में चने बिखेरे थे उन्हें तो जंगल के पक्षियों ने चुन लिया था अब रास्ता मिले तो कैसे।

इसलिए वह रास्ते की तलाश में इधर उधर भटकने लगे और चलते चलते वह एक खंडहर में पहुंच गए और वहां जाकर एक कोने में छुप गए उन्हें काफी डर लग रहा था।

थोड़ी देर बाद वहां पर एक भयानक से चेहरे वाली एक बुढ़िया नजर आयी जो उसी घर की ओर आ रही थी।

और जैसे ही वह अंदर पहुंची तो दोनों बच्चे उस बुढ़िया को देखकर डर गए क्यूंकि वह बुढ़िया दिखने में एकदम डरावनी लग रही थी जिसके बड़े बड़े नाखून, बड़ी बड़ी आंखें और बड़े-बड़े बिखरे हुए बाल थे।

उसने बच्चों से कहा तुम यहां क्या कर रहे हो मेरी इजाजत के बिना यहां तुम यहाँ क्या कर रहे हो। अब तुम मेरी कैद में हो इसलिए अगर जान प्यारी है तो जैसा मैं कहती हूं वैसा ही करना होगा नहीं तो मैं तुम दोनों को मार डालूंगी। 

दोनों बच्चे उसकी इस बात से बहुत डर गए और जैसा वह कहती वैसा ही करने लगे। बुढ़िया ने मोनू को एक पिंजरे में कैद कर दिया और लड़की से बहुत काम कराने लगी।

एक दिन बुढ़िया ने चिंकी को जंगल में लकड़ियां लेने भेजा। जब चिंकी जंगल में गई तो तो थककर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गयी और रोने लगी।

उस पेड़ पर एक परी रहती थी जो उसके मन की बात को समझ गई थी उसने चिंकी को कहा कि “तुम चिंता मत करो, मैं जानती हूं तुम्हारी क्या परेशानी है, लो अब मैं तुम्हें तुम्हारे भाई को उस बुढ़िया की कैद से आजाद कराने का उपाय बताती हूँ ताकि तुम सही सलामत अपने घर लौट सको।

उसके बाद उस परी ने चिंकी को उपाय बताया कि जब वह बुढ़िया सुबह नहाने लगे तब उस पर तुम गरम पानी उड़ेल देना वह बुढ़िया मर जाएगी।

उसके बाद उस बुढ़िया की चारपाई में तकिए के नीचे पिंजरे की चाबी है जिससे तुम अपने भाई को आज़ाद करा लेना। इसके बाद उस पिंजरे के नीचे रखा मुहरों से भरा संदूक लेकर तुम दोनों पास की नदी किनारे चले जाना।

वहां तुम्हे एक हंस दिखाई देगा और वो तुम्हे देखकर अपने पंख फैलाएगा और तुम दोनों उस पर बैठ जाना। हंस तुम दोनों को अपने घर पहुंचा देगा।

यह सुनकर चिंकी बहुत खुश हुई क्यूंकि उसने बचपन में अपनी माँ से कई सारी Pariyo Ki Kahaniya सुन रखी थी कि परिया बहुत दयालु और चमत्कारी होती है। इसलिए अब उसमे हिम्मत भी आ गयी थी।

अगले जब बुढ़िया नहाने बैठी तो चिंकी ने पहले से ही रखा गरम पानी बुढ़िया पर उड़ेल दिया और बुढ़िया तुरंत ही मर गयी।

इसके बाद उसने तकिये के नीचे से चाबी निकालकर पिंजरे का ताला खोला और अपने भाई को आजाद करा लिया।

अब दोनों भाई बहन बहुत खुश थे। उन्होंने पिंजरे को हटाकर मुहरों से भरा बक्सा निकाला और उसे लेकर दोनों नदी किनारे जा पहुंचे।

वहां पर वास्तव में एक हंस पानी में तैरता दिखा और जब वह उसके पास गए तो हंस ने अपने पंख फैला लिए। इसके बाद दोनों हंस की पीठ पर बैठ गए और हंस ने उन्हें उनके घर पहुंचा दिया।

वहां पर दोनों बच्चो को देखकर चाचा को बहुत ख़ुशी हुई और दोनों को गले लगाकर वो खूब रोये। उन्होंने दोनों से क्षमा मांगी और कहा कि तुम्हारे जाने के बाद मैंने तुम्हारी चाची को घर से बाहर निकाल दिया है।

यह सुनकर दोनों बच्चों को बहुत दुःख हुआ और उन्होंने मुहरों का संदूक अपने चाचा को देकर बोला कि उन्हें चाची के बिना ये घर सूना सूना सा लग रहा है और फिर वो दोनों घर के घर के बाहर चबूतरे पर बैठी अपनी चाची को हाथ पकड़कर घर ले आए।

ये देखकर चाची खूब रोई और दोनों बच्चों को गले लगाकर उनसे क्षमा मांगी। इसके बाद अब वो दोनों बच्चो से खूब प्यार करने लगी और उनकी माँ बनकर रहने लगी।

बारह राजकुमारियां {Fairy tale (परी कथा)}

बारह राजकुमारियां {Fairy tale (परी कथा)}

एक नगर था। वहां राजा और रानी रहते थे। ईश्वर की कृपा से उनकी बारह पुत्रियां हुई। और उन सभी को उनके माता पिता ने बहुत ही नाज़ो से पाला और बड़ा किया।

सभी राजकुमारियां अब विवाह के लायक हो गयीं थीं। राजकुमारियों को नृत्य करने का बहुत शौक था।

एक दिन राजा रात को राजकुमारियों के कक्ष में गए। वहां एक भी राजकुमारी नहीं थी। राजा को बड़ी चिंता हुई।

उसने कुछ सैनिकों को राजकुमारियों को खोजने के लिए भेजा लेकिन राजकुमारियां कहीं भी नहीं थी। सब परेशान हो गए। राजा ने सुबह कार्यवाही करने की सोची।

लेकिन सुबह इससे पहले कि राजा कोई कार्यवाही करते राजकुमारियां अपने कमरे में सोई हुई मिली। राजा ने फिर कुछ नहीं किया।

राजा के एक पहरेदार ने राजा को बताया कि, सभी राजकुमारियां रात को किसी खुफिया जगह नृत्य करने जाती है। लेकिन कहाँ यह कोई भी पता नही लगा पा रहा है।

तब राजा ने पूरे राज्य में घोषणा करवा दी कि जो युवक इस गुत्थी को सुलझाएगा और राजकुमारियों के नृत्य का राज खोलेगा वह अपनी पसंद की राजकुमारी से विवाह करने के लिये स्वतंत्र होगा।

 आस- पास के नगरों से कई राजकुमार आए। पर कोई भी राजकुमारियों के इस राज का पता नही लगा पाया। क्योंकि राजकुमारियां महल में आने वाले सभी राजकुमारों को नींद वाला शरबत पिला देती थी।

जिससे कि वे लोग रात को गहरी नींद में सो जाते थे। ऐसे बहुत समय बीत गया लेकिन राजकुमारियों के राज का पता नहीं चल पाया।

 जो जो राजकुमार दो दिन तक इस बात का पता नहीं लगा पाते थे, उनको कारागार में डाल दिया जाता था।

 फिर एक दिन दूसरे देश से एक सैनिक राजा की घोषणा औरयही खबर सुनकर राजा के महल आया। वह बहुत ही अच्छा और नेक युवक था। दुसरो की सहायता करता था और बड़ों का आदर भी।

वह पैदल ही अपने देश से यात्रा कर के राजा की नगरी में आ गया। रास्ते मे उसे एक बूढ़ी औरत मिली। उसके हाथों में बहुत ही सामान था। सैनिक झट से उसके पास गया,

और उसका सारा सामान स्वयं पकड़ लिया। रास्ते मे बातें करते करते समय का पता ही नहीं चला। जैसे ही वे दोनों बुढ़िया के घर पहुंचे, बुढ़िया एक परी में बदल गयी। युवक उसे देखकर हैरान रह गया।

Pari ki Kahaniyan Interesting Part- अब परी बोली, ” तुम बहुत ही अच्छे हो! तुमने मेरी सहायता की। मुझ पर एक श्राप था , वह श्राप तभी टूट सकता था,

जब कोई सच्चे हृदय से बिना लालच के मेरी मदद कर सके।

और देखो तुम्हारे कारण आज मैं उस श्राप से मुक्त भी हो गयी। तुम यहाँ राजकुमारियों का राज जानने के लिए आए हो न ?”

   युवक ने हामी भरी। तब परी बोली, ” उस राज का अभी तक किसी को भी पता नहीं चल पाया है। मैं तुम्हें राज तो नहीं बता सकती पर तुम्हारी सहायता अवश्य कर सकती हूं।

जब भी राजकुमारी तुम्हें खाने या पीने  की वस्तु दें तो तुम सतर्क हो जाना और उस वस्तु को मत खाना। मैं तुम्हें एक जादुई कपड़ा देती हूं उसको ओढ़कर तुम अदृश्य हो जाओगे,

फिर तुम राजकुमारियों का राज पता करने के लिए स्वतंत्र हो जाओगे और तुम्हें कोई भी नहीं देख पाएगा।”

   परी ने युवक को वह कपड़ा दिया और अदृश्य हो गयी।

अब युवक महल की ओर चल दिया। महल में उसकी तहकीकात हुई और उसको महल में 2 दिन रहने की इजाजत भी मिल गयी। युवक राजमहल में पहुंचने पर सतर्क हो गया।

राजकुमारियों के कक्ष के करीब ही युवक को एक कमरा रहने के लिए दिया गया। सबसे बड़ी राजकुमारी उस दिन शरबत लेकर युवक के पास आई।

Pariyon ki Kahani Moral Part-सभी राजकुमारियां बहुत सुंदर थीं लेक़िन सबसे बड़ी वाली बहनों में भी सबसे अधिक सुंदर थी.

युवक ने अब प्रण ले लिया कि वह राज पता करने के बाद इसी राजकुमारी से विवाह करेगा।

   रात हो गयी। अब युवक खिड़की द्वारा राजकुमारियों पर नजर बनाए हुए था। उसने देखा कि सभी राजकुमारियां अपने कक्ष में स्थित एक सुरँग की सहायता से गायब हो गयीं।

उनके पीछे पीछे युवक भी अपना जादुई कपड़ा ओढ़कर चल दिया। वह सब सुरँग से बाहर निकलने पर एक बहुत सुंदर जगह पर पहुंचे और नृत्य करने लगे। सुबह होने से ठीक पहले वे सब वापस आ गए,

और सुरँग को अच्छी तरह से ढक दिया। अब युवक को सारा राज मालूम हो गया। अगली सुबह होते ही राजकुमार ने यह बात राजा को बताई राजकुमारियों ने भी सच अपने पिता को बता दिया।

   राजा युवक से बहुत खुश हुए और उसका विवाह अपनी सबसे बड़ी पुत्री से करवा दिया।राजा ने राजकुमारियों के नृत्य के लिए एक अलग जगह भी बनवा दी।

अब सब एकसाथ महल में ही, खुशी से रहने लगे।

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