50+ मजेदार छोटे बच्चों की कहानियां | Kids Kahani In Hindi

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Kids Kahani In Hindi

हाथी और सियार | Baccho Ke Liye kahani in hindi me

हाथी और सियार | Baccho Ke Liye kahani in hindi me

चंदनवन एक विशालकाय जंगल था| जंगल में सभी प्रकार के जानवर रहते थे| जंगल में मोती नाम का एक हाथी भी रहता था| मोती हाथी का शरीर काफी बड़ा था| एक बार चंदनवन में दूसरे वन से घूमते -घूमते एक सियार आया| सियार ने जब मोती हाथी को देखा, तब उसे देखकर सियार के मुँह में पानी आने लगा|

सियार, हाथी को खाने के बारे में सोचने लगा और मन ही मन सियार का शिकार करने की योजना बनाने लगा| सियार सोचने लगा कि यह हाथी बहुत बड़ा है, अगर मैं इसका शिकार कर लूँ, तब मुझे कई दिनों तक भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा| ऐसा सोचकर सियार हाथी के पास गया और उससे बोला, ” हाथी दादा हमारे जंगल में कोई राजा नहीं है, हमारे जंगल के सभी जानवर चाहते हैं, कि कोई बड़ा और समझदार जानवर हमारे जंगल का राजा बने”, आप बड़े और समझदार दोनों है, क्या आप हमारे जंगल का राजा बनना पसंद करोगे ?

सियार की बात सुनकर हाथी खुश हो गया| उसने राजा बनने के लिए हाँ बोल दिया| इसपर सियार ने हाथी को अपने साथ चलने के लिए बोला| हाथी राजा बनने की ख़ुशी में झूमते हुए सियार के साथ जाने के लिए तैयार हो गया| सियार हाथी को ऐसे तालाब में ले गया, जिस तालाब में दलदल था| हाथी राजा बनने की ख़ुशी में इतना मस्त था कि वह बिना सोचे तालाब में नहाने उतर गया|

जैसे ही हाथी दलदल वाले तालाब में उतरा, हाथी के पैर दलदल में धंसने लगे| उसने सियार से बोला, “तुम मुझे कैसे तालाब में ले आये, मेरी मदद करो मेरे पैर दलदल में धंस गए हैं”|

हाथी की बात सुनकर सियार जोर जोर से हंसने लगा और हाथी से बोला, “मैं तुम्हारा शिकार करना चाहता था, इसलिए मैंने तुमसे राजा बनने की बात का झूठ बोली| अब तुम दलदल में फंसकर मर जाओगे और मैं तुमको अपना भोजन बनाऊंगा”|

सियार की बात सुनकर हाथी की आँखों से आंसू आने लगे| उसने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, बहुत बार सियार से बाहर निकालने की विनती की, लेकिन सियार ने उसकी कोई मदद नहीं की और हाथी कुछ देर के प्रयत्न के बाद मर गया| हाथी के मरने के बाद सियार हाथी को खाने के लालच में उसकी पीठ पर चढ़ गया। हाथी को खाने के लालच में सियार यह भूल गया कि वह भी हाथी के साथ दलदल में नीचे जाता जा रहा है| और अंत में, सियार भी हाथी के साथ धीरे धीरे दलदल में धंसकर मर गया|

कहानी से शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, कि जो दूसरों के लिए बुरा करता है, उसके साथ भी बुरा होता है| इसलिए हमें जीवन में कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए, अगर हम किसी के लिए बुरा करते हैं, तब हमें भी अपने साथ ऐसा होने के लिए तैयार रहना चाहिए| क्यूंकि बुरे कर्म का फल हमेशा बुरा होता है, इसलिए किसी के साथ कभी बुरा ना करें| आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी और आपने इससे क्या सीखा, हमें कमेंट करके जरूर बतायें|

दो मित्र और भालू (छोटे बच्चों की कहानियां)- a short story in hindi with moral

दो मित्र और भालू (छोटे बच्चों की कहानियां)- Short Story in Hindi

एक गाँव में सोहन और मोहन दो दोस्त रहते थे. एक बार वे दोनों नौकरी की तलाश में परदेश की यात्रा पर निकले. वे दिन भर चलते रहे. शाम हो गई और फिर रात घिर आई. किंतु, उनकी यात्रा समाप्त न हुई. दोनों एक जंगल से गुजर रहे थे. जंगल में अक्सर जंगली जानवरों का भय रहता है. सोहन को भय था कि कहीं किसी जंगली जानवर से उनका सामना न हो जाए.

वह मोहन से बोला, “मित्र! इस जंगल में अवश्य जंगली जानवर होंगे. यदि किसी जानवर ने हम पर हमला कर दिया, तो हम क्या करेंगे?”

सोहन बोला, “मित्र डरो नहीं. मैं तुम्हारे साथ हूँ. कोई भी ख़तरा आ जाये, मैं तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा. हम दोनों साथ मिलकर हर मुश्किल का सामना कर लेंगे.”

इसी तरह बातें करते हुए वे आगे बढ़ते जा रहे थे कि अचानक एक भालू उनके सामने आ गया. दोनों दोस्त डर गए. भालू उनकी ओर बढ़ने लगा. सोहन दर के मारे तुरंत एक पेड़ पर चढ़ गया. उसे सोचा कि मोहन भी पेड़ पर चढ़ जायेगा. लेकिन मोहन को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था. वह असहाय सा नीचे ही खड़ा रहा.

भालू उसके नज़दीक आने लगा. मोहन डर के मारे पसीने-पसीने होने लगा. लेकिन डरते हुए भी वह किसी तरह भालू से बचने का उपाय सोचने लगा. सोचते-सोचते एक उपाय उसके दिमाग में आ गया. वह जमीन पर गिर पड़ा और अपनी सांस रोककर एक मृत व्यक्ति की तरह लेटा रहा.

भालू नज़दीक आया. मोहन के चारों ओर घूमकर वह उसे सूंघने लगा. पेड़ पर चढ़ा सोहन यह सब देख रहा था. उसने देखा कि भालू मोहन के कान में कुछ फुसफुसा रहा है. कान में फुसफुसाने के बाद भालू चला गया.

भालू के जाते ही सोहन पेड़ से उतर गया. मोहन भी तब तक उठ खड़ा हुआ. सोहन ने मोहन से पूछा, “मित्र! जब तुम जमीन पर पड़े थे, तो मैंने देखा कि भालू तुम्हरे कान में कुछ फुसफुसा रहा है. क्या वो कुछ कह रहा था?”

“हाँ, भालू ने मुझसे कहा कि कभी भी ऐसे दोस्त पर विश्वास मत करना, तो तुम्हें विपत्ति में अकेला छोड़कर भाग जाये.”

कहानी से सीख (2 Friends And A Bear Story In Hindi Moral) : जो दोस्त संकट में छोड़कर भाग जाये, वह भरोसे के काबिल नहीं.

दादी की पेन्सिल –  cartoon kahani in hindi

दादी की पेन्सिल –  cartoon kahani in hindi

रोहन अपने कमरे में उदास बैठा था| उसका इंग्लिश का एग्जाम बहुत खराब हुआ था| वह दुःखी था कि उसको बहुत कम मार्क्स मिलेंगे|

रोहन की दादी कमरे में आती हैं और रोहन को एक सुन्दर सी पेन्सिल गिफ्ट में देती हैं|

रोहन कहता है कि दादी मां मुझे ये पेन्सिल मत दो, मेरा एग्जाम तो खराब हुआ है इसलिए मुझे ये गिफ्ट नहीं चाहिए|

दादी मां कहती हैं – रोहन बेटा, ये पेन्सिल भी एकदम तुम्हारी तरह है| यह पेन्सिल तुमको बहुत कुछ सिखाएगी|

देखो जब यह पेन्सिल को छीला जाता है तो इसे भी ऐसे ही दर्द होता है जैसे अभी तुमको हो रहा है|

लेकिन पेन्सिल छिलने के बाद पहले से शॉर्प और अच्छी हो जाती है और उससे अच्छी लिखाई होती है| अब तुम भी आगे से बहुत मेहनत करोगे तो तुम भी पहले से ज्यादा होशियार और अच्छे बनोगे|

रोहन खुश होकर दादी की पेन्सिल रख लेता है|

शिक्षा – मित्रों, पेन्सिल जब तक छिलती नहीं है तब तक उससे अच्छी लिखाई नहीं की जा सकती, वैसे ही इंसान को भी अच्छा बनने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है|

आपकी आज की कठिनाइयां कल के लिए एक बहुत बड़ा सबक हैं|

नन्हीं चिड़िया – (Moral Stories for childrens in Hindi)

नन्हीं चिड़िया – (Moral Stories for childrens in Hindi)

एक समय की बात है. एक घना जंगल था, जिसमें हर तरह के छोटे-बड़े जानवरों और पक्षियों का बसेरा था. उसी जंगल के एक पेड़ पर घोंसला बनाकर एक नन्हीं चिड़िया भी रहा करती थी.

एक दिन उस जंगल में भीषण आग गई. समस्त प्राणियों में हा-हाकार मच गया. सब अपनी जान बचाकर भागने लगे. नन्हीं चिड़िया जिस पेड़ पर रहा करती थी, वह भी आग की चपेट में आ गया था. उसे भी अपना घोंसला छोड़ना पड़ा।

लेकिन वह जंगल की आग देखकर घबराई नहीं. वह तुरंत नदी के पास गई और अपनी चोंच में पानी भरकर जंगल की ओर लौटी. चोंच में भरा पानी आग में पानी छिड़ककर वह फिर नदी की ओर गई. इस तरह नदी से अपनी चोंच में पानी भरकर बार-बार वह जंगल की आग में डालने लगी.

जब बाकी जानवरों ने उसे ऐसा करते देखा, तो हँसने लगे और बोले, “अरे चिड़िया रानी, ये क्या कर रही हो? चोंच भर पानी से जंगल की आग बुझा रही हो. मूर्खता छोड़ो और प्राण बचाकर भागो. जंगल की आग ऐसे नहीं बुझेगी.”

उनकी बातें सुनकर नन्हीं चिड़िया बोली, “तुम लोगों को भागना है, तो भागो. मैं नहीं भागूंगी. ये जंगल मेरा घर है और मैं अपने घर की रक्षा के लिए अपना पूरा प्रयास करूंगी. फिर कोई मेरा साथ दे न दे।”

चिड़िया की बात सुनकर सभी जानवरों के सिर शर्म से झुक गए. उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ. सबने नन्हीं चिड़िया से क्षमा मांगी और फिर उसके साथ जंगल में लगी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए. अंततः उनकी मेहनत रंग लाई और जंगल में लगी आग बुझ गई.

सीख (Moral of the story): विपत्ति चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न हो? बिना प्रयास के कभी हार नहीं मानना चाहिए।

सोने का अंडा कहानी हिंदी में (short moral story in hindi)

सोने का अंडा कहानी हिंदी में (short moral story in hindi)

यह कहानी एक किसान की है जो अपनी पत्नी के साथ अपने घर में रहा करता था। वह दोनों बहुत ही मेहनती थे जिनके पास एक छोटा सा खेत था जहां दोनों मिलकर खेती किया करते थे लेकिन उन्हें अपने मेहनत के अनुसार परिणाम नहीं मिलता था। उनकी फसल अच्छी नहीं होती थी। इस वजह से उनका जीवन गरीबी में व्यतीत हो रहा था। इस गरीबी से बचने के लिए उस किसान ने सोचा कि वह अब मुर्गियों के अंडे बेचकर पैसे कमाएगा। मुर्गियों को रखने के लिए दोनों ने पहले अपने घर में मौजूद ज़मीन पर एक बाड़ा बनाया जहां वे उन मुर्गियों को रख सकते थे।

बाड़ा बना लेने के बाद वह किसान बाजार गया और वहां से कुछ मुर्गियों को खरीद कर ले आया। मुर्गियों को वह बाडे में रख दिया और उन्हें खाने के लिए कुछ दाने दिए। किसान और उसकी पत्नी ने मुर्गियों का ख्याल रखना शुरू कर दिया। अगले दिन दोनों ने उठकर देखा की अंडों में एक अंडा सोने का था। सोने का अंडा देखकर वे दोनों बेहद खुश थे। वह किसान उस सोने का अंडा लेकर एक जौहरी के पास गया और उसे अच्छी कीमत में बेच दिया।

अगले दिन भी उन्हें अन्य अंडों के साथ एक सोने का अंडा मिला। यह देखकर उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि सोने का अंडा कौन सी मुर्गी दे रही है? ऐसे में दोनों ने निर्णय लिया कि वे रात भर मुर्गियों की निगरानी करेंगे और पता लगाएंगे कि कौन सी मुर्गी सोने का अंडा दे रही है? रात भर निगरानी करने के बाद उन्हें पता चल गया कि सोने का अंडा देने वाली मुर्गी कौन सी है। दोनों ने उस मुर्गी को अलग कर दिया और उसे अच्छे से पालने लगे। वे दोनों मिलकर उस मुर्गी का अच्छा ध्यान रखते थे।

लेकिन एक दिन किसान की पत्नी सोचने लगी की कब तक वे दोनों एक-एक सोने का अंडा इकट्ठा करते रहेंगे? किसान की पत्नी को जल्द से जल्द धनवान बनना था। ऐसे में वह अपने पति, किसान के पास गई और उसे बोली, “हम रोज एक-एक सोने का अंडा इकट्ठा करते हैं लेकिन हम कब तक ऐसा करेंगे? मेरे पास इससे भी अच्छा एक सुझाव है जिसे सुनकर आप खुश हो जाएंगे।”

यह सुनते ही किसान अपनी पत्नी से बोला, “अगर ऐसी बात है तो मुझे जल्दी बताओ।”

पत्नी ने कहा, “हम इस मुर्गी का पेट काटकर इसके अंदर जितने भी सोने के अंडे है उसे निकालकर इकट्ठा बेच सकते हैं और एक साथ ढेर सारा धन कमा सकते हैं। इससे हम बहुत अमीर बन जाएंगे और फिर हमें कभी भी धन की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।”

यह सुनते ही किसान भी लालच में आ गया और अपनी पत्नी से बोला, “तुम्हारा यह सुझाव बहुत ही अच्छा है। मैं अभी तुरंत बाजार जाकर एक चाकू लेकर आता हूं और फिर उस चाकू से हम इस मुर्गी का पेट काटेंगे। हम मुर्गी के पेट से सारा सोने का अंडा निकाल लेंगे।” यह कहकर वह किसान बाजार चला गया और वहां से एक चाकू खरीद लाया।

रात होते ही दोनों ने मिलकर उस चाकू के सहारे मुर्गी का पेट काट दिया। मुर्गी का पेट काटते ही उन्होंने देखा कि वह एक साधारण मुर्गी की तरह ही था और उसके पेट के अंदर कोई भी सोने का अंडा नहीं था। यह देखकर दोनों बेहद अफसोस करने लगे और अंत में वे दोनों अपना सर पकड़ कर जमीन में बैठ गए। दोनों को अपने लालच का खूब पछतावा हुआ। 

कहानी से सीख: लालच बुरी बला है।

सुनहरे गोबर की कथा (बच्चों की रात की कहानियां)

सुनहरे गोबर की कथा (बच्चों की रात की कहानियां)

एक समय की बात है शहर के एक पेड़ पर एक पंछी रहता था। वह पंछी बहुत ही खास था क्योंकि जब कभी भी वह अपना मल त्यागता था तो वह जमीन में गिर कर सोने का बन जाता। इस तरह के पंछी के बारे में ना तो कभी किसी ने सुना था और ना ही कभी किसी ने ऐसा पंछी देखा था। शहर के किसी भी व्यक्ति को इस बात की खबर नहीं थी कि वहां एक ऐसा पंछी भी है।

एक दिन उस शहर का एक मुसाफिर चलते-चलते थककर उस पेड़ के नीचे रुक गया ताकि वह थोड़ी देर आराम कर सके। जब वह आराम कर रहा था तब ऊपर बैठे पंछी ने सोचा कि क्यों ना इस व्यक्ति की थोड़ी सी सहायता की जाए। यह सोच कर पंछी ने उस व्यक्ति के बाजू में अपना मल त्याग दिया। जैसे ही उसका मल जमीन पर गिरा तो वह सोने का बन गया। यह देखकर वह व्यक्ति हैरान हो गया। व्यक्ति ने उस सोने को उठाया और उसे लेकर खुश हो गया।

अब उसके अंदर की लालच और बढ़ने लगी। ऐसे में वह पंछी को पकड़ना चाहता था। पंछी को पकड़ने के लिए उसने पेड़ पर एक जाल बिछाया और वह उस पंछी को पकड़ लिया। पंछी को पकड़ने के बाद वह उसे घर ले गया। घर ले जाकर वह इस बात का इंतजार करने लगा कि कब वह पंछी अपना मल त्यागेगा और इससे उसे सोना मिलेगा। यह सब सोचते-सोचते उसके दिमाग में एक दूसरा खयाल आया। वह सोचने लगा कि अगर राज्य के राजा को एक पंछी के बारे में पता चल गया तो वे इसे ले जाएंगे और शायद इस बात को छुपाने के लिए राजा उसे सजा भी सुना सकते हैं। इसी वजह से वह व्यक्ति पंछी को ले जाकर राजा के सामने प्रस्तुत कर दिया।

राजा के पास जाकर उसने बताया कि यह पंछी आम पंछी नहीं है बल्कि यह एक खास पंछी है जिसका मल सोने में बदल जाता है। यह सुनकर राजा ने उस पंछी को अपने पास रख लिया। कुछ देर बाद राजा के पास एक मंत्री आया और उनसे बोला, “महाराज यह सब बातें बकवास है। क्या आपने कभी सुना है कि कोई पंछी सोने का मल त्यागता है? इसीलिए आप इस पंछी को छोड़ दीजिए और अपना समय बर्बाद ना करें।”

ऐसे में राजा मंत्री की बात मानते हुए उस पंछी को छोड़ने का आदेश दिया। जैसी ही पंछी उड़ने लगा तब उसने दरबार में अपना मल त्याग दिया और उसका मल फर्श में गिरते ही सोने का बन गया। यह देखकर राजा चकित रह गया और उन्होंने उस मंत्री को आदेश दिया कि वह किसी भी तरह से उस पंछी को पकड़कर ले आए।

उड़ते-उड़ते पंछी ने कहा, “मैं बेवकूफ था जो उस व्यक्ति के सामने अपना मल त्यागा। वो व्यक्ति बेवकूफ था जिसने मुझे राजा को दिया और यह राजा बेवकूफ है जिसने मुझे यहां से जाने दिया। इस राज्य में सब के सब बेवकूफ है।

कहानी से सिक्षा: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी दूसरों की बातों में नहीं आना चाहिए। अगर कोई हमें सलाह दे रहा है तो हमें उस सलाह पर अच्छे से विचार करना चाहिए और फिर उस पर निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने के बाद ही हम एक समझदार व्यक्ति कहलाएंगे।

चालाक मुर्गे और गीदड़ की शिक्षाप्रद कहानी (बच्चों की कहानियां)

चालाक मुर्गे और गीदड़ की शिक्षाप्रद कहानी (बच्चों की कहानियां)

एक गाँव में एक मुर्गा रहता था. वह रोज़ सुबह बांग देकर गाँव वालों को जगाया करता था. एक दिन एक गीदड़ कहीं से घूमता हुआ गाँव में आ गया. जब उसने मुर्गे को देखा, तो उसकी लार टपकने लगी. वह सोचने लगा – ‘वाह! क्या शानदार मुर्गा है. अगर इसका मांस खाने को  मिल जाये तो मज़ा आ जाये.

वह तरकीब सोचने लगता है, ताकि किसी तरह मुर्गे को दबोच कर पेट पूजा कर सके. उसने मुर्गे को बहला-फुसला कर अपने काबू में करने का निश्चय किया और उसके पास पहुँचकर बोला, “मित्र! मैं तुम्हारी आवाज़ सुनकर तुम्हारे पास आया हूँ. तुम्हारी आवाज़ बहुत ही सुरीली है. कानों में मिश्री घुल जाती है. मन करता है, दिन-भर सुनता रहूं. क्या तुम एक बार मुझे अपनी सुरीली आवाज़ सुनाओगे.”

मुर्गे की कभी किसी ने इतनी प्रशंसा नहीं की थी. वह गीदड़ की बात सुनकर मुर्गा ख़ुशी से फूला नहीं समाया और उसे अपनी आवाज़ सुनाने के लिए ज़ोर-ज़ोर से “कूक-डू-कू” करने लगा.

गीदड़ इसी फ़िराक में था. उसके देखा कि मुर्गे का ध्यान उसकी ओर नहीं है. इसलिए अवसर पाकर उसने मुर्गे को अपने मुँह में दबा लिया और जंगल की ओर भागने लगा.

जब वह जंगल की ओर भाग रहा था, उस समय गाँव वालों की दृष्टि उस पर पड़ गई.  वे लाठी लेकर उसे मारने के लिए दौड़े. गीदड़ डर के मारे और तेजी से भागने लगा. मुर्गा अब तक उसके मुँह में दबा था. तब तक उसने उसके चंगुल से बचकर निकलने का एक उपाय सोच लिया था.

वह भागते हुए गीदड़ से बोला, “देखो गीदड़ भाई! ये गाँव वाले मेरे कारण तुम्हारा पीछा कर रहे हैं. वे तब तुम्हारा पीछा करना छोड़ेंगे, जब तुम उनसे कहोगे कि मैं तुम्हारा हूँ, उनका नहीं. ऐसा करो, तुम उन्हें बोल दो.”

गीदड़ मुर्गे की बातों में आ गया और पलटकर बोलने के लिए अपना मुँह खोल लिया. लेकिन जैसे ही उसने मुँह खोला, मुर्गा उड़ गया और गाँव वालों के पास चला गया. इस तरह अपनी चतुराई से उसने अपनी जान बचाई.

सीख (Moral of the story): संकट के समय बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए।

गधा और धोबी – Hindi Moral Story with Images

गधा और धोबी – Hindi Moral Story with Images

एक निर्धन धोबी था। उसके पास एक गधा था। गधा काफी कमजोर था क्योंकि उसे बहुत कम खाने-पीने को मिल पाता था।

एक दिन, धोबी को एक मरा हुआ बाघ मिला। उसने सोचा, मैं गधे के ऊपर इस बाघ की खाल डाल दूंगा और उसे पड़ोसियों के खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया करूंगा।

किसान समझेंगे कि वह सचमुच का बाघ है और उससे डरकर दूर रहेंगे और गधा आराम से खेत चर लिया करेगा।

धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर अमल कर डाला। उसकी योजना काम कर गई।

एक रात गधा खेत में चर रहा था कि उसे किसी गधी की रेंकने की आवाज सुनाई दी।

उस आवाज को सुनकर वह इतने जोश में आ गया कि वह भी जोर-जोर से रेंकने लगा।

गधे की आवाज सुनकर किसानों को उसकी असलियत का पता लग गया और उन्होंने गधे की खूब पिटाई की।

कहानी से सीख: इसलिए कहा गया है कि अपनी सच्चाई नहीं छिपानी चाहिए।

आसमान गिर रहा है (छोटे बच्चों की मजेदार कहानियां)

आसमान गिर रहा है (छोटे बच्चों की मजेदार कहानियां)

जंगल में एक डरपोक खरगोश रहता था. एक दिन वह देवदार के पेड़ के नीचे मज़े से सो रहा था कि अचानक एक फल उसके सिर पर आ गिरा. डरपोक खरगोश की नींद खुल गई. वह सोचने लगा कि ये क्या हुआ? क्या गिरा मेरे सिर पर? कहीं आसमान तो नहीं गिर रहा?

दिमाग में ये सोच आते ही वह डर गया और फिर क्या? वह भागने लगा. वह बेतहाशा भागा चला जा रहा था. उसे इस तरह भागते हुए जब हाथी ने देखा, तो पूछने गा, “अरे भाई खरगोश क्या हुआ? क्यों ऐसे भागे जा जा रहे हो?”

खरगोश हांफते हुए बोला, “भागो भागो…आसमान गिर रहा है.”

खरगोश की बात सुनकर हाथी भी डर गया. वह भी उसके पीछे-पीछे भागने लगा. कुछ देर बाद उनकी मुलाकात गेंडे से हुई. गेंडे ने भागने का कारण पूछा, तो हाथी ने खरगोश से सुनी बात दोहरा दी, “भागो भागो….आसमान गिर रहा है.”

ये सुनकर गेंडा भी डर गया और उनके पीछे हो लिया. अब जो भी उन्हें मिलता “आसमान गिर रहा है” सुनकर उनके पीछे भागने लगता. खरगोश ने पीछे हाथी, हाथी के पीछे गेंडा, गेंडे के पीछे भालू, भालू ने पीछे चीता और ऐसे ही जंगल के ढेर सारे जानवरों की कतार लग गई. सब बेतहाशा भागे जा रहे थे.

इतने सारे जानवरों को इस तरह भागते हुए जब जंगल में टहल रही लोमड़ी ने देखा, तो चकित रह गई. उसने कतार ने लगे भालू से पूछा, “क्या हुआ भाई, तुम सब लोग ऐसे कहाँ भागे चले जा रहे हो?”

“भागो भागो आसमान गिर रहा है.” भालू चिल्लाया.

ये सुनकर लोमड़ी अचरज में पड़ गई कि ऐसा भी कहीं होता है. उसने सारे जानवरों को रोका और बोली, “इस तरह भागने से किसी समस्या का हल नहीं निकलेगा. चलो जंगल के राजा शेर के पास चलते हैं.”

सब लोमड़ी के पीछे हो लिए. थोड़ी ही देर में सारे जानवर शेर के सामने खड़े थे. लोमड़ी ने शेर को सारी बात बताई.

ध्यान से सारी बात सुनने के बाद शेर ने पूछा, “सबसे पहले किसने आसमान गिरते हुए देखा?”

सबने खरगोश की तरफ़ इशारा किया. शेर ने खरगोश से पूछा, “तुमने कहाँ देखा कि आसमान गिर रहा है?”

“वनराज, मैं देवदार ने पेड़ ने नीचे सो रहा था कि तभी मेरे ऊपर आसमान का एक छोटा टुकड़ा गिरा और मैं भागने लगा और सबको बताने लगा. वनराज हम सबको भागना चाहिए कहीं पूरा आसमान गिर गया, तो हम सबका क्या होगा?”

खरगोश की बात सुनकर शेर को कुछ संदेह हुआ. उसने लोमड़ी से कुछ चर्चा की, फिर सारे जानवरों को लेकर उसी देवदार ने पेड़ के पास आया, जहाँ खरगोश सोया था. वहाँ देवदार का फल गिरा देख उसे सारा माज़रा समझ आ गया.

वह फल उठाकर शेर बोला, “तो ये है आसमान”

सारे जानवर समझ गए कि डरपोक खरगोश देवदार का फल गिरने पर सोचने लगा कि आसमान गिर रहा है. सब हँसने लगे. खरगोश बहुत शर्मिंदा हुआ. शेर ने खरगोश को समझाया कि इस तरह की अफ़वाह न फैलाए. उसने सारे जानवरों को भी समझाया कि बिना सोचे-समझे किसी की बात का यकीन न करें.

शिक्षा (Moral of the story)

  • बिना सोचे-समझे अफवाहें न फैलाएं.
  • किसी की बात पर बिना सोचे-समझे विश्वास न करें

गौरैया और बंदर की कहानी (चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी)

गौरैया और बंदर की कहानी (चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी)

घने से एक जंगल में बड़ा सा पेड़ था। उस पेड़ पर दो गौरैया अपना घोंसला बनाकर रहती थी। दोनों आपस में बहुत ही खुश थे और खुशी-खुशी के अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। ठंड का समय आ चुका था और इस बार ठंड कुछ ज्यादा ही पड़ी थी। ठंड के चलते सारे जानवर अपने-अपने रहने की जगह ढूंढ कर उसमें रहने लगे थे ताकि वह इस ठंड से बच सके। लेकिन जंगल में कुछ ऐसे बंदर भी थे जिनका रहने का कोई ठिकाना नहीं था। ऐसे में वह बंदर यहां वहां भटकते रहते थे।

एक दिन कुछ बंदर ठंड के चलते भटकते-भटकते उस पेड़ के नीचे आ पहुंचे जिस पेड़ पर वे दोनों गौरैया रहती थी। सारे बंदर ठंड के मारे ठिठुर रहे थे। ऐसे में उन में से एक बंदर ने कहा, “आज बहुत ही ज्यादा ठंड है। ठंड के मारे तो मेरी जान निकली जा रही है। क्यों ना हम मिलकर आग जलाते हैं? उस आग से हमें गर्मी भी मिल जाएगी।”

यह सुनकर बाकी सब बंदरों ने सोचा कि ऐसा करना सही होगा। आग जलाने के लिए वे बंदर सूखी पत्तियां और लकड़ियां इकट्ठा करने लग गए। जब वे ऐसा कर रहे थे तभी ऊपर बैठी गौरैया उनको देख रही थी। उससे रहा नहीं गया और उसने बंदरों से कहा, “आप सब कौन हैं? दिखने में तो आप लोग मनुष्य जैसे दिखते हैं। आपके पैर भी हैं और हाथ भी हैं। तो आप सब अपना घर बना कर क्यों नहीं रह लेते?”

गोरिया की यह बात सुनकर सारे बंदर गुस्सा हो गए और उनमें से एक ने कहा, “तुम अपना काम करो और हमें अपना काम करने दो। क्या तुम्हें नहीं पता कि दूसरों के काम में टांग नहीं अड़ाना चाहिए?”

इसके बाद वह गौरैया चुप हो गई। वे बंदर लकड़ी और सूखी पत्तियां इकट्ठा कर चुके थे। तब उनमें से एक बंदर ने कहा, “हमने लकड़ी और पत्तियां तो इकट्ठा कर ली है लेकिन हम इसमें आग जलाएंगे कैसे?”

ऐसे में एक बंदर ने जवाब दिया, “मैंने एक मनुष्य को आग जलाते हुए देखा है। वह चिंगारी से आग जलाते हैं हम भी ऐसा ही करेंगे।”

वे सब बात कर रहे थे कि तभी पास में से एक जुगनू गुजरा। जुगनू को देखकर बंदरों को लगा कि वह चिंगारी है। ऐसे में वे सब उस जुगनू को पकड़ने लगे। जुगनू को पकड़ लेने के बाद उन्होंने उससे आग जलाने का प्रयास किया। लेकिन जुगनू से आग नहीं जला और कुछ देर बाद वह जुगनू आ से उड़ गया।

तभी ऊपर बैठी गौरैया सोचने लगी कि के सारे बंदर कितने मूर्ख है जो एक जुगनू से आग जलाने की कोशिश कर रही है। वह गौरैया खुद को रोक नहीं पाई और उन सबसे बोली, “अरे आग ऐसे नहीं जलाते। आग जलाने के लिए दो पत्थरों को रगड़ना पड़ता है और उसमें से निकली हुई चिंगारी से आग जलता है।”

बंदरों ने उसकी बात नहीं सुनी और वे फिर से उस जुगनू को पकड़ने लगे। गौरैया ने फिर से उन्हें बताया कि पत्थरों को रगड़ कर आज जलाया जा सकता है। ऐसे में एक बंदर गुस्सा होकर उस पेड़ पर चढ़ गया और गौरैया के घोसले को गिरा दिया। इसके बाद वह गोरिया उदास होकर रोने लगी और वह सारे बंदर वहां से चले गए।

राजा और मूर्ख बंदर (Moral Story in Hindi)

राजा और मूर्ख बंदर (Moral Story in Hindi)

यह कहानी एक राजा की है जो अपने पास एक बंदर रखता था। वह उस बंदर को बहुत अच्छे से पालता था। बंदर भी उस राजा से बहुत प्यार करता। वह अपने राजा की अच्छे से सेवा करता था लेकिन बंदर बहुत मूर्ख था। मूर्ख होने की वजह से वह बंदर उल्टे सीधे काम किया करता।

एक दिन वह बंदर अपने राजा को हाथ पंखे से हवा दे रहा था। वह बड़े आराम से हवा दे रहा था और अपने राजा को सुकून से सोता हुआ देख रहा था। जब वह ऐसा कर रहा था तभी वहां एक मक्खी आकर भिन भिनाने लगी। मक्खी को भिन भिनाता देख बंदर ने उसे भगाने की कोशिश की। लेकिन वह मक्खी वहां से भागने का नाम ही नहीं ले रही थी।

जब वह मक्खी राजा के सर पर बैठती तो बंदर राजा के सर के पास तेजी से हवा करने लगता। फिर वह मक्खी उड़कर राजा के छाती में जाकर बैठ गई तो वह बंदर राजा के छाती पर तेजी से हवा करने लगा। फिर वह मधुमक्खी उड़कर राजा के पेट पर बैठ गई बंदर पेट पर तेजी से हवा करने लगा। बंदर उल्टी-सीधी हरकतें करने लगा था। लेकिन राजा बड़े आराम से सो रहे थे।

मक्खी से बंदर बहुत ही ज्यादा परेशान हो गया था। वह मक्खी वापस से जाकर राजा के नाक पर बैठ गई। गुस्से में आकर वह बंदर मयान में रखी हुई तलवार को निकाला और राजा के पेड़ पर चढ़ गया। पेट पर चढ़ने के बाद उसने तलवार को ऊपर उठाया। बंदर के ऐसा करने की वजह से राजा की नींद खुली और बंदर को इस तरह से तलवार लिए खड़ा देख राजा डर गया।

तभी वह मक्खी राजा के नाक से हटकर हवा में उड़ने लगी। तब वह बंदर तलवार को हवा में इधर-उधर घुमाने लगा। यह सब देखकर राजा बहुत डर गया। डर के मारे वह राजा उस कमरे से भाग गया और उसने सैनिकों को बुलाया। सैनिकों ने जैसे तैसे बंदर से तलवार छीन लिया और उसे शांत किया।

कहानी से शिक्षा (Moral of the story): इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बेवकूफ हो को अपने पास जगह देने से मुसीबत आपके ऊपर भी आ सकती है। बेवकूफ लोग बिना सोचे समझे कार्य कर देते हैं और उसका दुष्परिणाम उनके आसपास के लोगों को भी भुगतना पड़ता है।

शेर और तीन गाय छोटे बच्चों की कहानियां (Kids Kahani In Hindi)

शेर और तीन गाय छोटे बच्चों की कहानियां (Kids Kahani In Hindi)

जंगल के किनारे स्थित एक चारागाह में तीन गायें रहती थी. तीनों भिन्न-भिन्न रंगों की थी : एक काली, एक सफ़ेद और एक भूरी. उनमें गाढ़ी मित्रता थी. तीनों दिनभर साथ रहती, साथ ही चारागाह में घास चरती और रात में एक-दूसरे के पास ही सोती थीं.

एक दिन भूरे रंग का एक सिंह जंगल से भटकते हुए उस चारागाह के पास से गुजरा. वहाँ उसकी दृष्टि उन तीन गायों पर पड़ी. सिंह कई दिनों से भूखा था और शिकार की तलाश में भटक रहा था. हृष्ट-पुष्ट गायों को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया.

वह घात लगाकर एक बड़ी चट्टान के पीछे बैठ गया और तीनों गायों के अलग होने की बांट जोहने लगा ताकि वह उन पर हमला कर सके. समूह में उनका सामना करना उसके लिए मुश्किल था. किंतु पूरा दिन बीत जाने के बाद भी तीनों गायें एक-दूसरे से अलग नहीं हुई.

दूसरा दिन भी इसी तरह बीता. तीन दिन तक सिंह प्रतीक्षा करता रहा. किंतु ऐसा अवसर आया ही नहीं जब तीनों गायें साथ न हो. आखिरकार सिंह के धैर्य ने जवाब दे दिया. अब वह ऐसा उपाय सोचने लगा, जिससे तीनों गायों में अलगाव हो जाये.

उपाय दिमाग में आते ही वह गायों के पास गया और उनका अभिवादन करते हुए बोला, “नमस्कार मित्रों, आप लोग कैसे हैं? मैं यहाँ से गुजर रहा था. आप लोगों को देखा, तो सोचा मिल लूं.”

काली और सफ़ेद गाय ने सिंह के अभिवादन का कोई उत्तर नहीं दिया, क्योंकि वे उसकी प्रकृति जानते थे. किंतु भूरी गाय ने सिंह का अभिवादन स्वीकार करते हुए प्रसन्नता पूर्वक उत्तर दिया, “मित्र, तुमसे मिलकर बहुत ख़ुशी हुई.”

काली और सफ़ेद गायों को भूरी गाय का सिंह से बात करना अच्छा नहीं लगा. वे जानती थी कि सिंह विश्वासयोग्य नहीं है. सिंह शिकार के लिए ही अन्य जानवरों की खोज में रहता है, न कि मित्रता के लिए.

दिन गुजरने लगे. भूरी गाय का सिंह के प्रति सौहाद्र बढ़ने लगा. काली और सफ़ेद गायों के समझाने के बावजूद भूरी गाय ने सिंह से मित्रता कायम रही.

एक दिन सिंह भूरी गाय के पास आकर बोला, “तुम तो देख रही हो कि हमारे शरीर का रंग गाढ़ा है और सफ़ेद गाय का हल्का. हल्का रंग गाढ़े रंग से भिन्न होता है. अच्छा होगा कि मैं सफ़ेद गाय को मरकर खा जाऊं, इस तरह हम सबमें कोई अंतर नहीं रहेगा और हम अच्छे से साथ में रह पायेंगे.”

भूरी गाय ने सिंह की बात मान ली और काली गाय को एक तरफ ले जाकर उसे अपनी बातों में व्यस्त कर लिया. इधर सफ़ेद गाय को अकेली पाकर सिंह उसे मारकर खा गया.

कुछ दिन गुजरने के बाद सिंह फिर से भूरी गाय के पास आया और बोला, “तुम्हारे और मेरे शरीर का रंग बिल्कुल एक समान है. किंतु देखो काली गाय का रंग हमारे रंग से नहीं मिलता. इसलिए मैं ऐसा करता हूँ कि काली गाय को मारकर खा लेता हूँ, इस तरह हम एक रंग के प्राणी ही यहाँ हँसी-ख़ुशी रहेंगे.”

भूरी गाय ने फिर से सिंह की बात मान ली और काली गाय को अकेला छोड़कर दूर चली गई. इधर सिंह ने मौका देखकर काली गाय पर हमला कर दिया और उसे मारकर खा गया.

अब भूरी गाय चारागाह में अकेली रह गई. सारा दिन वह अकेले घूमती और घास चरती रहती. वह बहुत प्रसन्न थी. उसे ऐसा लगने लगा था कि वह एकलौती ऐसी प्राणी है, जिसका रंग सिंह के रंग के समान है. वह स्वयं को सिंह के समकक्ष समझने लगी.

कुछ दिन बीतने के बाद सिंह को फिर से भूख लग आई. वह भूरी गाय के सामने आया और जोर से दहाड़ा. सिंह का ये रूप देखकर भूरी गाय डर गई. सिंह उससे बोला, “आज तुम्हारी बारी है. आज मैं तुम्हें मारकर खा जाऊंगा.”

भूरी गाय डर से थर-थर कांपने लगी और बोली, “किंतु मैं तो तुम्हारी मित्र हूँ. तुमने मुझसे जैसा कहा, मैंने वैसा ही किया. तुम मुझे कैसे खा सकते हो?”

सिंह ने फिर से दहाड़ लगाईं और बोला, “मूर्ख गाय! मेरा कोई मित्र नहीं है. ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं सिंह होकर एक गाय से मित्रता करूंगा?”

भूरी गाय सिंह के सामने गिड़गिड़ाते रही, किंतु सिंह ने उसकी एक न सुनी और उसे मारकर खा गया.

सीख (Moral Of The story): एकता में बल है. कोई भी समूह एकता के बिना आसानी से बिखर जाता है और नष्ट हो जाता है।

सोने के खेत हिंदी की नैतिक कहानियां (Akbar Birbal Story in Hindi)

सोने के खेत हिंदी की नैतिक कहानियां (Akbar Birbal Story in Hindi)

कभी-कभी बादशाह अकबर लोगों को, अपने काम करने वालों को, या सिपाही को छोटी सी गलती का बहुत ही बड़ा दंड दे दिया करते थे। ऐसा तभी होता है जब इंसान ज्यादा गुस्सा करने लगे। बादशाह अकबर की उम्र होने लगी थी। इसके चलते उन्हें गुस्सा भी बहुत ज्यादा आया करता था और गुस्से में आकर वे लोगों को बड़ी-बड़ी दंड दे दिया करते थे। यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है। तो चलिए जानते हैं सोने के खेत की कहानी –

बादशाह अकबर के कमरे में एक सुंदर सा फूलदान था। वह फूलदान बादशाह अकबर का बहुत ही खास था। वे उसका बहुत ही ज्यादा ध्यान रखते थे और उसकी साफ सफाई के लिए एक नौकर भी रखा गया था।

एक दिन नौकर उस फूलदान की सफाई कर रहा था। तब वह अचानक हाथ से गिरकर टूट गया। ऐसे में वह नौकर बहुत ही ज्यादा डर गया था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करेगा? क्योंकि वह जानता था कि वह फूलदान बादशाह अकबर का सबसे खास फूलदान था। ऐसे में वह डरकर टूटे हुए फूलदान को इकट्ठा किया और एक बस्ते में भरकर ले गया ताकि उसे कोई देख ना सके।

कुछ देर बाद बादशाह अकबर अपने कमरे में आए और उन्होंने वह फूलदान वह नहीं देखा। ऐसे में उन्होने अपने सिपाही को आवाज लगाएं, “सिपाही! सिपाही! तुरंत अंदर आओ।”

सिपाही जल्दी से अंदर आया और उसने बादशाह अकबर से पूछा, “जी हां जहांपना।”

“यहां एक फूलदान रखा हुआ करता था वह कहां है? क्या तुमने उसे किसीको ले जाते हुए देखा है?” बादशाह अकबर ने उस सिपाही से कहा।

“जी नहीं, जहाँपनाह मैंने तो किसी को उसे यहां से ले जाते नहीं देखा। लेकिन हां आपका नौकर उसकी सफाई कर रहा था।”

“जाओ तुरंत उस नौकर को लेकर आओ।” बादशाह अकबर ने उस सिपाही को आदेश दिया। वैसे में वह सिपाही तुरंत दौड़कर गया और उस नौकर को बुलाकर ले आया। नौकर को देखकर बादशाह अकबर ने उससे सवाल पूछा, “क्या तुम उस फूलदान की सफाई कर रहे थे?”

“जी हां हुजूर, मैं बस उसकी सफाई करने ले गया था।” उस नौकर ने बताया।

“तो फूलदान कहां है?”

बादशाह अकबर को गुस्सा देख वह नौकर बहुत ही ज्यादा डर गया था और उसे सब कुछ सच कह दिया, “मुझे माफ करना जहांपनाह वह गलती से टूट गया।”

यह सुनकर बादशाह अकबर और भी ज्यादा गुस्सा हो गए। ऐसे में उन्होंने कहा, “वह फूलदार गलती से किसी से भी गिर सकता था। इसके लिए मैं तुम्हें माफ भी कर देता। लेकिन तुमने मुझसे झूठ कहा है इसके लिए मैं तुम्हें माफ नहीं करूँगा। जाओ मैं तुम्हें देश निकाला की सजा देता हूं निकल जाओ इस सल्तनत से। फिर कभी भी यहां आने की कोशिश भी नहीं करना।” इसके बाद वह नौकर रोता हुआ वहां से चला गया।

अगले दिन बादशाह अकबर ने यह बात अपने लोगों को सभा में बताएं। बादशाह अकबर ने सबसे कहा कि झूठ बोला बहुत ही गलत बात है और झूठ बोलने वाले उन्हे बिल्कुल भी पसंद नहीं है। बादशाह की यह बात सुनकर सारे के सारे लोग उनके हा में हां मिलाने लगे। सब एक साथ कहने लगे, “जी हां बिल्कुल सही। आप सही कह रहे हैं। आपने बिल्कुल सही किया।”

लेकिन वही बीरबल चुपचाप बैठा हुआ था। बीरबल को देखकर बादशाह अकबर ने उसे पूछा, “क्या बात है बीरबल क्या तुम्हें नहीं लगता कि मैंने सही किया है? तुम बताओ क्या तुमने कभी झूठ बोला है?

“जी हां हुजूर मैंने कभी ना कभी तो झूठ बोला ही है। मैंने झूठ कभी किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं कहा या किसी को दुख ना हो इस वजह से कहा होगा। हम सबने कभी ना कभी किसी वजह से झूठ कहा ही है।”

बीरबल की यह बात सुनकर बादशाह अकबर तुरंत गुस्सा हो गए और कहने लगे, “बीरबल तुमने झूठ कहा है। मेरे मंत्री होकर तूम झूठ कैसे कह सकते हो? मैं ये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकता कि मेरा मंत्री झूठा है।”

ऐसा कहकर बादशाह ने बीरबल को मंत्री के पद से हटा दिया और उसे सभा से निकल जाने को कहा। बीरबल एक अच्छे नागरिक की तरह बादशाह की बात सुनी और वह वहां से निकल गया। घर जाकर बीरबल सोचने लगा कि बादशाह अकबर छोटी-छोटी बात पर इतनी बड़ी-बड़ी सजा दे देते हैं। फिर बीरबल बादशाह अकबर को समझाने का तरकीब सोचने लगा। तभी उसने एक तरकीब सोची। उसके हाथ में गेहूं की एक बाली थी। तभी बीरबल ने अपने नौकर को बुलाया और उसे आदेश दिया, “रामू यहां आओ। तुम्हें बाजार जाना होगा। बाजार जाकर पता लगाओ कि सबसे अच्छा सुनार कौन है? जब तुम्हें वह मिल जाए तो उसे यह गेहूं की बाली दे देना और उसे कहना है कि हुबहू इसी की तरह सोने से बनी हुई गेहू की बाली बनाएं।”

बीरबल का नौकर वैसा ही किया जैसा बीरबल ने उससे कहा था। वह बाजार गया और एक सुनार के पास जाकर हुबहू वैसी ही गेहूं की बाली बनवा लाया और उसे बीरबल को दे दिया।

अगले दिन बीरबल उसे लेकर बीरबल बादशाह अकबर के पास पहुंचा। बीरबल को देखकर बादशाह ने उससे कहा, “बीरबल तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां अपनी शक्ल दिखाने की? मैंने तुम्हें मना किया था यहां आने के लिए।”

बीरबल ने कहा, “मुझे माफ करना जहाँपनाह लेकिन मैं इस देश का नागरिक भी हूँ। मैं इस देश का भला चाहता हूं। मेरे पास कुछ ऐसी चीज है जिससे कि हमारा देश दुनिया का सबसे अमीर देश बन जाएगा।”

यह बात सुनकर बादशाह में उससे पूछा, “अच्छा ऐसी बात है तो मुझे खुल कर बताओ कि वह क्या है?”

सबसे पहले बीरबल ने बादशाह अकबर को वह सोने की बाली दिखाएं और उनसे कहा, “आप यह जो सोने की बाली देख रहे हैं। यह मुझे एक बहुत ही बड़े साधू ने दिया है। उन्होंने मुझसे कहा है कि इसे जाकर देश की सबसे उपजाऊ जमीन पर लगा दो और यह सोने की गेहू देगा।”

यह सुनकर सभा में मौजूद सारे लोग दंग रह गए और बादशाह अकबर भी सोचने लगे कि ऐसा हो सकता है भी या नहीं? उन्होने अपनी शंका को दूर करने के लिए, बादशाह ने बीरबल से पूछा, “हम कैसे मान लें कि वह साधु सच कह रहा था?”

बीरबल ने तुरंत जवाब दिया, “सबसे पहले तो मैं भी यही सोच रहा था लेकिन मैंने उस साधु को पानी में चलकर नदी पार करते हुए देखा। तब मैं समझ गया कि वह साधु झूठ नहीं कह रहे थे। वह बहुत ही बड़े साधु थे।” बीरबल की यह बात सुनकर बादशाह अकबर चौक गए और उसकी बात मान गए।

“अगर ऐसी बात है तो कल हम तुरंत जाकर सबसे अच्छी उपजाऊ जमीन खोजेंगे और इस सोने की गेहू को वहाँ बो देंगे।”

“आपको यह करने की कोई जरूरत नहीं है जहाँपनाह। मैंने वह ज़मीन खोज ली है।”

इसके बाद फिर बीरबल ने सबको उस जगह का पता बताया और उनसे कहा कि कल सब वहां आए। बादशाह ने आदेश दिया कि सारे के सारे लोग वहाँ कल उपस्थित रहेंगे।

अगले दिन सब वहां उपस्थित हुए। बीरबल ने सबको वह जमीन दिखाया। जमीन को अच्छे से देख लेने के बाद बादशाह अकबर ने बीरबल से कहा, “बीरबल यह लो यह बीज और इसे यहां लगा दो।”

“मुझे माफ करना जहाँपनाह मैं आपको एक बात बताना भूल ही गया कि यह इस बीज को वो हि लगा सकता है जिसने आज तक कभी कोई झूठ नहीं कहा। और आप यह तो जानते हैं कि मैंने झूठ कहा है। मैं यह बीज नहीं लगा सकता।” बीरबल ने बादशाह अकबर से कहा।

यह बात सुनकर बादशाह अकबर ने अन्य लोगों से कहा, “अच्छा ठीक है तुम में से कोई एक सामने आओ जिसने आज तक कोई भी झूठ नहीं कहा। वह आकर इस बीज को यहां लगाएगा।”

बादशाह अकबर के ऐसा कहने के बाद कोई भी सामने नहीं आया। यह देखकर बादशाह अकबर दंग रह गए और वे यह समझ गए की उनमें से सब ने झूठ कहा है और वे सब झूठे हैं।

यह सब देख बीरबल ने बादशाह अकबर से कहा, “जहांपना मुझे लगता है कि यहाँ सब ने झूठ कहा है। इसीलिए कोई भी आगे नहीं आ रहा। तो फिर एक काम करते हैं यह बीज आप ही जमीन पर लगा दीजिए।”

“अरे!यह बीज में नहीं लगा सकता।” बादशाह अकबर ने कहा।

“ऐसा क्यों जहाँपनाह?”

“मैंने भी बचपन में कभी ना कभी तो झूठ कहा ही था। इसीलिए मैं भी यह बीज नहीं लगा सकता।” बादशाह अकबर ने कहा।

“जी हां जहांपना, मैं भी उस दिन आपको यही कहना चाह रहा था कि हम सब ने कभी ना कभी झूठ कहा ही है। भले ही किसी को नुकसान पहचाने के लिए नहीं और ना ही किसी को ठेस पहुंचाने के लिए। हम कभी-कभी किसी की भलाई के लिए भी झूठ कहते हैं और ऐसा करना गलत नहीं है। अगर हम किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए या किसी का बुरा करने के लिए झूठ कहते हैं तो वह गलत है।” यह कहकर बीरबल ने बादशाह अकबर को समझाया।

बीरबल की यह बात सुनकर बादशाह अकबर की आंख खुल गई और उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया। इसके बाद बादशाह अकबर ने बीरबल को उसका पद वापस कर दिया और अपने नौकर को भी वापस बुलवा लिया।

दो मुंह वाली चिड़िया – Kids Moral Story in Hindi on Animal

दो मुंह वाली चिड़िया – Kids Moral Story in Hindi on Animal

नंदन वन में एक नन्हीं चिड़िया रहती थी जिसके दो मुँह थे। दो मुँह होने के कारण वह चिड़िया दूसरे पछियों से बिल्कुल विचित्र दिखती थी। वह चिड़िया एक बरगद के पेड़ पर घौंसला बना कर रहती थी।

एक दिन वह चिड़िया जंगल में भोजन की तलाश में इधर उधर उड़ रही थी। अचानक चिड़िया के दायें वाले मुँह की नजर एक लाल फल पर पड़ी। देखते ही उसके मुँह में पानी आ गया और वह तेजी से वो लाल फल खाने को आगे बढ़ी।

अब चिड़िया का दायाँ मुँह बड़े स्वाद से वो फल खा रहा था। बायाँ मुँह बेचारा बार बार दाएं मुंह की तरफ देख रहा था कि ये मुझे भी खाने को दे लेकिन दायाँ वाला चुपचाप मस्ती से फल खाये जा रहा था।

अब बाएँ मुँह ने दाएँ वाले से प्रार्थना की, कि थोड़ा सा फल खाने को मुझे भी दे दो तो इसपर दाएं मुंह ने गुस्सा दिखाते हुए कहा – कि हम दोनों का पेट एक ही है। अगर मैं खाऊँगा तो वो हमारे पेट में ही जायेगा। लेकिन उसने बाएं वाले को कुछ खाने को नहीं दिया।

अगले दिन चिड़िया फिर से जंगल में खाने की तलाश में उड़ रही थी। तभी बाएं मुँह की नजर एक अदभुत फल पर पड़ी जो बहुत चमकीला था। वह तेजी से उस फल की तरफ लपका। अब जैसे ही वो फल खाने को हुआ तुरंत पास बैठे एक कौए ने चेतावनी दी कि इस फल को मत खाओ ये बहुत जहरीला है।

ये सुनकर दायाँ मुंह भी चौंका और बाएं से प्रार्थना की कि इस फल को मत खाओ ये हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित होगा लेकिन बाएं मुंह को तो दाएं से बदला लेना था।

उसने एक ना सुनी और चुपचाप वह फल खाने लगा। कुछ ही देर में चिड़िया का शरीर मृत होकर जमीन पर गिर पड़ा।

दोस्तों कहानी सुनने में तो आनंद आया होगा लेकिन जब मैं आपको इसकी शिक्षा बताऊंगा तो आपकी आँखे फटी रह जाएँगी। आजकल के माहौल में देखा जाता है कि एक ही परिवार के लोग एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं, एक दूसरे से दुश्मनी रखते हैं। लेकिन जब भी वह एक दूसरे को नुकसान पहुँचाने का सोचते हैं या एक दूसरे से बदला लेने का सोचते हैं तो नुकसान पूरे परिवार का ही होता है। इसलिए एक दूसरे से मिल जुल कर रहें क्योंकि अगर परिवार का एक भी सदस्य गलत काम करे तो नुकसान पूरे परिवार का होता है। यही इस कहानी की शिक्षा है।

छोटी लाल मुर्गी की कहानी (Short Story in Hindi for Kids)

छोटी लाल मुर्गी की कहानी (Short Story in Hindi for Kids)

एक खेत में छोटी लाल मुर्गी रहा करती थी। वह बहुत मेहनती थी। उसके घर के पास ही एक कुत्ता, एक बिल्ली और एक बत्तख रहते थे। ये तीनों आलसी थी। इसके बाद भी चारों में अच्छी दोस्ती थी। कई बार कुत्ता, बिल्ली और बत्तख छोटी लाल मुर्गी का फ़ायदा उठाते थे। वह मेहनत करके अपना भोजन तैयार करती और ये तीनों खाने पहुँच जाते। मुर्गी भी दोस्ती के कारण इन्हें कुछ नहीं कहती थी।

एक दिन की बात है। छोटी लाल मुर्गी खेत में घूम रही थी कि उसे मिट्टी में पड़े गेहूं के कुछ बीज दिखाई पड़े, जिसे देखकर वह सोचने लगी – ‘क्यों न मैं इन बीजों को खेत में बो दूं। जब फसल होगी, तो मैं गेहूं पिसवा लूंगी और उसकी रोटी बनाकर मज़े से खाऊंगी।‘

उसे आशा थी कि उसके दोस्त इस काम में उसकी सहायता अवश्य करेंगे। उसने गेंहू के दाने उठा लिये और सबसे पहले कुत्ते के पास पहुँची। उसने कुत्ते से कहा, “दोस्त! देखो मुझे खेत में गेहूं के ये बीज मिले हैं। मैं इसे बोना चाहती हूँ। क्या तुम मेरी सहायता करोगे।”

कुत्ता उस समय आराम कर रहा था। उसने जवाब दिया, “नहीं! ये मेरे सोने का समय है और मुझे ज़ोरों की नींद आ रही हैं। मैं अभी ये काम नहीं कर सकता।”

छोटी लाल मुर्गी बत्तख के पास पहुँची और उससे पूछने लगी, “दोस्त! क्या तुम इन गेंहुओं को बोने में मेरी सहायता करोगी।”

बत्तख बोली, “नहीं! देखो, कितनी धूप है. मैं तो झुलस जाऊंगी. माफ़ करना मैं तुम्हारी सहयता नहीं कर सकती।”

तब छोटी लाल मुर्गी बिल्ली के पास गई और उसे भी गेंहू के बीज दिखाकर पूछा, “दोस्त! कुत्ता और बत्तख तो मेरी सहायता नहीं कर रहे। क्या तुम मेरी सहायता करोगी।”

बिल्ली बोली, “देखो, इस समय तो मैं पड़ोस के घर में दूध पीने जा रही हूँ। इसलिए अभी तो मैं तुम्हारी सहायता कर ही नहीं सकती. दूध नहीं मिला, तो मैं भूखी रह जाऊंगी।”

दु:खी होकर छोटी लाल मुर्गी बोली, “कोई बात नहीं! मैं खुद ही जाकर खेत में इन बीजों को बो देती हूँ।”

वह खेत में गई और कड़ी धूप में दिन भर मेहनत कर शाम तक उसने सारे बीज बो दिये।

समय बीता और खेत में गेंहू की फसल लहलहाने लगी, जिसे देख छोटी लाल मुर्गी बहुत खुश हुई और दौड़कर सबसे पहले कुत्ते के पास पहुँची। उसने कुत्ते से पूछा, “दोस्त! खेत में फसल लहलहा रही है. क्या तुम फसल काटने में मेरी मदद करोगे?”

“नहीं! मैं यह काम नहीं कर पाऊंगा। मेरी तबियत ज़रा ठीक नहीं।” कुत्ते ने कन्नी काट ली।

छोटी लाल मुर्गी बत्तख के पास पहुँची और उससे सहायता करने के लिए कहा, तो वह बोली, “देख तो रही हो, मैं कितनी छोटी सी हूँ, मैं कैसे खेत में फसल काटूंगी? माफ़ करना, मुझसे न हो पायेगा।“

छोटी लाल मुर्गी बिल्ली के पास पहुँची, जो नहाकर आई थी और धूप में बैठी थी। छोटी लाल मुर्गी ने उससे फसल काटने में सहायता मांगी, तो वह बिदक कर बोली, “नहीं, मैं ये काम नहीं करूंगी। मैं अभी-अभी नहाकर आई हूँ। मैं वहाँ धूल-मिट्टी में गंदी हो जाऊंगी।”

छोटी लाल मुर्गी दु:खी होकर वहाँ से चली गई और सीधे खेत में पहुँची। वहाँ उसने अकेले ही फसल की कटाई की।

अगले दिन उसने सोचा कि क्यों न इन गेंहुओं को मैं पिसवा लूं. आटा रोटी बनाने के काम आ जायेगा।

वह फिर कुत्ते के पास पहुँची और कहने लगी, “दोस्त! चलो ना मेरे साथ आटा चक्की तक. मुझे इन गेंहुओं को पिसवाना है।“

“ऐसे काम के लिए मुझसे ना कहा करो। मैं इन सब कामों के लिए नहीं हूँ।“ कुत्ते ने दो टूक जवाब दिया।

छोटी लाल मुर्गी ने जब बत्तख से पूछा, तो उसने फिर वही बहाना बनाया कि वह तो बहुत छोटी सी है, वह इतनी दूर आटा चक्की तक नहीं जा पायेगी।“

बिल्ली के पास जाकर जब छोटी लाल मुर्गी ने सहायता मांगी, तो बिल्ली बोली, “आटा चक्की से उड़ने वाले आटे से मेरे बाल खराब हो जायेंगे, मैं तो वहाँ नहीं जा सकती.”

दुखी छोटी लाल मुर्गी अकेले ही आटा चक्की गई और गेहूं को पिसवा कर वापस आई।

अगले दिन उसने रोटी बनाने की सोची और अपने तीनों दोस्तों के पास पहुँची। तीनों खेत में खेल रहे थे। उसने पूछा, “दोस्तों! क्या तुम रोटी बनाने में मेरी मदद करोगे?“

“नहीं!” तीनों एक स्वर में बोले, “हमें तो रोटी बनाना आता ही नहीं।“

छोटी लाल मुर्गी ने अकेले ही जाकर रोटी बनाई। जब गर्मागर्म रोटियाँ तैयार हो गई, तो वह कुत्ता, बत्तख और बिल्ली के पहुँची और उन्हें रोटियाँ दिखाते हुए बोली, “अब बताओ कि रोटियाँ कौन कौन खायेगा?”

“हम!” तीनों एक साथ बोले।

“नहीं!” मुर्गी बोली, “इन रोटियों के लिए सारी मेहनत मैंने की है, इसलिए मैं ही सारी रोटियाँ खाऊंगी।“ और मज़े से रोटियाँ खाने लगी। कुत्ता, बत्तख और बिल्ली ने कोई मेहनत नहीं की थी, इसलिए वे बस छोटी लाल मुर्गी का मुँह देखते रह गये।

सीख (Moral Story In Hindi): मेहनत से कभी जी नहीं चुराना चाहिए।

मेंढक और बैल की कहानी हिन्दी में (Kids Kahani In Hindi)

मेंढक और बैल की कहानी हिन्दी में (Kids Kahani In Hindi)

जंगल के एक तालाब में बहुत ही ज्यादा मेंढक रहा करते थे। उस तालाब में मछलियों की तादाद कम थी। मेंढको का आकार अलग-अलग था। कुछ बहुत ही पतले थे, कुछ मोटे, छोटे और कुछ ज्यादा ही बड़े। पतले मेंढक लंबी छलांग लगाकर चट्टानों के ऊपर तक बैठ जाते। छोटे मेंढक छुपने में माहिर थे। बड़े मेंढक मुश्किल से छलांग लगाया करते और थोड़े आलसी हुआ करते थे।

उन सबमें एक बड़ा सा मेंढक भी था वह अच्छा तंदुरुस्त मेंढक था उसका नाम मकाला था। मकाला अपने शरीर को लेकर बहुत ही ज्यादा घमंडी था। उसे अपने शरीर पर बहुत ही ज्यादा नाज़ था। सारें मेंढक बस यही जानते थे कि उन सब में सबसे ज्यादा बढ़ा और तंदुरुस्त मकाला ही है। उन्होंने मकाला से बड़ा किसी को भी नहीं देखा था।

मकाला दिनभर बैठकर बहुत सारे कीड़े-मकोड़े और मक्खियों को खाया करता। मकाला के चार छोटे-छोटे बच्चें भी थे जो अन्य बच्चों के साथ खेला करते।

एक दिन बच्चों ने मिलकर सोचा कि वे सब मिलकर इस तालाब से निकलकर कहीं और जाएंगे। उन्होंने वैसा ही किया। सब निकलकर पास में भ्रमण करने लगे। चलते-चलते उन्हें एक छोटा सा तालाब दिखाई दिया। उस तालाब का पानी बहुत ही साफ था और उन सब ने उस तालाब में डुबकी लगाई। वह सब एक दुसरे के साथ खेल रहे थे। वहां वे खूब मजे कर रहे थे।

तभी अचानक आसपास की चीजें हिलने लगी। एक भयानक आवाज़ उनकी ओर आ रहा था। जिसकी वजह से वे सारे के सारे बच्चे डर गए और उस छोटे से तालाब से निकलकर पत्थरों के पीछे छुप गए। लेकिन उनमें से एक छोटा मेंढक वहां से नहीं निकल पाया। वह फिसल कर उसी तालाब में गिर गया। तभी उस तालाब में बड़ा सा बैल आया। उस बैल को आता देख वह बच्चा रोने लगा और उससे कहने लगा, “रुको! रुको! मुझे मत मारो। मुझे माफ कर दो। मैं तो बस यह खेलने आया था। मुझे मत मारो।”

उस बैल ने छोटे मेंढक की बात सुनी और उसे कहा, “मैं तुम्हें क्यों मारूंगा?” मैं तुम्हें नहीं मारूंगा। मैं तो यहां पानी पीने आया और मैं मेंढको को नहीं खाता।”

“मेंढक नहीं खाते तो फिर तुम क्या खाते हो?” उस बच्चे से बेल से पुछा।

“मैं घास खाता हूं, पेड़ों की पत्तियों को खाता हूं। लेकिन मेंढक को मैं नहीं खाता इसलिए तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है।” बैल ने बच्चें को जवाब दिया।

बाकी मेंढक बच्चे पत्थर के पीछे छुपकर इन सब चीजों को देख रहे थे। जैसे ही बैल ने सबसे कहा कि वह मेंढक नहीं खाता तो वह सारे बच्चे निकलकर उसके सामने आ गए। उन सबने बैल के बारे में पूछा, “तुम मेंढक नहीं खाते यह तो अच्छी बात है। अच्छा बताओ तुम्हारा शरीर इतना बड़ा कैसे हो गया? हमारा शरीर तो छोटा-छोटा है। लेकिन तुम बहुत ज्यादा बड़े हो। हमारे यहां मकाला नाम का एक मेंढक है जो हम सबसे बड़ा है। लेकिन उसका आकार तुम्हारे आकार का आधा भी नहीं है।”

यह बात सुनकर बैल हंसने लगा, “हा हा हा हा, तुम मुझे देखकर सोच रहे हो कि मैं सबसे बड़ा हूं लेकिन ऐसा नहीं है। मुझसे भी बड़े-बड़े जीव जानवर यहां मौजूद है।”

बैल ने उन बच्चों को ढेर सारी बातें बताई और वह सारे के सारे उस बैल की बातें सुनकर चकित थे। बैल ने बच्चों को हाथी के बारें में बताया। पूरी बात होते-होते रात हो चली थी। इसीलिए बैल और मेंढक सब अपने-अपने घर वापस लौट गए।

बच्चों ने सारी बातें मकाला को बताइ। मकाला यह सुनकर यह बात मानने को तैयार नहीं था कि उससे बड़ा भी कोई हो सकता है। लेकिन उसके बाकी दोस्त यह जानते थे कि बाहर की दुनिया में और भी बड़े-बड़े जीव जानवर रहते हैं। मकाला खुद को बड़ा बताने के लिए अपने शरीर में हवा भरना शुरू किया। हवा भरते ही उसने सब से पूछा, “बताओ कौन सबसे बड़ा है?”

सब ने उसे समझाने की कोशिश की कि ऐसा करने से कुछ भी नहीं होगा। मकाला ने और सांस भरी जिससे कि उसका शरीर और थोड़ा सा फूल गया। उसने फिर से वही सवाल पूछा, “बताओ सबसे बड़ा कौन है?”

सब ने उसे समझाने की कोशिश की कि ऐसा करने से वह खुद को नुकसान पहुंचा रहा है लेकिन मकाला सुनने को तैयार ही नहीं था। उसने फिर से अपने शरीर में हवा भरी इससे उसका शरीर पूरी तरीके से फूल चुका था। उसकी आंखें लगभग-लगभग बाहर आ चुकी थी और वह बहुत लाल हो चुका था। सब ने उसे बार-बार समझाया, “मत करो ऐसा। इससे तुम्हें नुकसान हो सकता है।”

लेकिन मकाना बिल्कुल भी नहीं सुना उसने और सास भरा। फिर कुछ देर बाद उसका शरीर गुब्बारे की तरह फुट गया और वह मर गया।

मोरल ऑफ़ द स्टोरी – इसीलिए कहते हैं कि हमें अपने किसी भी चीज पर ज्यादा घमंड नहीं करना चाहिए। घमंड पतन का कारण बनता है। ज्यादा घमंड करने से वह इंसान एक न एक दिन मुहँ की जरूर खाता है।

बुद्धिमान तोता की शिक्षाप्रद कहानी (छोटे बच्चों की कहानियां)

बुद्धिमान तोता की शिक्षाप्रद कहानी (छोटे बच्चों की कहानियां)

बहुत समय पहले की बात है. एक घने जंगल में एक तोता अपने दो बच्चों के साथ रहता है. उनका जीवन ख़ुशी-ख़ुशी बीत रहा था.

एक दिन जंगल से गुज़रते एक शिकारी की दृष्टि तोते के बच्चों की ख़ूबसूरत जोड़ी पर पड़ी. उसने सोचा कि राजा को देने के लिए ये तोते बहुत सुंदर उपहार है. वह उन तोतों को पकड़कर राजा के पास ले गया.

जब उसने वे तोते राजा को उपहार स्वरुप दिए, तो राजा बहुत ख़ुश हुआ और शिकारी को उसने सौ सोने के सिक्के ईनाम में दिए.

राजमहल में लाये जाने के बाद तोते सबके आकर्षण का केंद्र बन गए. उन्हें सोने के पिंजरे में रखवाया गया. हर समय सेवक उनके आगे-पीछे दौड़ते रहते. ना-ना प्रकार के ताज़े फ़ल उन्हें खिलाये जाते. राजा उनसे बहुत प्रेम करता था. राजकुमार भी सुबह-शाम उनके पास आकर खेला करता था. ऐसा जीवन पाकर दोनों तोते बहुत ख़ुश थे.

एक दिन छोटा तोता बड़े तोते से बोला, “भाई, हम कितने ख़ुशनसीब हैं, जो इस राजमहल में लाये गए और ऐसा आरामदायक जीवन पा सके. यहाँ हर कोई हमसे कितना प्यार करता है. हमारा कितना ख्याल रखता है.”

“हाँ भाई, यहाँ हमारी ज़रूरत की हर चीज़ बिना मेहनत के हमें मिल जाती है. हमारा जीवन पहले से अधिक आरामदायक हो गया है. सबसे अच्छी बात ये है कि यहाँ हमें हर किसी से प्रेम मिलता है.”

तोते को राजमहल का आनंदपूर्ण जीवन बहुत रास आ रहा था. लेकिन एक दिन सब बदल गया. वह शिकारी जिसने राजा को उपहार में तोते दिए थे, राजदरबार में फिर से आया. इस बार उसने एक काला बंदर राजा को उपहार में दिया.

अब काला बंदर राजमहल में सबके आकर्षण का केंद्र था. सारे सेवक उसकी देख-रेख में लग गए. उसके खाने-पीने का विशेष ख्याल रखा जाने लगा. तोतों के प्रति सबने ध्यान देना बंद कर दिया. यहाँ तक कि राजकुमार भी अब तोतों के स्थान पर बंदर के साथ खेलने लगा.

यह देखकर छोटा तोता बहुत दु;खी था. वह बड़े तोते से बोला, “भाई, इस काले बंदर ने हमारी सारी ख़ुशियाँ छीन ली है. इसके कारण अब हमारी ओर कोई ध्यान ही नहीं देता.”

बड़ा तोता बोला, “कुछ भी स्थायी नहीं रहता मेरे भाई. वक़्त बदलते देर नहीं लगती.”

कुछ दिन बीते. बंदर था तो शरारती. एक दिन उसने महल में बहुत उत्पात मचाया. सेवकों को बहुत तंग किया. राजकुमार भी उसकी हरक़त से डर गया.

राजा को जब बंदर की कारस्तानी पता चली, तो उसने उसे जंगल में छोड़ आने का आदेश दे दिया. आदेश का पालन कर बंदर को जंगल में छोड़ दिया गया.

उस दिन के बाद से तोते फिर से महल में सबके आकर्षण का केंद्र बन गए. अब छोटा तोता बहुत ख़ुश था. वह बड़े तोते से बोला, “हमारे दिन फिर से वापस आ गए भाई.”

बड़ा तोता बोला, “याद रखो मेरे भाई. समय कभी एक जैसा नहीं रहता. इसलिये जब समय साथ न दे, तो दु:खी नहीं होना चाहिए. बुरा समय है, तो अच्छा समय भी आयेगा.”

छोटे तोते को बड़े तोते की बात समझ में आ गई और उसने तय किया कि बुरे वक़्त में वह धैर्य बनाकर रखेगा.

सीख (Moral of the story) : कोई भी चीज़ स्थायी नहीं रहती. समय के साथ हर चीज़ बदलती है. इसलिए मुश्किल समय में धैर्य बनाकर रखें.

ईमानदारी का इनाम (new kahani in hindi)

ईमानदारी का इनाम (new kahani in hindi)

बहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में बाबूलाल नाम का एक पेंटर रहता था। वो बहुत ईमानदार था, किन्तु बहुत गरीब होने के कारण वो घर घर जा कर पैंट का काम किया करता था। उसकी आमदनी बहुत कम थी। बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था।

पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी वो सिर्फ दो वक़्त की रोटी ही जुटा पाता था। वो हमेशा चाहता था कि उसे कोई बड़ा काम मिले जिसे उसकी आमदनी अच्छी हो। पर वो छोटी काम भी बड़े लगन और ईमानदारी से करता था।

एक दिन गांव के जमीनदार ने बुलाया और कहा – “सुनो बाबूलाल! मैने तुम्हे यहां एक बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है। क्या तुम वो काम करोगे? ” बाबूलाल – “जी हजूर! जरूर करूंगा। बताइए क्या काम है।” जमीनदार -” में चाहता हूं तुम मेरे नाब पैंट करो और ये काम आज ही हो जाना चाहिए।” बाबूलाल – “जी हजूर! ये काम में आज ही कर दूंगा।” सामान लेे कर जैसे बाबूलाल आता है वो नाव को रंगना सुरु कर देता है।

जब बाबूलाल नाव रंग रहा था तो उसने देखा नाव में छेद था। वो सोचा अगर इसे ऐसे ही पैंट करदिया जाएगा तो ये डूब जाएगी ऐसा सोच कर वो छेद को भर देता है और नाव को पैंट कर देता है। फिर जमीनदार के पास जाता है और कहता है -” हजूर! नाव का काम पूरा हो गया। आप चल कर देख लीजिए।”

फिर वो दोनो नदी किनारे जाते है। नाव को देख कर जमीनदार बोलता है – “अरे वाह बाबूलाल! तुमने तो बहुत अच्छा काम किया है। ऐसा करो तुम कल सुबह आ कर अपना पैसा ले जाना।” उसके बाद वो दोनो अपने अपने घर चले जाते है। अगले दिन जमनिदार के परिवार उसी नाव में नदी के उसपार घूमने जाते है ।

शाम को जमीनदार का नौकर रामू जो उसकी नाव की देख रेख भी करता था छुटी से वापस आता है और परिवार को घर पर ना देख कर जमीनदार से परिवार वाले के बारे में पूछता है। जमीनदार उसे सारी बात बताता है। जमीनदार बात सुन कर रामू चिंतन में पड़ जाता है , उसे चिंतित देख कर जमीनदार पूछता है – “क्या हुआ रामू? ये बात सुन कर तुम चिंतित क्यूं हो गए। ” रामू – “सरकार! लेकिन उस नाव में तो छेद था। “

रामू की बात सुन कर जमीनदार भी चिंतित हो जाता है तभी उसकी परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती कर के वापस आ जाते है। उन्हें सकुशल देख कर जमीनदार चैन की सांस लेता है। फिर अगले दिन जमीनदार बाबूलाल को बुलाता है और कहता है – “ये लो बाबूलाल तुम्हारा मेहनत का पैसा , तुमने बहुत बढ़िया काम किया है। में बहुत खुश हूं। ” पैसे गिनने के बाद बाबूलाल हैरान हो जाता है क्यूं की वो पैसे ज्यादा थे। वो जमीनदार से कहता है – ” हजूर ! अपने मुझे गलती से ज्यादा पैसे दे दिए है”।

जमीनदार – ” नहीं बाबूलाल! ये मैने तुम्हे गलती से नहीं दिए। ये तुम्हारी मेहनत का ही पैसा है। क्यूं की तुमने बहुत बड़ा काम किया है। तुमने इस नाव की छेद को भर दिया जिस के बारे में मुझे पता भी नहीं था। अगर तुम चाहते तो उसे ऐसे भी छोड़ सकते थे। पर तुमने एसा बिल्कुल नहीं किया जिसके लिए मेरे परिवार सुरक्षित घर वापस आ गए है।

छोटा राजा -panchtantra ki kahani in hindi

एक समय की बात है दूर एक देश में चिंटु नाम का एक लड़का रहता था और वह अपने माता-पिता से खुब प्यार करता था। चिंटु बहुत ही अच्छा लड़का था और इसी वजह से सब उसे खुब पसंद करते थे। लेकिन चिंटू जिस देश मे रहता था वहाँ का राजा बहुत ही क्रुर था। वहाँ के राजा से सब डरा करते थे ।

चिंटू रोज़ अपने आस-पास देखता की राजा के सेनिक लोगो को बेवजह तंग किया करते थे। ऐसे मे वह अपने पापा से पूछता, ” पिताजी ये लोग हमेशा दूसरों को तंग करते है। इन्हे रोकने वाला कोई नहीं है क्या?”

पिताजी उस वक़्त अपने कार्य मे व्यस्थ थे इस वजह से उन्होनें चिंटू से कहा, “चिटु, देख नहीं रहे हो बेटा मैं अभी काम कर रहा हूँ। चलो जाओ अभी हम बाद मे बात करेंगे।” ऐसा कहकर पिताजी ने चिंटू का जवाब नहीं दिया।

लेकिन चिंटू तो ठहरा जिज्ञासु लड़का अगर उसे कुछ जानना हो तो वह कुछ भी करके जान ही लेता। ऐसे में वह अपनी माँ के पास गया और माँ से वही सवाल पुछा, ” माँ ये लोग हमेशा दूसरों को तंग करते है। इन्हे रोकने वाला कोई नहीं है क्या?”

माँ ने अपने प्यारे से चिंटू की ओर देखा ओर कहा, “इन्हे सिर्फ एक आदमी ही ऐसा करने से रोक सकता है।”

माँ बोली, ” अरे मेरे लाल इतनी भी क्या जल्दी है? क्या करोगे जान कर?”

“आप बताईये ना मुझे जानना है।” चिंटू ने माँ से कहा।

माँ ने जवाब देते हुए कहा, “वो राजा है बेटा। ये सारें सेनिक उन्हीं के है और वही इन्हें रोक सकते है।”

चिंटू ने फिर सवाल पुछा, “तो वो इन्हें ऐसा करने से रोकते क्यो नही?”

माँ ने जवाब में कहा, “क्योंकि हमारे राजा अच्छे राजा नही है। वो लोगो को खुब परेशान करते है ओर जो मील जाए उसे सज़ा सुना देते है।”

ऐसे में चिंटू ने कहा, “माँ मैं इन सेनिको से लडूंगा और सबकी राजा से रखवाली करूंगा।”

माँ हस्ते हुए बोली, ” तुम तो बहुत छोटे हो, तुम्हारे पास कोई सेना भी नही है और ना ही तुम्हारे पास कोई जादुई ताकत है। तो फिर तुम कैसे राजा से लड़ोगे?”

माँ की ऐसी बातें सुन कर चिंटू निराश हो गया और मन ही मन सोचने लगा की ऐसा क्या है जो मैं कर सकता हूँ?

अब रात का समय हो चला था और चिटु के मन से वह बात घर कर चुकी थी। चिंटू सोते-सोते एक ही बात सोच रहा था की आखिर कैसे मैं राजा से लड़ सकता हूँ। यह सोचते-सोचते वह भगवान से विनती किया और कहा की हे भगवान मुझे सकती दो की मैं राजा को हरा कर देश के लोगो की रक्षा कर सकूँ।

नींद में चिंटू को एक सपना आया। सपने में एक परी आई और उसने चिंटू से कहा, “चिटु तुम्हारी प्रार्थना भगवान ने सुन ली है और उन्होनें तुम्हें राजा से लड़ने के लिए ये तलवार दिया है। जबतक तुम्हारे पास यह तलवार है तुम्हारी ताकत बढ़ जायेगी ओर तुम्हारा कोई कुछ नहीं कर पायेगा।” यह कहकर परी चली गई।

चिंटू की सुबह नींद खुली और उठते ही उसने सबसे पहले अपना पुरा घर खोजा। वह अपने घर का एक-एक कोना खोजने लगा लेकिन उसे वह तलवार कही ना मिली। ऐसे मे थक हार कर चिटु अपने बिस्तर में जा बैठा। बैठे-बैठे वह सोचने लगा, “क्या वह बस एक सपना था या ऐसा सचमें हुआ था?”

अचानक चिंटू को याद आया की घर में ऐसी बस ऐसी एक जगह बची है जहाँ उसने अभीतक नहीं देखा है ओर वह था बिस्तर के नीचे। उसने तुरंत अपने बिस्तर के नीचे झुककर देखा और उसे वहाँ एक चमकिला तलवार मिला। तलवार को देखते ही वह उसे तुरंत बाहर निकाला।

उस तलवार की चमक अन्य सभी तलवरो से अधिक थी और ओर तलवार दिखने में जादुई लग रही थी जैसा की परी ने उसे कहा था।

अब चिंटू तलवार को हाथ में लिए राजा के महल की ओर चल पडा। चिटु की हाथ मे वह तलवार देख सब चौक गए ओर सब चिंटू के पीछे-पीछे राजा के महल की ओर जाने लगे।

जैसे ही चिंटू महल के दरवाजे की ओर पहुचा तो महल के 3 सिपाहियो ने उसे रोकने की कोशिश लेकिन उस तलवार की वजह से कोई भी चिंटू के सामने नही टिक पाया। अब चिटु महल के अन्दर जा पहुचा ओर राजा को सीधा चुनौती दिया।

एक छोटे बच्चे को अपने सामने देख राजा हसने लगा ओर कहा, “बच्चे ये उम्र तुम्हारे खेलने की है चलो जाओ और तलवार यही छोड दो।”

यह सुनकर चिंटू ने राजा पर सिधे हमला किया और दोनों के बीच लड़ाई चालू हो गई। दोनों के बीच की वह लड़ाई सरि जनता खड़े होकर देख रही थी। सबने देखा की चिंटू एक छोटा बच्चा कितनी बहादुरी से राजा से लड़ रहा है। और अन्त में उस तलवार ने अपना कमाल दिखाया और चिंटू ने उस राजा को हरा दिया ।

अब उस देश का राजा चिटु बन चुका था। चिंटू से राजा ओर उसके सेनिको को कड़ी सजा दि। अब सब चिंटू के देश में खुश रहने लगे और चिंटू खुसी-खुसी अपने देश में राज करने लगा।

किसान और घड़ा – बच्चों की कहानी – Story for Kids in Hindi

किसान और घड़ा – बच्चों की कहानी – Story for Kids in Hindi

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक किसान रहता था वह प्रतिदिन रोज सवेरे दूर झरने से साफ पानी लेने  जाता रहता था, पानी को ले जाने के लिए वह अपने साथ दो बड़े-बड़े घड़ों को ले जाया करता था|

दोनों घड़ों को बांधकर वह अपने कंधों पर दोनों तरफ लटका लेता था। उन दोनों घड़ों मे से एक घड़ा फूटा हुआ था और दूसरा घड़ा एकदम सही था इसलिए प्रतिदिन घर तक जाते-जाते  उसका बहुत सा पानी फूटे हुए घड़े से बाहर निकल जाता था| यह प्रक्रिया लगभग 2 साल तक चलती रही।

सही वाले घड़े को इस बात का हमेशा घमंड रहता था की वो पूरा पानी को घर तक पहुंचाता है बल्कि दूसरे फूटे हुए घड़े को को इस बात का दुख होता था की वो केवल आधा पानी ही घर तक पहुंचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है|

फूटा हुआ ये सोचकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उसने  किसान से कहा- “मैं अपने आप पर शर्मिंदा हूँ और आपसे माफी मांगना चाहता हूँ “

किसान ने फूटे हुए घड़े से पूछा -“तुम किस बात के लिए शर्मिंदा हो ?”


फूटे हुए घड़े ने कहा – “शायद आप जानते नहीं हो मैं एक फूटा हुआ घड़ा हूँ और पिछले दो सालों से जितना पानी मेरे द्वारा घर में पहुँचाना चाहिए मैं उससे आधा पानी ही पहुँचा पा रहा हूँ, यही मेरे अंदर सबसे बड़ी कमी है और मैं आपकी मेहनत को बर्बाद कर दे रहा हूँ। 
किसान को घड़े की बात को सुनकर बहुत दुख हुआ और उसने फूटे हुए घड़े से कहा -“कोई बात नहीं है मैं चाहता हूँ की तुम रास्ते मे पड़ने वाले सुंदर फूलों को देखा करो “
फूटे हुए घड़े ने ऐसा ही किया सारे रास्ते मे उसने सुंदर फूलों को देखा, ऐसा करने से उसकी निराशा कुछ हद तक दूर हो गई, लेकिन घर तक पहुंचते-पहुंचते आधा पानी घड़े से गिर गया था और फिर वो किसान से क्षमा मांगने लगा। 

किसान ने फूटे हुए घड़े से कहा -“शायद तुमने ध्यान नहीं दिया है रास्ते मे जितने सारे फूल थे वो सभी तुम्हारी तरफ ही थे अच्छे वाले घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था क्योंकि मैं तुम्हारे अंदर की कमी को पहले से ही जानता था इसलिए मैंने उसका लाभ उठाया और मैंने तुम्हारे तरफ के रास्ते मे रंग बिरंगे फूलों के बीजों को बो दिया तुम रोज थोड़ा थोड़ा पानी देकर उनको सींचते रहते थे|

और जिसके फलस्वरूप रास्ता फूलों से भर गया और बहुत सुंदर बन गया, तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपने घर को सुंदर बना पाता हूँ अगर तुम ऐसे ना होते को क्या ऐसा संभव हो पाता ?

कहानी से सीख: मित्रों हम सभी लोगों के अंदर एक ना एक कमी जरूर होती है, लेकिन यहीं कमियाँ हमें अनोखा बनाती हैं उस किसान की तरह हमें भी जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार करना चाहिए केवल किसी की अच्छाई की तरफ नहीं देखना चाहिए और जब आप ऐसा करेंगे तो फूटा हुआ घड़ा भी एक अच्छे घड़े से कीमती घड़ा बन जाएगा। 

चालाकी का फल (Kids Kahani In Hindi)

एक थी बुढ़िया, बेहद बूढ़ी पूरे नब्बे साल की। एक तो बेचारी को ठीक से दिखाई नहीं पड़ता था ऊपर से उसकी मुर्गियाँ चराने वाली लड़की नौकरी छोड़ कर भाग गयी।

बेचारी बुढ़िया! सुबह मुर्गियों को चराने के लिये खोलती तो वे पंख फड़फड़ाती हुई सारी की सारी बुढिया के घर की चारदीवारी फाँद कर अड़ोस पड़ोस के घरों में भाग जातीं और ‘कों कों कुड़कुड़’ करती हुई सारे मोहल्ले में हल्ला मचाती हुई घूमतीं। कभी वे पड़ोसियों की सब्जियाँ खा जातीं तो कभी पड़ोसी काट कर उन्हीं की सब्जी बना डालते। दोनों ही हालतों में नुकसान बेचारी बुढ़िया का होता। जिसकी सब्जी बरबाद होती वह बुढ़िया को भला बुरा कहता और जिसके घर में मुर्गी पकती उससे बुढ़िया की हमेशा की दुश्मनी हो जाती।

हार कर बुढ़िया ने सोचा कि बिना नौकर के मुर्गियाँ पालना उसकी जैसी कमज़ोर बुढ़िया के बस की बात नहीं। भला वो कहाँ तक डंडा लेकर एक एक मुर्गी हाँकती फिरे? ज़रा सा काम करने में ही तो उसका दम फूल जाता था। और बुढ़िया निकल पड़ी लाठी टेकती नौकर की तलाश में।

पहले तो उसने अपनी पुरानी मुर्गियाँ चराने वाली लड़की को ढूँढा। लेकिन उसका कहीं पता नहीं लगा। यहाँ तक कि उसके माँ बाप को भी नहीं मालूम था कि लड़की आखिर गयी तो गयी कहाँ? “नालायक और दुष्ट लड़की! कहीं ऐसे भी भागा जाता है? न अता न पता सबको परेशान कर के रख दिया।” बुढ़िया बड़बड़ायी और आगे बढ़ गयी।
थोड़ी दूर पर एक भालू ने बुढ़िया को बड़बड़ाते हुए सुना तो वह घूम कर सड़क पर आ गया और बुढ़िया को रोक कर बोला, ” गु र्र र , बुढ़िया नानी नमस्कार! आज सुबह सुबह कहाँ जा रही हो? सुना है तुम्हारी मुर्गियाँ चराने वाली लड़की नौकरी छोड़ कर भाग गयी है। न हो तो मुझे ही नौकर रख लो। खूब देखभाल करूँगा तुम्हारी मुर्गियों की।”

“अरे हट्टो, तुम भी क्या बात करते हो? बुढ़िया ने खिसिया कर उत्तर दिया, ” एक तो निरे काले मोटे बदसूरत हो मुर्गियाँ तो तुम्हारी सूरत देखते ही भाग खड़ी होंगी। फिर तुम्हारी बेसुरी आवाज़ उनके कानों में पड़ी तो वे मुड़कर दड़बे की ओर आएँगी भी नहीं। एक तो मुर्गियों के कारण मुहल्ले भर से मेरी दुश्मनी हो गयी है, दूसरा तुम्हारे जैसा जंगली जानवर और पाल लूँ तो मेरा जीना भी मुश्किल हो जाए। छोड़ो मेरा रास्ता मैं खुद ही ढूँढ लूँगी अपने काम की नौकरानी।”

बुढ़िया आगे बढ़ी तो थोड़ी ही दूर पर एक सियार मिला और बोला, “हुआँ हुआँ राम राम बुढ़िया नानी किसे खोज रही हो? बुढ़िया खिसिया कर बोली, अरे खोज रहीं हूँ एक भली सी नौकरानी जो मेरी मुर्गियों की देखभाल कर सके। देखो भला मेरी पुरानी नौकरानी इतनी दुष्ट छोरी निकली कि बिना बताए कहीं भाग गयी अब मैं मुर्गियों की देखभाल कैसे करूँ? कोई कायदे की लड़की बताओ जो सौ तक गिनती गिन सके ताकि मेरी सौ मुर्गियों को गिन कर दड़बे में बन्द कर सकें।”

यह सुन कर सियार बोला, “हुआँ हुआँ, बुढ़िया नानी ये कौन सी बड़ी बात है? चलो अभी मैं तुम्हें एक लड़की से मिलवाता हूँ। मेरे पड़ोस में ही रहती है। रोज़ जंगल के स्कूल में पढ़ने जाती है इस लिये सौ तक गिनती उसे जरूर आती होगी। अकल भी उसकी खूब अच्छी है। शेर की मौसी है वो, आओ तुम्हें मिलवा ही दूँ उससे।
बुढ़िया लड़की की तारीफ सुन कर बड़ी खुश होकर बोली, “जुग जुग जियो बेटा, जल्दी बुलाओ उसे कामकाज समझा दूँ। अब मेरा सारा झंझट दूर हो जाएगा। लड़की मुर्गियों की देखभाल करेगी और मैं आराम से बैठकर मक्खन बिलोया करूँगी।”

सियार भाग कर गया और अपने पड़ोस में रहने वाली चालाक पूसी बिल्ली को साथ लेकर लौटा। पूसी बिल्ली बुढ़िया को देखते ही बोली, “म्याऊँ, बुढ़िया नानी नमस्ते। मैं कैसी रहूँगी तुम्हारी नौकरानी के काम के लिये?” नौकरानी के लिये लड़की जगह बिल्ली को देखकर बुढ़िया चौंक गयी। बिगड़ कर बोली, “हे भगवान कहीं जानवर भी घरों में नौकर हुआ करते हैं? तुम्हें तो अपना काम भी सलीके से करना नहीं आता होगा। तुम मेरा काम क्या करोगी?”

लेकिन पूसी बिल्ली बड़ी चालाक थी। आवाज को मीठी बना कर मुस्कुरा कर बोली, “अरे बुढ़िया नानी तुम तो बेकार ही परेशान होती हो। कोई खाना पकाने का काम तो है नहीं जो मैं न कर सकँू। आखिर मुर्गियों की ही देखभाल करनी है न? वो तो मैं खूब अच्छी तरह कर लेती हूँ। मेरी माँ ने तो खुद ही मुर्गियाँ पाल रखी हैं। पूरी सौ हैं। गिनकर मैं ही चराती हूँ और मैं ही गिनकर बन्द करती हूँ। विश्वास न हो तो मेरे घर चलकर देख लो।”

एक तो पूसी बिल्ली बड़ी अच्छी तरह बात कर रही थी और दूसरे बुढ़िया काफी थक भी गयी थी इसलिये उसने ज्यादा बहस नहीं की और पूसी बिल्ली को नौकरी पर रख लिया।

पूसी बिल्ली ने पहले दिन मुर्गियों को दड़बे में से निकाला और खूब भाग दौड़ कर पड़ोस में जाने से रोका। बुढ़िया पूसी बिल्ली की इस भाग-दौड़ से संतुष्ट होकर घर के भीतर आराम करने चली गयी। कई दिनों से दौड़ते भागते बेचारी काफी थक गयी थी तो उसे नींद भी आ गयी।

इधर पूसी बिल्ली ने मौका देखकर पहले ही दिन छे मुर्गियों को मारा और चट कर गयी। बुढ़िया जब शाम को जागी तो उसे पूसी की इस हरकत का कुछ भी पता न लगा। एक तो उसे ठीक से दिखाई नहीं देता था और उसे सौ तक गिनती भी नहीं आती थी। फिर भला वह इतनी चालाक पूसी बिल्ली की शरारत कैसे जान पाती?

अपनी मीठी मीठी बातोंसे बुढ़िया को खुश रखती और आराम से मुर्गियाँ चट करती जाती। पड़ोसियों से अब बुढ़िया की लड़ाई नहीं होती थी क्योंकि मुर्गियाँ अब उनके आहाते में घुस कर शोरगुल नहीं करती थीं। बुढ़िया को पूसी बिल्ली पर इतना विश्वास हो गया कि उसने मुर्गियों के दड़बे की तरफ जाना छोड़ दिया।

धीरे धीरे एक दिन ऐसा आया जब दड़बे में बीस पच्चीस मुर्गियाँ ही बचीं। उसी समय बुढ़िया भी टहलती हुई उधर ही आ निकली। इतनी क़म मुर्गियाँ देखकर उसने पूसी बिल्ली से पूछा, “क्यों री पूसी, बाकी मुर्गियों को तूने चरने के लिये कहाँ भेज दिया?” पूसी बिल्ली ने झट से बात बनाई, ” अरे और कहाँ भेजँूगी बुढ़िया नानी। सब पहाड़ के ऊपर चली गयी हैं। मैंने बहुत बुलाया लेकिन वे इतनी शरारती हैं कि वापस आती ही नहीं।”

“ओफ् ओफ् ! ये शरारती मुर्गियाँ।” बुढ़िया का बड़बड़ाना फिर शुरू हो गया, “अभी जाकर देखती हूँ कि ये इतनी ढीठ कैसे हो गयी हैं? पहाड़ के ऊपर खुले में घूम रही हैं। कहीं कोई शेर या भेड़िया आ ले गया तो बस!”

ऊपर पहुँच कर बुढ़िया को मुर्गियाँ तो नहीं मिलीं। मिलीं सिर्फ उनकी हडि्डयाँ और पंखों का ढ़ेर! बुढ़िया को समझते देर न लगी कि यह सारी करतूत पूसी बिल्ली की है। वो तेजी से नीचे घर की ओर लौटी।

इधर पूसी बिल्ली ने सोचा कि बुढ़िया तो पहाड़ पर गयी अब वहाँ सिर पकड़ कर रोएगी जल्दी आएगी नहीं। तब तक क्यों न मैं बची-बचाई मुर्गियाँ भी चट कर लूँ? यह सोच कर उसने बाकी मुर्गियों को भी मार डाला। अभी वह बैठी उन्हें खा ही रही थी कि बुढ़िया वापस लौट आई।

पूसी बिल्ली को मुर्गियाँ खाते देखकर वह गुस्से से आग बबूला हो गयी और उसने पास पड़ी कोयलों की टोकरी उठा कर पूसी के सिर पर दे मारी। पूसी बिल्ली को चोट तो लगी ही, उसका चमकीला सफेद रंग भी काला हो गया। अपनी बदसूरती को देखकर वह रोने लगी।

आज भी लोग इस घटना को नही भूले हैं और रोती हुई काली बिल्ली को डंडा लेकर भगाते हैं। चालाकी का उपयोग बुरे कामों में करने वालों को पूसी बिल्ली जैसा फल भोगना पड़ता है।

जादू की छड़ी (बेडटाइम स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी)

जादू की छड़ी(बेडटाइम स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी)

एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी। शालू घबराकर उठ गई। उसने देखा कि खिडकी के पास एक बुढिया हवा मे उड़ रही थी। बुढ़िया खिडकी के पास आइ और बोली “शालू तुम मुझे अच्छी लड़की हो। इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ।” शालू यह सुनकर बहुत खुश हुई।

बुढिया ने शालू को एक छड़ी देते हुए कहा “शालू ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर दो बार घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी।” अगले दिन सुबह शालू वह छड़ी अपने स्कूल ले गई। वहा उसने शैतानी करना शुरू किया। उसने पहले अपने समने बैठी लड़की की किताब गायब कर दी फिर कइ बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह शालू की छड़ी की करामात है।

जब वह घर पहुँची तब भी उसकी शरारतें बंद नही हुई। शालू को इस खेल में बडा मजा आ रहा था। रसोई के दरवाजे के सामने एक कुरसी रखी ती। उसने सोचा, “क्यों न मै इस कुरसी को गायब कर दूँ। जैसे ही उसने छडी घुमाई वैसे ही शालू की माँ रसोइ से बाहर निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह शालू की माँ गायब हो गईं।

शालू बहुत घबरा गई और रोने लगी। इतने ही में उसके सामने वह बुढिया पकट हुई। शालू ने बुढिया को सारी बात बताई। बुढिया ने शालू से कहा “ मै तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हू लेकिन उसके बाद मै तुमसे ये जादू की छडी वापस ले लूगी।”

शालू बोली “तुम्हे जो भी चाहिए ले लो लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो।” तब बुढिया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते शालू की माँ वापस आ गई। शालू ने मुड़ कर बुढ़िया का शुक्रिया अदा करना चाहा लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। शालू अपनी माँ को वापस पाकर बहुत खुश हुई और दौडकर गले से लग गई।

साधु महाराज ने उसको एक चमकीला नीले रंग का पत्थर दिया, और कहा ‘कि यह कीमती पत्थर है, जाओ जितनी कीमत लगवा सको लगवा लो। वो आदमी वहां से चला गया और उसे बचने के इरादे से अपने जान पहचान वाले एक फल विक्रेता के पास गया और उस पत्थर को दिखाकर उसकी कीमत जाननी चाही।

चमकीले नीले पत्थर की कीमत (शार्ट मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी विथ मोरल)

चमकीले नीले पत्थर की कीमत (शार्ट मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी विथ मोरल)

एक शहर में बहुत ही ज्ञानी प्रतापी साधु महाराज आये हुए थे, बहुत से दीन दुखी, परेशान लोग उनके पास उनकी कृपा दृष्टि पाने हेतु आने लगे. ऐसा ही एक दीन दुखी, गरीब आदमी उनके पास आया और साधु महाराज से बोला ‘ महाराज में बहुत ही गरीब हूँ, मेरे ऊपर कर्जा भी है, मैं बहुत ही परेशान हूँ। मुझ पर कुछ उपकार करें’.

फल विक्रेता बोला ‘मुझे लगता है ये नीला शीशा है, महात्मा ने तुम्हें ऐसे ही दे दिया है, हाँ यह सुन्दर और चमकदार दिखता है, तुम मुझे दे दो, इसके मैं तुम्हें 1000 रुपए दे दूंगा। 

वो आदमी निराश होकर अपने एक अन्य जान पहचान वाले के पास गया जो की एक बर्तनों का व्यापारी था. उनसे उस व्यापारी को भी वो पत्थर दिखाया और उसे बचने के लिए उसकी कीमत जाननी चाही। बर्तनो का व्यापारी बोला ‘यह पत्थर कोई विशेष रत्न है में इसके तुम्हें 10,000 रुपए दे दूंगा. वह आदमी सोचने लगा की इसके कीमत और भी अधिक होगी और यह सोच वो वहां से चला आया.

उस आदमी ने इस पत्थर को अब एक सुनार को दिखाया, सुनार ने उस पत्थर को ध्यान से देखा और बोला ये काफी कीमती है इसके मैं तुम्हें 1,00,000 रूपये दे दूंगा।

वो आदमी अब समझ गया था कि यह बहुत अमुल्य है, उसने सोचा क्यों न मैं इसे हीरे के व्यापारी को दिखाऊं, यह सोच वो शहर के सबसे बड़े हीरे के व्यापारी के पास गया।उस हीरे के व्यापारी ने जब वो पत्थर देखा तो देखता रह गया, चौकने वाले भाव उसके चेहरे पर दिखने लगे.  उसने उस पत्थर को माथे से लगाया और और पुछा तुम यह कहा से लाये हो. यह तो अमुल्य है. यदि मैं अपनी पूरी सम्पति बेच दूँ तो भी इसकी कीमत नहीं चुका सकता. 

कहानी से सीख | Learning From The Story

हम अपने आप को कैसे आँकते हैं.  क्या हम वो हैं जो राय दूसरे हमारे बारे में बनाते हैं. आपकी लाइफ अमूल्य है आपके जीवन का कोई मोल नहीं लगा सकता. आप वो कर सकते हैं जो आप अपने बारे में सोचते हैं.  कभी भी दूसरों के नेगेटिव कमैंट्स से अपने आप को कम मत आँकिए।

सारे रिश्ते टूट गए (short moral stories in hindi)

सारे रिश्ते टूट गए  (short moral stories in hindi)

एक बार एक बहुत सुन्दर लड़की थी | वह इतनी सुन्दर थी जो भी उसे देखता , देखता ही रह जाता | पर उसे गुस्सा बहुत आता था | गुस्से में वह किसी से कुछ भी कह देती | घर के सबलोग उसकी इस आदत से बहुत परेशां थे | एक बार उसके पिता ने उसे सबक सिखाने की सोचा | उसके पिता ने उसे कुछ कील और हथौड़ा दिया और कहा एक महीने तक हम एक एक्टिविटी करेंगे जिसमे तुम्हे बस एक महीने तक गुस्सा कम करना है उसके बाद तुम चाहो जितना गुस्सा कर सकती हो।

और जब भी तुम्हे गुस्सा आये और तुम किसी से बुरी तरह बोल दो तो एक कील दीवार में लगा देना | और कोशिश करनी है गुस्सा कम करने की , लड़की  तैयार हो गयी | उसे जब भी गुस्सा आता और वह किसी को कुछ बोल देती तो एक कील दिवार में लगा देती | पहले दिन उसने दीवार में 30 कील लगा दी | पर धीरे  धीरे दिवार में लगने वाली कील काम होने लगी |

15 ही दिन में उस लड़की ने सबसे बुरी तरह बोलना काम कर दिया | अब उसके पिता ने उससे कहा की अगर तुम एक बार भी गुस्सा का करना होने पर किसी से बुरी तरह न बोलो तो अपने द्वारा लगायी हुई कील में से एक कील निकाल देना | लड़की ने वैसे ही किया | 1 महीने के अंत तक दीवार से सब कील निकल गयी | लड़की बहुत खुश हुई की वो इस गेम में जीत गयी | अर अपने पिता जी से कहने लगी।

देखिये सब कील दीवार से निकल गयी |

उसके पिता ने कहा दीवार से कील तो निकल गयी पर क्या दीवार पहले जैसी सुन्दर दिख रही है | दीवार में जगह जगह निशान पढ़ गए हैं |

पिता ने अपनी बेटी को समझाया इसी तरह जब तुम किसी पर गुस्सा करती हो तो तुम्हारे रिश्तो में भी ख़राब निशान छूट ही जाते है | और एक दिन यही निशान रिस्तो को भी ख़राब कर देते हैं लड़की के बात समझ में आ गयी और उसने उस दिन से गुस्सा करना बहुत कम कर दिया।

Moral of the Story: दोस्तों सब सभी का भी यही हाल होता है | हम जिस पर गुस्सा कर सकते है उससे बहुत उल्टा सीधा कह देते हैं और अपने रिश्तो को ख़राब कर देते हैं | गुस्सा करने की हम आदत बना लेते है और जिसे हम दवा सकते है उसी पर गुस्सा करते हैं | जैसे की ऑफिस में बॉस ने कुछ  कह दिया हम उससे कुछ नहीं कह सकते तो घर आकर बच्चो को बिना किसी गलती के ही  डांट देते हैं |

इसलिए  अपनी इस ख़राब आदत को रिश्तो के ख़राब होने से पहले ही सुधार लीजिये।

चंपक की बैलगाड़ी Champak Story in Hindi (शार्ट स्टोरी इन हिंदी)

चंपक अपनी बैलगाड़ी में फलों और सब्जियों के बड़े-बड़े बक्से लेकर शहर में बेचने जा रहा था। शहर जाने में उसे करीब एक दिन लगता था। वह सुबह गांव से निकला था और अब दोपहर हो गयी थी, तभी अचानक उसकी बैलगाड़ी एक खड्डे में गिरकर पलट गयी। 

वह अपनी बैलगाड़ी सीधी करने की बहुत कोशिश करने लगा। वहा नजदीक एक ढाबे पे बैठा एक आदमी ये सब देख रहा था। उसने चंपक को दूर से ही बोला, “अरे भाई, परेशान मत हो, आ जाओ मेरे साथ पहले खाना खा लो फिर मैं तुम्हारी बैलगाड़ी सीधी करवा दूंगा।”

उसकी बात सुनकर चंपक बोला, “मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त नाराज हो जायेगा।” ढाबे पर बैठा आदमी ने कहा, “अरे भाई तुज़से अकेले नहीं उठेगी यह बैलगाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठाएंगे।”

“नहीं मेरा दोस्त बहुत गुस्सा हो जाएगा” चंपक बोला।

उस आदमी ने फिर से कहा, “अरे मान भी जाओ। आ जाओ इधर बैठो।”

चंपक ने कहा, “ठीक है आप कहते है तो आ जाता हूँ। “

चंपक ने जमकर खाना खाया और फिर बोला, “अब मैं गाड़ी के पास चलता हूँ और आप भी मेरे साथ चलिए। मेरा दोस्त गुस्सा हो रहा होगा।”

ढाबे पर बैठे आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा, “चलो चलते है, पर तुम इतना डर क्यों रहे हो? वैसे कहा है तुम्हारा दोस्त?”

चंपक ने कहा, “बैलगाड़ी के निचे दबा हुआ है।” 

सैर (चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी)

सैर (चिल्ड्रन स्टोरी इन हिंदी)

रविवार का दिन था। सबकी छुट्टी थी। आसमान साफ था और ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी। सूरज की किरणें शहर के ऊपर बिखरी थीं। धूप में गरमी नहीं थी। मौसम सुहावना था। बिलकुल वैसा जैसा एक पिकनिक के लिए होना चाहिये। मन्नू सोचने लगा, काश! आज हम कहीं घूमने जा सकते।

मन्नू रसोई में आया। माँ बेसिन में बर्तन धो रही थी।
“माँ क्या आज हम कहीं घूमने चल सकते हैं?” मन्नू ने पूछा।
“क्यों नही, अगर तुम्हारा स्कूल का काम पूरा हो गया तो हम ज़रूर घूमने चलेंगे।” माँ ने कहा।
“मैं आधे घंटे के अंदर स्कूल का काम पूरा कर सकता हूँ।” मन्नू ने कहा।

मन्नू स्कूल का काम करने बैठ गया।
“हम कहाँ घूमने चलेंगे?” मन्नू ने पूछा।
“बाबा और मुन्नी ने गांधी पार्क का कार्यक्रम बनाया है।” माँ ने बताया।
“यह पार्क तो हमने पहले कभी नहीं देखा?” मन्नू ने पूछा।
“हाँ, इसीलिये तो।” माँ ने उत्तर दिया।

मन्नू काम पूरा कर के बाहर आ गया।
“क्या गांधी पार्क बहुत दूर है?” मुन्नी ने पूछा।
“हाँ, हमें कार से लम्बा सफर करना होगा।” बाबा ने बताया।
सुबह के काम पूरे कर के सब लोग तैयार हुए। माँ ने खाने पीने की कुछ चीज़ें साथ में ली और वे सब कार में बैठ कर सैर को निकल पड़े।

रास्ता मज़ेदार था। सड़क के दोनो ओर पेड़ थे। हरी घास सुंदर दिखती थी। सड़क पर यातायात बहुत कम था। सफ़ेद रंग के बादल आसमान में उड़ रहे थे। बाबा कार चला रहे थे। मुन्नी ने मीठी पिपरमिंट सबको बांट दी। कार में गाने सुनते हुए रास्ता कब पार हो गया उन्हें पता ही नहीं चला। बाबा ने कार रोकी। माँ ने कहा सामान बाहर निकालो अब हम उतरेंगे।

गांधी पार्क में अंदर जा कर मुन्नी ने देखा चारों तरफ हरियाली थी। वह इधर-उधर घूमने लगी। बहुत से पेड़ थे। कुछ दूर पर एक नहर भी थी। नहर के ऊपर पुल था। उसने पुल के ऊपर चढ़ कर देखा। बड़ा सा बाग था। एक तरफ फूलों की क्यारियाँ थीं। थोड़ा आगे चल कर मुन्नी ने देखा गाँधी जी की एक मूर्ति भी थी।

घूमते-घूमते मुन्नी को प्यास लगने लगी। माँ ने मुन्नी को गिलास में संतरे का जूस दिया। माँ और बाबा पार्क के बीच में बने लंबे रास्ते पर टहलने लगे। मुन्नी फूलों की क्यारियों के पास तितलियाँ पकड़ने लगी। तितलियाँ तेज़ी से उड़ती थीं और आसानी से पकड़ में नहीं आती थीं। तितलियों के पीछे दौड़ते-दौड़ते जब वह थक गयी तो एक पेड़ के नीचे सुस्ताने बैठ गयी।

उसने देखा पार्क में थोड़ी दूर पर झूले लगे थे। मन्नू एक फिसलपट्टी के ऊपर से मुन्नी को पुकार रहा था,
“मुन्नी मुन्नी यहाँ आकर देखो कितना मज़ा आ रहा है।”
मुन्नी आराम करना भूल कर झूलों के पास चली गयी। वे दोनों अलग अलग तरह के झूलों का मज़ा लेते रहे।

“मन्नू – मुन्नी बहुत देर हो गयी? घर नहीं चलना है क्या?”
माँ और बाबा बच्चों से पूछ रहे थे।
दोनों बच्चे भाग कर पास आ गए।
“पार्क कैसा लगा बच्चों?” माँ ने पूछा।
“बहुत बढ़िया” मन्नू और मुन्नी ने कहा। वे खुश दिखाई देते थे।

चलो, अब वापस चलें, फिर किसी दिन दुबारा आ जाएँगे।” बाबा ने कहा।
सफर मज़ेदार था। दिन सफल हो गया। बच्चों ने सोचा।
सब लोग कार में बैठ गए। बाबा ने कार मोड़ी और घर की ओर ले ली। मौसम अभी भी बढ़िया था। मुन्नी फिर से सबको मीठी पिपरमिंट देना नहीं भूली। सैर की सफलता के बाद सब घर लौट रहे थे।

मेंढकों की टोली  (Short Motivational Story In Hindi)

मेंढकों की टोली  (Short Motivational Story In Hindi)

एक मेंढकों की टोली जंगल के रास्ते से जा रही थी. अचानक दो मेंढक एक गहरे गड्ढे में गिर गये. जब दूसरे मेंढकों ने देखा कि गढ्ढा बहुत गहरा है तो ऊपर खड़े सभी मेढक चिल्लाने लगे ‘तुम दोनों इस गढ्ढे से नहीं निकल सकते, गढ्ढा बहुत गहरा है, तुम दोनों इसमें से निकलने की उम्मीद छोड़ दो. 

उन दोनों मेढकों ने शायद ऊपर खड़े मेंढकों की बात नहीं सुनी और गड्ढे से निकलने की लिए लगातार वो उछलते रहे. बाहर खड़े मेंढक लगातार कहते रहे ‘ तुम दोनों बेकार में मेहनत कर रहे हो, तुम्हें हार मान लेनी चाहियें, तुम दोनों को हार मान लेनी चाहियें. तुम नहीं निकल सकते.

गड्ढे में गिरे दोनों मेढकों में से एक मेंढक ने ऊपर खड़े मेंढकों की बात सुन ली, और उछलना छोड़ कर वो निराश होकर एक कोने में बैठ गया. दूसरे  मेंढक ने  प्रयास जारी रखा, वो उछलता रहा जितना वो उछल सकता था.

बहार खड़े सभी मेंढक लगातार कह रहे थे कि तुम्हें हार मान लेनी चाहियें पर वो मेंढक शायद उनकी बात नहीं सुन पा रहा था और उछलता रहा और काफी कोशिशों के बाद वो बाहर आ गया.  दूसरे मेंढकों ने कहा ‘क्या तुमने हमारी बात नहीं सुनी.

उस मेंढक ने इशारा करके बताया की वो उनकी बात नहीं सुन सकता क्योंकि वो बेहरा है सुन नहीं सकता, इसलिए वो किसी की भी बात नहीं सुन पाया. वो तो यह सोच रहा था कि सभी उसका उत्साह बढ़ा रहे हैं. 

कहानी से सीख | Learning From The Story

1. जब भी हम बोलते हैं उनका प्रभाव लोगों पर पड़ता है, इसलिए हमेशा सकारात्मक बोलें. 

2. लोग चाहें जो भी कहें आप अपने आप पर पूरा विश्वाश रखें और सकरात्मक सोचें.

3. कड़ी मेहनत, अपने ऊपर विश्वाश और सकारात्मक सोच से ही हमें सफलता मिलती है. 

बहादुर लड़का (Moral Stories with Pictures in Hindi)

बहादुर लड़का (Moral Stories with Pictures in Hindi)

हालैंड  की पुरानी   घटना है | नदी में बाढ़ से रेल का पुल टूट गया | गाड़ी आने  का समय हो गया था  | पुल के टूटने की जानकारी न होने से गाड़ी आती तो दुर्घटना हो जाती |

एक लड़का वहां मौजूद था,  उम्र 12-14 साल रही होगी  | आने वाली गाड़ी को रोकने के लिए वह उपाय  सोचने लगा | जब कोई भी उपाय उसे नहीं सुझा तो उसने अपनी शर्ट उतरी और अपना हाथ काटकर खून निकाल और शर्ट को खून में रंग लिया | और पटरी के आगे लाल झंडा फहराता हुआ खड़ा हो गया |

गाड़ी चली आ रही  थी | लड़के को थोड़ा डर तो लग रहा था | पर फिर भी वो झंडा लेकर खड़ा रहा | तभी ड्राइवर ने लड़के को देख लिया और गाड़ी को रोक दिया | लड़के ने सारी बात ड्राइवर को बताई |

उस लड़के का नाम था जार्ज स्टेनले | गाड़ी में बैठा हर वयक्ति लड़के की सूझबूझ की प्रसंसा कर रहा था |
छोटे लड़के की समझदारी ने अनेक यात्रियों की जान बचा ली |

दोस्तों ये कहानी हम सभी ने बचपन से सुनी है | क्या एक 12-14 साल के लड़के में अचानक से इतना साहस और सूझबूझ आ गयी होगी .

नहीं दोस्तों ये तो बचपन से उस लड़के को दूसरों की मदद करना. कठिनाई देखकर न घवरना इस तरह की सोच मिली होगी वरना अचानक आई किसी भी बिपति में हम वैसे ही React करते हैं जैसा हमने अभ्यास किया होता है.इसलिए हर समय अच्छा सोचे हमरी सोच ही हमारा जीवन बनाती है |

बुरी संगत का नतीजा Hindi Kahani For Kids

बुरी संगत का नतीजा Hindi Kahani For Kids

रतनलाल सेठ का एक बड़ा सा फलों का बगीचा था और उसके दो बेटे थे। एक बेटा अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश गया था और दूसरा छोटा बेटा आदित्य गांव में ही पढ़ाई करता था।

घर में आदित्य को माँ-बाप से बहुत प्यार मिला था। वह ज्यादातर अपना समय फलों के बाग के में बीतता था। वहाँ उसके दो-चार मित्र बन गए थे। उनकी संगति में आदित्य बिगड़ने लगा था। उसे चोरी करने और जुआ खेलने की आदत पड़ गई थी।

एक दिन सेठ रतनलाल ने आदित्य को जुआ खेलते हुए देख लिया। वहाँ तो उन्होंने आदित्य से कुछ नहीं कहा, पर घर आकर दे चिंता में डूब गए। आदित्य के लौटने पर उन्होंने कहा, “बेटा! जुआ खेलना अच्छी आदत नहीं है। यह तुम्हें बरबाद कर देगा।’” आदित्य पर पिता की बातों का कोई असर नहीं हुआ। अंत में सेठ रतनलाल को एक युक्ति सूझी।

एक दिन वे आदित्य को लेकर आम के बगीचे में पहुँचे। उन्होंने माली से आम तोड़ने के लिए कहा। माली ने आम को तोड़कर एक टोकरी में रख

दिया। सेठ ने आदित्य से कहा, “आदित्य! आम की टोकरी को घर ले जाओ। तीन दिन बात तुम्हारी मौसी आयेगी तब आम का आनंद लेंगे।”

Children ki Kahani

रतनलाल ने एक खराब आम उठा लाए। उसे आदित्य को देते हुए उन्होंने कहा, “इसे भी उन्हीं आम के साथ रख दो।” आदित्य ने वैसे ही किया। उसने आम की टोकरी को घर लाकर रख दिया।

तीन दिन मौसी आ गई। रतनलाल सेठ ने भोजन करने के बाद आदित्य से आम लाने को कहा। आदित्य ने टोकरी उठाई तो देखा कि सब आम सड़ चुके थे। वह बहुत हैरान हुआ। रतनलाल सेठ भी उसके पीछे-पीछे वहाँ आ गए थे। आदित्य ने पूछा कि, “यह कैसे हो गया पिताजी?”

रतनलाल ने कहा, “बेटा! एक खराब आम ने इन बाकि के अच्छे आम को अपने जैसा ही बना दिया है। इसी तरह जो लड़का बुरे लड़कों की संगति करता है। वह भी बुरा बन जाता है।’” पिता की बात आदित्य के दिमाग में बैठ गई।

उसे महसूस हुआ कि उसके पिता उसे क्या सिखाना चाहते थे। उसने बुरे लड़कों की संगति हमेशा के लिए छोड़ दी।

 लकड़हारा और लोमड़ी – Short moral stories in Hindi for class 6

 लकड़हारा और लोमड़ी – Short moral stories in Hindi for class 6

एक बार की बात है, एक भूखा लोमड़ी था जो खाने के लिए कुछ ढूंढ रहा था, वह बहुत भूखा था। वह खाना ढूंढने में बहुत कोशिश की लेकिन उसे भोजन नहीं मिला।

अंत में लोमड़ी जंगल पर गया और वहां भोजन की तलाश की, अचानक उसे एक छेद वाले बड़ा पेड़ नजर पड़ी, उस छेद में एक पैकेज था। भूखा लोमड़ी ने सोचा कि इसमें भजन हो सकता है।

लोमड़ी बहुत खुश होकर छेद में कूद गया, जब उन्होंने पैकेज खोला, तो उन्होंने उसमें रोटी मांस और फलों के टुकड़े देखें लोमड़ी बहुत खुश होकर खाना खाने लगी।

जंगल में पेड़ों को कटने से पहले एक लकड़हारा ने भजन को उस छेद में रख दिया था, लकड़हारा इसे अपने दोपहर के भजन के लिए रखा था।

खाना खाने के बाद लोमड़ी को प्यास लगी, और उसने पास के झरने का पानी पीने का फैसला किया। हालांकि, उसने कितनी भी कोशिश की लेकिन वह छेद से बाहर नहीं निकल पाया।

लोमड़ी इतना खाना खा लिया था कि वह छेद में फिट होने के लिए बहुत बड़ी हो गई थी। लोमड़ी बहुत दुखी और परेशान थे,
उन्होंने खुद कहा, ‘काश मैंने छेद में कूदने से पहले थोड़ा सोचा होता।’

नैतिक शिक्षा : यह पहले इसके बारे में सोचे बिना कुछ करने का परिणाम है।

चील और मुर्गी  ((Short Motivational Story In Hindi)

चील और मुर्गी  ((Short Motivational Story In Hindi)

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एक जंगल में बरगद का पेड़ था. उस पेड़ के ऊपर एक चील घोंसला बनाकर रहती थी जहाँ उसने अंडे दे रखे थे. उसी पेड़ के नीचे एक जंगली मुर्गी ने भी अंडे दे रखें थे. एक दिन उस चील के अंडों में से एक अंडा  नीचे गिरा और मुर्गी के अंडों में जाकर मिल गया.

समय बीता अंडा फूटा और चील का बच्चा उस अंडे से निकला और वह यह सोचते बड़ा हुआ की वो एक मुर्गी है. वो मुर्गी के बांकी बच्चों के साथ बड़ा हुआ. वह उन्ही कामों को करता जिन्हें एक मुर्गी करती है. वो मुर्गी की तरह ही कुड़कुड़ाता, जमीन खोद कर दाने चुगता और वो इतना ही ऊँचा उड़ पाता जितना की एक मुर्गी उड़ती है. 

एक दिन उसने आसमान में एक चील को देखा जो बड़ी शान से उड़ रही थी. उसने अपनी मुर्गी माँ से पूछा की उस चिड़िया का क्या नाम है जो इतना ऊँचा बड़ी शान से उड़ रही है. मुर्गी ने जबाब दिया वह एक चील है. फिर चील के बच्चे ने पूछा माँ मैं इतना ऊँचा क्यों नहीं उड़ पाता। मुर्गी बोली तुम इतना ऊँचा नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम एक मुर्गे हो. उसने मुर्गी की बात मान ली और मुर्गे की जिंदगी जीता हुआ एक दिन मर गया. 

कहानी से सीख | Learning From The Story

जो भी हम सोचते हैं या कुछ नया करने की कोशिश करते हैं तो दूसरे हमें यह कहकर रोकते हैं कि तुम ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा नहीं हो सकता और हम अपना इरादा यह सोचकर बदल लेते हैं कि वाकई मैं यह नहीं कर सकता और हार मान लेते हैं.

इसका मुख्य कारण है अपने ऊपर भरोसा न होना, अपनी शक्तिओं पर भरोसा न होना, अपने काम पर भरोसा न होना. दोस्तों जो लोग कहते हैं कहने दीजिये लोगों का काम है कहना, अपने आप पर भरोसा रखें, अपने आप को पहचाने. दोस्तों अगर जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ जाते हैं , बहादुर वो कहलाते हैं, जो हार निश्चित हो, फिर भी मैदान नहीं छोड़ते! 

शिकारी कुत्ता और खरगोश (बेडटाइम स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी)

शिकारी कुत्ता और खरगोश (बेडटाइम स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी)

Very small story in Hindi with moral – काफी समय पहले की बात है एक जंगल में एक शिकारी कुत्ता रहता था धीरे धीरे वह बूढ़ा होने लगा और उसकी शरीर भी कमजोर होने लगी पर फिर भी वह औरों के मुकाबले बहुत ही स्ट्रॉन्ग था और साथ में ईमानदार भी था एक दिन चलते चलते वह जंगल में जहां खरगोश रहा करते थे वहां पहुंच गया वहां उसके पहुंचने के बाद खरगोश के बहुत सारे छोटे बच्चे इधर-उधर आपस में खेल रहे थे और खरगोश अपने भोजन की तलाश में कहीं दूर गए हुए थे शिकारी कुत्ते को उन पर दया आया और वह उन्हीं के पास बैठ गया ताकि दूसरे जंगली जानवर उन्हें हानी न पहुंचा सके वह शाम तक बैठा रहा और बच्चों को कुछ भी नहीं किया।

जब खरगोश भोजन की तलाश के बाद वापस आए तो उन्होंने देखा कि एक शिकारी कुत्ता वहा पर बैठा हुआ है फिर उन्होंने देखा कि पास के सभी बच्चे उसके इधर उधर घूम रहे हैं और वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है यह सब देख कर के सभी खरगोश उसके पास गया और उसका हाल चाल पूछा वह उन सबसे हिल मिल गया और उन्हीं के साथ रहने लगा वह भी उनके साथ कभी कभी जंगल में शिकार के लिए चला जाया करता था पर वह उन खरगोशों को छोड़कर के बाकी छोटे-मोटे जानवरों का शिकार किया करता था धीरे धीरे कुत्ते का खरगोश के प्रति लगाव बढ़ता गया।

यह सारा चीज एक धूर्त लोमड़ी छुप छुप करके देखा करती थी फिर उसने सोचा क्यों ना इसका फायदा उठाया जाय उसने धीरे धीरे कुत्ते से अपनी दोस्ती बढ़ाना शुरू की दोस्ती हो जाने के बाद से जब कुत्ता खरगोशों के साथ शिकार पर चल जाया करता था उस समय लोमड़ी धीरे से आकर के एक खरगोश के बच्चे को पकड़ ले जाती और उन्हें खा जाती धीरे धीरे यह कई दिनों तक चला जिससे खरगोश के बच्चे कम होने लगे।

यह बात जब खरगोशो ने शिकारी कुत्ते को बताया तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने सोचे की उसके रहते हुए ऐसा कैसे हो रहा है  अतः वह अगले दिन फिर उनके साथ शिकार पर निकला लेकिन आधी रास्ते से वह दूसरी तरफ हो करके वापस जहा खरगोश के बच्चे रहते थे वहां आ गया और छुप कर के देखने लगा तभी लोमड़ी आई और एक खरगोश को पकड़ी और लेकर चली गयी फिर उसने यह सब देखने के बाद खरगोशों को बताया और उसी वक्त उस लोमड़ी को मार डाला उसके बाद सब हंसी खुशी से जंगल में एक साथ रहने लगे।

Moral of story in Hindi

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर कोई हमारा दोस्त बनता है और वह दुष्ट है तो हमें उस पर आंख बंद करके यूं ही विश्वास नहीं कर लेना चाहिए भले ही उसे दोस्त बना लेना चाहिए लेकिन बीच-बीच में उसका परीक्षा भी लेते रहना चाहिए और जानने की कोशिश करना चाहिए कि कहीं यह हमारे साथ कुछ गलत करेने की प्लानिंग तो नहीं कर रहा है।

शातिर चोर Bedtime Stories for Kids in Hindi

शातिर चोर Bedtime Stories for Kids in Hindi

एक बड़े शहर में एक शातिर चोर रहता था। सब लोग जानते हुए भी पुलिस के पास उस चोर के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। उस चोर ने बड़े-बड़े राजनेताओं को भी नहीं छोड़ा था।

वह चोर अक्सर एक शहर के बाहर रहने वाले साधु को मिलने आता था। उस चोर को भगवान से साक्षात्कार का उपाय जानना था। साधु उसे आये वक्त टाल देता था। लेकिन चोर पर इसका असर नहीं पड़ता था।

एक दिन उस चोर का आग्रह बहुत बाद गया। उसने साधु से कहा की समाधान के बिना वह नहीं जायेगा। कई अनुरोध के बाद साधु ने चोर को दूसरे दिन बुलाया।

दूसरे दिन चोर ठीक समय पर आ गया।  साधु ने चोर के सिर पर कुछ पत्थर रखे और कहा की यह पत्थर लेके तुम्हे पूरा पहाड़ चढ़ना होना।

चोर सिर पर पत्थर लिए पहाड़ पर चढ़ने लगा और उसके पीछे साधु भी चलने लगा। थोड़ी देर चलने के बाद चोर को पत्थर भारी लगने लगे। उसने साधु से अनुरोध किया की उसका बोज थोड़ा काम किया जाये। साधु ने उसकी बात मान ली और उसने टोकरी से कुछ पत्थर निकाले।

थोड़ा और चलने के बाद चोर के निवेदन से साधु ने और थोड़े पत्थर निकाले। चोर बार-बार अपनी थकान वक्त कर रहा था। अंत में सब पथरर फेंक दिए गए और चोर असानी से पर्वत पर चढ़ता हुआ ऊँचे शिखर पर जा पहूँचा।  

एक दिन उस चोर का आग्रह बहुत बाद गया। उसने साधु से कहा की समाधान के बिना वह नहीं जायेगा। कई अनुरोध के बाद साधु ने चोर को दूसरे दिन बुलाया।

Funny Bedtime Story in Hindi

दूसरे दिन चोर ठीक समय पर आ गया।  साधु ने चोर के सिर पर कुछ पत्थर रखे और कहा की यह पत्थर लेके तुम्हे पूरा पहाड़ चढ़ना होना।

चोर सिर पर पत्थर लिए पहाड़ पर चढ़ने लगा और उसके पीछे साधु भी चलने लगा। थोड़ी देर चलने के बाद चोर को पत्थर भारी लगने लगे। उसने साधु से अनुरोध किया की उसका बोज थोड़ा काम किया जाये। साधु ने उसकी बात मान ली और उसने टोकरी से कुछ पत्थर निकाले।

थोड़ा और चलने के बाद चोर के निवेदन से साधु ने और थोड़े पत्थर निकाले। चोर बार-बार अपनी थकान वक्त कर रहा था। अंत में सब पथरर फेंक दिए गए और चोर असानी से पर्वत पर चढ़ता हुआ ऊँचे शिखर पर जा पहूँचा।  

साधु ने कहा, जब तुम्हारे सिर पर पत्थरों का बोझ रहा, तब तक तुम्हे पर्वत के ऊँचे शिखर पर चढ़ना कठिन रहा। पर जैसे ही तुमने पत्थर फेंके वैसे ही चढ़ाई सरल हो गई। ऐसी तरह पापों का बोझ सिर पर लेकर कोई मनुष्य भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।

चोर समझ गया की वह अपने बुरे कर्मों के लिए भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है। उस दिन से उसने चोरी करना छोड़ दी और वह पूरी तरह से बदल गया। 

शहरी चूहा और देहाती चूहा (Kids Kahani In Hindi)

शहरी चूहा और देहाती चूहा (Kids Kahani In Hindi)

बहुत समय पहले की बात है, दो चूहे भाई थे। एक भाई शहर में रहता था और दूसरा गाँव में। एक दिन शहर वाला चूहा गाँव वाले भाई से मिलने गया। गाँव वाले चूहे ने अपने भाई को जलपान के रूप में कुछ अन्न के दाने खाने के लिए परोसा।

शहर वाले चूहे की नाक चढ़ गई। उसे मोटा अन्न खाने की आदत जो नहीं थी। शहर वाले चूहे ने शहर की बड़ी तारीफ करी और अपने भाई को शहर आने के लिए आमंत्रित किया।

वह राजी हो गया और दोनों चूहे शहर आ गए। शहरी चूहा एक बड़े से मकान के गैराज में रहता था। वहाँ की तड़क-भड़क गाँव वाले चूहे को आकर्षित कर रही थी।

दोनों भोजन करने खाने वाले हॉल में पहुँचे। वहाँ नाश्ते से बचा हुआ ढेर सारा भोजन पड़ा था। दोनों केक खाने लगे।

अचानक उन्हें गुर्राहट सुनाई दी। दरवाजा खुला और मालिक के दो बड़े कुत्ते भीतर आए। शहरी चूहा अपने भाई को लेकर भागा और छिप गया। गाँव वाला चूहा सारी स्थिति समझ गया और वापस अपनी शांतिपूर्ण जिंदगी जीने गाँव चला गया।

शिक्षा : जीवन में सुरक्षा और शांति सर्वोपरि है।

 मूर्ख बकरा- short story in hindi for class 1

 मूर्ख बकरा- Very interesting story in Hindi

एक जंगल में एक शेर रहता था और उसी के साथ एक चतुर लोमड़ी भी रहती थी जो कि शेर के मारे हुए शिकार पर अपना हाथ साफ किया करती थी धीरे धीरे सब कुछ अच्छा चल रहा था लोमड़ी हमेशा चुपड़ी चुपड़ी बातें करके शेर का दिल जीत लेती थी जिससे वह अपना शिकार का कुछ बचा हिस्सा उसेके लिए छोड़ देता था जिससे लोमड़ी खा पीकर मस्त रहती थी

एक दिन अचानक जंगल में एक सूअर और शेर की लड़ाई की वजह से शेर काफी घायल हो गया सूअर ने अपने दांत से शेर के शरीर पर कई बार ऐसे वार कर दिए जिसकी वजह से शेर बहुत ही घायल हो गया और उसके शरीर से खून निकलने लगा अब धीरे-धीरे वह शिकार करने में असमर्थ हो गया कई दिन बीत गए उसे कोई भी शिकार नहीं मिला क्योंकि उसका पूरा शरीर जख्म से भरा हुआ था और वह कहीं दौड़कर के शिकार करने में असमर्थ था।

उसने लोमड़ी से कहा अगर तुम कोई शिकार की व्यवस्था करो अगर बहला-फुसलाकर के यहां तक मेरे पास तक ला दो तो मैं उसे मार दूंगा और हम दोनों की भोजन हो सकती है अन्यथा धीरे-धीरे हम अब बहुत ही कमजोर होते जा रहे हैं। इस बात को सुनकर के लोमड़ी मान गई उसने बोला ठीक है मैं कोई व्यवस्था करती हूं और जाकर के देखती हूं कि किस प्रकार मै ऐसा कर सकती हूं।

अतः वह जंगल से पास ही के गांव में चली गई जब वहां पर पहुंची तो उसने देखा कि एक बकरा घर के दरवाजे पर था लेकिन वह बहुत ही हटा कटा था, जिसकी वजह से लोमड़ी उसका शिकार नहीं कर सकती थी।

वह देखने में किसी गेंडे से कम नहीं लग रहा था अतः उसने सोचा क्यों न इसे बहला-फुसलाकर के जंगल ले चला जाए वह धीरे से गयी और बोली “और बकरे भाई क्या चल रहा है”, बकरे ने बोला “कुछ खास नहीं”। तभी लोमड़ी ने देखा कि बकरे के आगे सूखे हुए घास के पत्ते पड़े हुए थे जिसे वह बड़े चाव से खा रहा था।

अब लोमड़ी को एक चलाकी सूझी उसने बोला अरे भाई इतने बलशाली होने के बाद से आप यह सूखी सूखी घास खा रहे हो यह कितनी बड़ी नाइंसाफी हो रही है आपके साथ जबकि पूरे जंगल में इतने हरे भरे और रसीले घास हैं जिसे देख कर के ही पेट भर जाता है और आप इतनी सुखी सुखी घास खा रहे हैं जबकि आप इतने पराक्रमी लगते हैं इस बात को सुनकर के बकरा मन ही मन फूला न समा रहा था अतः बकरे ने लोमड़ी से पूछा कि क्या तुम् मुझे हरे हरे घास वाले जगह तक ले जा सकती हो।

लोमड़ी ने बोला बिल्कुल मैं उसी रास्ते जा रही हूं अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें ले जा सकती हूं बकरा लोमडी के साथ चल दिया धीरे-धीरे चलते चलते वह बिच जंगल में पहुंच गए जहां पर शेर बकरे का इंतजार कर रहा था उधर जैसे ही बकरा शेर के पास पहुंचा वहां पर गुफा में थोड़ी अंधेरा थी अतः लोमड़ी ने बोला कि यहां पर थोड़ा विश्राम कर लेते हैं और फिर यहा से चलेगे थोड़ी सी ही आगे हैं वह हरी हरी घास का मैदान मैं तुम्हें वहां पर पहुंचा दूंगी तब तक यह मेरा घर है थोड़ी देर आराम कर लो।

बकरा काफी दूर चलते चलते थक गया था विश्राम करने के लिए उस गुफा में जाकर के बैठ गया इधर शेर घात लगाए हुआ था वह झट से उसके ऊपर कूद करके उसे मार डाला और दोनों खूब चाव से भोजन किए।

Moral of story in Hindi

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने दुश्मन जाति के लोगों से मित्रता नहीं करनी चाहिए कभी भी मित्रता करने से पहले 10 बार सोचना चाहिए क्योंकि अगर हम किसी के भी साथ मित्रता कर लेंगे तो हम मुसीबत में फंस सकते हैं।

असली धन – Moral stories in Hindi for class 5

एक बार की बात है, एक शहर में एक बहुत अमीर आदमी रहता था। वह हमेशा अपने दोस्त और रिश्तेदारों में अपने धन को लेकर घमंड करता था।

उसकी बेटा एक दूर शहर में पढ़ रहा था, और वह छुट्टी पर घर आया था। वह अपने बेटे को दिखाना चाहता था कि वह कितना अमीर है, लेकिन उनके बेटे को अमीर बनने का शौक नहीं था।

उन्होंने गरीब लोगों के जीवन को दिखाने के लिए पूरी शहर में एक दिन की यात्रा की योजना बनाई, पिता और पुत्र ने एक रथ लिया और पूरे दिन नगर का भ्रमण किया, वह दो दिन बाद घर लौटे।

फिर अमीर आदमी ने अपने बेटे से पूछा, ‘यात्रा कैसी थी?’ बेटे ने जवाब दिया ‘यह आपके साथ एक शानदार यात्रा थी.’ ‘अंत में आपको एहसास हुआ कि गरीब कैसे वास्तव में रहते हैं’ पिता ने कहा।

बेटे ने उत्तर दिया, ‘नहीं पिताजी हमारे पास केवल दो कुत्ता है, उनके पास 10 कुत्ता है, हमारे पास विभिन्न देशों से आयातित शानदार रोशनी है, लेकिन वहां हजारों सितारे हैं उनकी रातों रोशनी।

हम उनसे खाना खरीदते हैं, लेकिन वह इतनी समृद्ध है कि वह अपने स्वयं के भोजन की खेती कर सकते हैं।’ अमीर पिता अपने बेटे की बात सुनकर गूंगा और अवाक रह गया।

अनंत में अंत में बेटे ने कहा ‘पिताजी, मुझे दिखाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कि कौन अमीर और कौन गरीब है, मुझे यह समझाने के लिए धन्यवाद कि हम वास्तव में कितने गरीब है।’

नैतिक शिक्षा : सच्ची दौलत अच्छी दोस्त और दयालु रिश्तो में बनती है।

Hindi story for kids – हिरण और शिकारी

Hindi story for kids – हिरण और शिकारी

एक हिरण था। पोखर में पानी पीने गया। पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी। हिरण प्रसन्न होते हुए सोचने लगा, “ईश्वर ने मुझे इतने सुंदर सींग दिए हैं…

काश! मेरे पैर भी इतने ही खूबसूरत होते। ये इतने पतले हैं कि मैं इन्हें देखकर दुखी हो जाता हूँ।” तभी एक शिकारी ने निशाना साधकर हिरण पर तीर छोड़ दिया।

हिरण ने अपने फुर्तीले पैरों से छलांग लगाई और दूर निकल गया। पर उसके सींग एक पेड़ में उलझ गए। हिरण ने बहुत जोर लगाया पर भागने में सफल नहीं हुआ। शिकारी ने उसे पकड़ लिया।

Moral of Hindi story for kids शिक्षा : अपनी ताकत को पहचानो।

जीवन की सीख दर्जी से Moral Bedtime Story In Hindi

जीवन की सीख दर्जी से Moral Bedtime Story In Hindi

एक दिन स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण, एक दर्जी का बेटा सोहम अपने पापा की दुकान पर चला गया। वहाँ जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पापा को काम करते हुए देखने लगा।

उसने देखा कि उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते हैं, और कैंची को पैर के पास टांग से दबा कर रख देते हैं। फिर सुई से उसको सीते हैं और सीने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

जब उसने इसी क्रिया को दो-तीन बार देखा तो उससे रहा नहीं गया, तो उसने अपने पापा से पूछा, “पापा मैं बड़ी देर से आपको देख रहा हूं, आप जब भी कपड़ा काटते हैं, उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते हैं, और सुई से कपड़ा सीने के बाद, उसे टोपी पर लगा लेते हैं, ऐसा क्यों?

सोहम के पापा ने हस्ते हुए जवाब दिया, “बेटा, कैंची काटने का काम करती है, और सुई जोड़ने का काम करती है, और काटने वाले की जगह हमेशा नीची होती है परन्तु जोड़ने वाले की जगह हमेशा ऊपर होती है। यही कारण है कि मैं सुई को टोपी पर लगाता हूं और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।”

बंदर और डॉल्फिन – 10 lines short stories with moral

बंदर और डॉल्फिन – Moral story in Hindi for class

बहुत पहले की बात है, कुछ नाबिक अपने नौकायन जहाज में समुद्र की ओर निकल पड़े। उनमें से एक लंबी जाता के लिए अपने पालतू बंदर को साथ लाया।

जब उन्होंने समुद्र में बहुत दूर थे, अचानक एक तूफान ने उसकी जहाज को पलट दिया। हर कोई समुद्र में गिर गया, और बंदर को यकीन था कि वह डूब जाएगा।

फिर अचानक एक डॉल्फिन दिखाई दे और वह उस बंदर को पीठ में उठाया, वह जल्द ही द्वीप पर पहुंच गए, और बंदर डॉल्फिन के पीठ से नीचे उतरे।

डॉल्फिन ने बंदर से पूछा, ‘क्या आप इस जगह को जानते हैं?’ फिर बंदर ने जवाब दिया, ‘हां मैं जानता हूं, वास्तव में इस द्वीप का राजा मेरा सबसे अच्छा दोस्त है।’

डॉल्फिन जानता था, इस द्वीप पर कोई भी नहीं रहता है। फिर डॉल्फिन ने कहा ‘ठीक है, ठीक है, आप इस द्वीपका राजा हो सकते हैं!’ बंदर ने पूछा, ‘मैं राजा कैसे हो सकता हूं?’

जैसे ही डॉल्फिन समुद्र में तैरने लगा उसने उत्तर दिया, ‘यह आसान है, जैसे कि आप इस द्वीप पर एकमात्र प्राणी है, तो आप स्वभाविक रूप में राजा ही है।’

नैतिक शिक्षा : झूठ बोलने और घमंड करने वाले कभी भी मुसीबत में पड़ सकते हैं।

कंजूस व्यक्तिHindi story for kids 

एक दिन एक कंजूस व्यक्ति के दोस्त ने अपने मित्र की कंजूसी की आदत छुड़ाने की सोची।   वह उसे बाजार ले गया और बोला, “प्रिय मित्र, तुम क्या खाना पसंद करोगे?”

कंजूस बोला, “भूख लगी है, चलो भोजन किया जाए।” वे एक होटल में जाकर।   कंजूस के दोस्त ने होटल मालिक से पूछा, “भोजन कैसा है?” होटल मालिक ने कहा,

“मिठाई की तरह स्वादिष्ट!” कंजूस का दोस्त बोला, “क्यों न भोजन के स्थान पर कुछ मीठा खाया जाए।”   फिर वे एक शहद बेचने वाले की दुकान पर गए और पूछा.

“शहद कैसा है?” शहद बेचने वाला बोला, “एकदम शुद्ध बिल्कुल पानी की तरह।’”   कंजूस का दोस्त बोला, “अरे, फिर यूँ ही पैसे क्यों व्यर्थ करें।

चलो, घर चलते हैं। मैं तुम्हें घर पर शुद्ध शहद के रूप में पानी दूंगा।” फिर घर पहुँचकर कंजूस के दोस्त ने उसे पानी से भरा एक बर्तन थमा दिया।  

कंजूस समझ गया कि उसके दोस्त ने उसे सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया है। इसलिए उसने उस दिन से कंजूसी छोड़ दी।

कुम्हार की सच्चाई Short Moral Stories in Hindi

कुम्हार की सच्चाई Short Moral Stories in Hindi

एक समय की बात है। एक गाँव में एक गरीब कुम्हार रहता था। दिन में घड़े बेचकर पैसे कमाता और रात को उन्हीं पैसों की शराब पिया करता था। एक रात जब कुम्हार शराब के नशे में घर लौट रहा था।

रास्ते में बड़े पत्थर के साथ टकरा कर व सड़क पर गिर गया और सड़क पर गिरे हुए पत्थर, उसके माथे पर चुभ गए और माथे से खून निकलना शुरू हो गया। जैसे तैसे वह अपने घर पहुंचा और नशे की हालत में सो गया।

सुबह उठते ही कुमार वैद्य के पास गया और अपनी मलम पट्टी करवाई। वैद्य ने कुम्हार से कहा, “घाव बहुत गहरा है इसे भरने में काफी समय लगेगा, घाव भर तो जाएगा, लेकिन अपना निशान छोड़ देगा।”

कुछ दिनों बाद गांव में अकाल पड़ गया था, जिसके चलते गांव के लोग अपना घर बार छोड़कर दूसरे राज्य जाने लगे, कुम्हार भी उनके साथ दूसरे राज्य चल पड़ा।

कोई काम ना होने के कारण वह राजा के दरबार में अपने दोस्तों के साथ काम मांगने चल पड़ा। एक-एक करके सब लड़कों को राजा के सामने हाजिर किया।

राजा की नजर कुम्हार के माथे के निशान पर पड़ी इतना बड़ा निशान देख राजा ने सोचा कि अवश्य ही यह कोई शूरवीर योद्धा है। किसी युद्ध के दौरान ही इसके माथे पर यह चोट लगी है।

राजा ने उसे अपने राज्य के सबसे महत्वपूर्ण सैनिकों में से एक बनाने का फैसला किया। यह देख राजा के मंत्री और सिपाही कुम्हार से ईर्ष्या करने लगे। कुम्हार ने भी बड़े पद के लालच में राजा को सच नहीं बताया।

कुछ समय पश्चात अचानक पड़ोसी राज्य ने आक्रमण कर दिया राजा ने अपने सभी सैनिकों को बुलाया और युद्ध लड़ने के लिए उन्हें हथियार सौंप दिए। चूंकि कुम्हार असली सैनिक नहीं था, इसलिए वह जाने से डरता है।

कोई अन्य विकल्प न देखकर, कुम्हार राजा के पास गया और उसे सच्चाई बताई कि महाराज, यह निशान मुझे युद्ध में नहीं मिला है, मैं तो एक मामूली गरीब कुम्हार हूं।

एक दिन जब मैं शराब पीकर घर आ रहा था तो रास्ते में बड़े पत्थर के साथ टकरा कर मैं सड़क पर गिर गया और सड़क पर गिरे हुए पत्थर, उसके माथे पर चुभ गए। जिससे घाव गहरा हो गया और यह निशान बन गया।

राजा क्रोधित हुआ और उसने आदेश दिया कि कुम्हार को दंड दिया जाए। राजा ने कुम्हार को पद से हटा दिया और उसे राज्य से भी निकल जाने का आदेश दिया। कुम्हार ने राजा से निवेदन किया कि वह युद्ध लड़ेगा।

लेकिन राजा ने उसकी एक बात भी नहीं सुनी और राजा ने उसे कहा कि तुम में एक सैनिक होने के गुण हो सकते हैं। लेकिन तुमने छल किया और कपट से यह पद पाया। बेहतर यह ही होगा की तुम चले जाओ वर्ना लोगों को तुम्हारा सच पता चलेगा तो जान से मारे जाओगे।

कुम्हार को एहसास हुआ कि राजा क्या कहना चाह रहा था। कुम्हार निराश होकर राज्य छोडकर चला गया।

सीख: इंसान का झूठ ज्यादा दिन तक छुप नहीं सकता, एक न एक दिन सच सामने आता ही है। जिससे सब से ज्यादा दुःख उस इंसान को होता है जो आँख बंद करके आप पर विश्वास करता है।

सनकी बूढ़ा आदमी – Short Hindi Moral Stories

सनकी बूढ़ा आदमी – Short Hindi Moral Stories

एक गाँव में एक बूढ़ा आदमी रहता था। पूरा गाँव उसे नापसंद करता था कारण, वह हमेशा उदास रहता था। वह लगातार शिकायत करता था और हमेशा बुरे मूड में रहता था। सभी लोग उसे सनकी कहते थे।

लोग उससे बचने की पूरी कोशिश करते थे क्योंकि वह जितना बूढ़ा होता जा रहा था, उतना ही अधिक उदास, चिड़चिड़ा और कठोर बोलने वाला होता जा रहा था। उसका व्यवहार बहुत ख़राब था। वह किसी से भी खुश नहीं होता था।

जब वह अस्सी साल का हो गया तो एक दिन एक अजीब घटना हुई, जिस पर कोई विश्वास नहीं कर रहा था। पूरे गांव में यह बात फ़ैल गई कि बूढ़ा आज खुश है। वह सभी से हंस कर बोल रहा है और किसी भी बात की शिकायत नहीं करता, मुस्कुराता है और यहां तक कि उसका चेहरा भी खिला-खिला रहता है।

पूरा गाँव उस आदमी के पास पहुंचा और उससे पूछा, “क्या हुआ तुम्हें। तुम अचानक बदल कैसे गए?”
बूढ़े आदमी ने जवाब दिया, “बस कुछ खास नहीं। अस्सी साल तक मैं खुशी का पीछा कर रहा था मैं चीज़ों में ख़ुशी ढूँढ़ता था, लेकिन वो सब बेकार था और फिर मैंने खुशी के बिना जीने का फैसला किया और बस जीवन का आनंद लेना शुरू कर दिया। इसलिए मैं अब खुश हूं।”

कहानी से शिक्षा (Moral Of The Story) 
दोस्तों! ज़िंदगी में सार्थकता देखने और ख़ुश रहने के बीच कोई संबंध नहीं है। खुशी का सबसे ज्यादा संबंध एक सक्रिय ज़िंदगी से है। एक ख़ुशहाल जिंदगी बिताने के लिए ज़रूरी है कि आप खुश रहें। ख़ुशी आपके अंदर ही है। यदि आप इसे बाहर ढूँढ़ रहें हैं तो नहीं मिलेगी।

अच्छे कर्मों का फल – Kids story with moral

मीरा नाम की एक बहुत ही दयालु लड़की थी। मीरा के जन्म के बाद ही उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी और कुछ ही दिनों में उसके पिता की भी मृत्यु हो गई। मीरा अपनी दादी के साथ अपने छोटे से घर में रहती थी।

जब भी मीरा किसी को परेशानी में देखती उसकी मदद करने की कोशिश करती, एक दिन मीरा जंगल की और जा रही थी।

रास्तें में उस ने एक बूढ़े व्यक्ति को भीख मांगते देखा, मीरा के पास एक बिस्कुट का पैकेट था जो उसने उस बूढ़े व्यक्ति को दे दिया। बूढ़े आदमी ने कहा, “कि बेटी अगर तू मुझे यह दे देगी तो तू खुद क्या खाएगी।”

मीरा ने बोला, “कि बाबा मैं कुछ ना कुछ खा ही लूंगी मेरा घर पास में ही है।” फिर मीरा आगे चली तो उसने देखा कि एक छोटा बच्चा नंगा घूम रहा है।

मीरा ने अपनी जैकेट उसे दे दी पहनने के लिए और अपने जूते भी, छोटा लड़का बोला, “दीदी अगर तुम मुझे यह जैकेट और जूते दे दोगी तो तुम्हें ठंड लगेगी।”

मीरा बोली कि नहीं भाई ऐसा नहीं है तुम इसे पहन लो तुम तो बिल्कुल ही नीवस्त्र हो।

चलते-चलते मीरा घने जंगल में पहुंच गई जहां वह आसमान की और देखकर बोलने लगी, “हे भगवान तुमने मेरे जन्म से ही मेरे मां-बाप को क्यों छीन लिया।

ऐसा क्यों किया तुमने, मैं हमेशा सबकी मदद करती हूं यह सोच कर कि शायद मेरे इन कर्मों से कुछ अच्छा हो जाए।

इतने में ऊपर से एक आकाशवाणी हुई, उस आकाशवाणी ने बोला बेटी मैं तुम्हें एक वरदान देता हूं, तुम्हारे इस अच्छे कर्मों का, कि महीने में एक बार तुम अपने मां-बाप से मिल पाओगी, आकाशवाणी के इतना बोलने के बाद ही उसके मां-बाप नीचे उतर आए।

उसके मां-बाप की आंखें नम थी और यह देखकर मीरा की आंखें भी नम हो गई। मीरा की मां ने उस रात अपने हाथों से खाना खिलाया, उसे कहानी सुनाई और वह पूरी रात बात करते रहे और जब सुबह हुई।

तो उसके मां-बाप ने उसे समझाया कि बेटा अपने घर आराम से जाना और उन्होंने मीरा को खेलने के लिए कुछ खिलौने भी दिये।

मीरा बहुत खुश थी कि वह अपने मां-बाप के पास है। कुछ ही समय पश्चात उसके माँ-बाप आकाश की और चल दिए और मीरा भी अपने घर को वापिस आ गई।

अब मीरा और भी अच्छे से सभी की सहायता करती और हर महीने अपने माँ बाप से भी मिलती थी।

मीरा इस बात से खुश थी कि महीने में एक बार तो वह अपने मां-बाप से मिल सकेगी है। उनसे बात कर सकेगी और उनके साथ रह सकेगी।

Moral of the story:- दोस्तों, अगर हमारे कर्म अच्छे होंगे तो ईश्वर भी हमारी सहायता करेगा। इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करो।

आखिर बड़ा कौन ? छोटे बच्चों की कहानियां

आखिर बड़ा कौन ? छोटे बच्चों की कहानियां

आज सुबह मन हुआ कि घर के पास आने वाले सब्ज़ी के किसी ठेले वाले से सब्ज़ी न लेकर किसी दुकान पर जाकर टेबल पर सजे हुए बड़े-बड़े ढेर से फल और सब्जियां छांट ली जाएँ। बस इसी ख्याल ने मुझे उत्तम फ्रेश सब्ज़ी की दुकान पर जाने के लिए मजबूर कर दिया।

जब मैं दुकान पर पहुंची तो देखा वहां गिनती की चार महिलायें और तीन पुरुष ही सब्ज़ी ले रहे थे। बहुत कम लोग होने की वजह से जब मैं सब्ज़ियां छांट रही थी तभी मेरी नज़र वहां आई एक संभ्रांत महिला पर पड़ी, जिसके हाथ में आई ट्वेंटी गाड़ी की चाभी थी और वह सब्ज़ियां छांट रही थी। न जाने मुझे क्यों महसूस हुआ कि इस महिला को देखा जाए क्योंकि वह बहुत अच्छे से तैयार होकर आई थी। खैर जैसे ही मेरी नज़र उस पर गई, मैंने देखा वो ढेर से सब ककड़ियाँ चख-चख कर छांट रही थी।

वह जल्दी-जल्दी ऊपर से ककड़ी तोड़ती ताकि उस पर किसी की नज़र न पड़े। स्वाद चखने के चक्कर में टूटे हुए टुकड़ों को जल्दबाजी में वह टेबल के नीचे लगे पर्दों के पीछे फेंक देती थी। उसे देख कर मुझे अंदर ही अंदर बड़ी हंसी आ रही थी। लेकिन दूसरी ओर गरीब सब्ज़ी वाले का ख्याल भी आया, जो कि दुकान में आने वाले ग्राहकों की टोकरियां रखने और उठाने में सभी तरह की मदद कर रहा था। तभी मेरी नज़र उस महिला पर पुनः पड़ी। अब वह अपनी टोकरी से धनिये की थैली में से धनिया निकाल कर उसके पीछे के डंठलों को तोड़कर परदे के पीछे फेंक रही थी, ताकि उसके रुपये कम लगें।

उसकी यह हरकत देखकर मुझे बहुत अचरज हुआ। जब वो महिला बिल बनवा रही थी मैंने जान बूझकर उसी के सामने सब्ज़ी वाले से पूछा, धनिया क्या भाव है भइया? तीन सौ पचास रुपए किलो मैडम जी। उसने जवाब दिया और अपने काम में लग गया।

जैसे ही मैंने पुनः अपनी दृष्टि उस महिला पर डाली, वह बहुत संयत दिख रही थी। उसको किसी तरह का अपराध बोध नहीं था। वह महिला अपना बिल बनवाकर तुरंत दुकान से निकल गई। मेरे दिमाग में खलबली सी मच रही थी। मैंने दुकान वाले से कहा, भईया अपनी दुकान में कैमरा लगवाओ। क्यों मैडम जी, बोलकर मेरी तरफ देखने लगा।

तब मैंने दुकानदार को उस महिला की हरकत के बारे में बताया। मैंने उसे कहा – वो महिला कम से कम 100 रुपये की चपत आपको लगाकर चली गई। मेरी बातों को सुन कर वह दरियादिली से चेहरे पर एक मुस्कान लाकर बोला, ‘मैडम! हर तरह के ग्राहक आते हैं यहाँ।

आप जैसे भी, जिनको हमारा नुकसान अखरता है और उन जैसी महिलाएं भी आती हैं जिनके बारे में आपने बताया। मैडम, बड़े लोगों से ही हमारी दुकानें चलती हैं। जब वह बड़े लोग ही ऐसी हरकतें करते हैं तो हम जैसे छोटे लोग उनको कुछ कह नहीं पाते। ऐसे लोग किसी भी गरीब को ही डाट फटकार देते हैं।’ सब्ज़ी वाले की बाते सुनकर मुझे उस पर बहुत तरस आया। जो इंसान गरीब की गरीबी को चोट पहुँचा सकता है, वह बड़ा कैसे हुआ? बड़ा तो वो सब्ज़ी वाला है जो 100 रुपए की चपत लगने के बाद भी मन में इतनी सारी गुंजाइशें रखकर चलता है।

कहानी से शिक्षा (Moral Of The Story) 
दोस्तों, इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि सिर्फ अमीर हो जाने से कोई बड़ा नहीं हो जाता। इंसान का दिल भी बड़ा होना चाहिए और ईमानदार होना चाहिए। जो इंसान गरीब की गरीबी को चोट पहुँचा सकता है, वह बड़ा नहीं होता।

कछुआ और पक्षी – moral stories in Hindi for kids

कछुआ और पक्षी – moral stories in Hindi for kids

एक समय की बात है। एक कछुआ एक वृक्ष के नीचे आराम कर रहा था, जिस पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया था। कछुआ ने चिड़िया का मजाक उड़ाया और कहा, “ईव! तुम्हारा घर इतना जर्जर है। यह टूटी हुई टहनियों से बना है, इसमें कोई छत नहीं है, और कच्ची दिखती है।

इससे भी बुरी बात यह है कि आपको इसे स्वयं बनाया था। मुझे लगता है कि मेरा घर, जो मेरा खोल है, आपके दयनीय घोंसले से बहुत बेहतर है ”। चिड़िया ने फक्र से कहा, “हाँ, और मुझे यह पसंद है। ” यह टूटी हुई लकड़ियों से बना है, जर्जर दिखता है, और प्रकृति के तत्वों के लिए खुला है। यह कच्चा है, लेकिन मैंने इसे बनाया है

मुझे लगता है कि यह किसी भी अन्य घोंसले की तरह है, लेकिन मेरी तुलना में बेहतर नहीं है। कछुए ने मजाक में कहा। उन्होंने कहा, “आपको मेरे खोल से जलन होनी चाहिए।” चिड़िया कुछ देर शांत रही और फिर जवाब दिया, “इसके विपरीत, मेरे घर में मेरे परिवार और दोस्तों के लिए जगह है; आपका खोल आपके अलावा किसी और को इसमें नहीं रहने देता। आपके पास एक बेहतर घर हो सकता है। लेकिन मेरे पास एक बेहतर घर है ”।

शिक्षा – एक भीड़ वाली झोपड़ी एक अकेला राज्य से बेहतर है।

मोहित का आत्मविश्वास – A Motivational Moral Story In Hindi

मोहित का आत्मविश्वास – A Motivational Moral Story In Hindi

आज मैं जिस लड़के की कहानी आप को सुनाने जा रहा हूं उसका नाम मोहित है| मोहित को बचपन से ही घूमने फिरने का बहुत शौक रहा है| नई जगह को देखना और नए लोगों से मिलना उसकी आदत में शुमार था|

स्नो ग्लाइडिंग(Snow gliding) उसका सबसे पसंदीदा शौक बन गया था| जिंदगी पूरी तरह से उसके हाथों में थी और वह जिंदगी को पूरी तरह से जी रहा था|

लेकिन फिर एक झटके ने अचानक उसकी पूरी जिंदगी ही बदल कर रख दी| मोहित को मैनिंजाइटिस हो गया जिसकी वजह से उसका बाया कान, किडनी और घुटनों के नीचे दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया था।

उसके परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल था| वे उस दिन को कोस रहे थे जब मोहित ने लद्दाख जाने का फैसला किया था| काफी दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब मोहित को होश आया तो उसके दोनों पैर गायब थे|

जो आदमी अपने पैरों से दुनिया नापने की ख्वाहिश रखता हो उसके पैर ही नहीं रहे तो ऐसी जिंदगी का फिर कोई मतलब नहीं रह जाता है|

मोहित की जिंदगी कुछ ही दिनों में बदल गई| मोहित अब डिप्रेशन में चला गया और हर वक्त अपने अधूरे सपनों के बारे में सोचता रहता था| एक दिन अचानक उसने तय किया कि ऐसे कब तक चलेगा|

उसने वापस से जीवन को नए सिरे से जीने का फैसला किया| डॉक्टरों की मदद से उसने प्रोस्थेटिक पैर लगवाएं और फिर से अपने पैरों पर खड़ा होना सीख लिया|

जब भी कोई उससे पूछता तो वह केवल एक ही बात कहता:- जिंदगी में जो होता है अच्छे के लिए होता है|

मेरे साथ यह होना भी जरूरी था क्योंकि मेरा सपना था कि मैं दुनिया घूमूं और स्नो ग्लाइडिंग का अपना शौक पूरा करूं| लेकिन मेरे पैर जवाब दे देते थे, खासकर ज्यादा ठंड में अकड़ जाते थे| खून जमने लगता था लेकिन अब मेरे पैर रबर के हैं|

मैं जितनी देर तक चाहूं बर्फ में रह सकता हूं और सिर्फ यही नहीं अब मुझे अपने जूतों के साइज की भी चिंता नहीं| क्योंकि मेरे पास हर साइज के पैर जो मौजूद हैं|

अपने दोनों पैर खोने के बाद भी मोहित एक जिंदादिल स्नोग्लाइडर के साथ-साथ एक sports trainer भी बना जो देश के विकलांग लोगों को sports सिखाने का काम करता था|

सीख:अगर आप में आत्मविश्वास है तो बड़ी से बड़ी समस्या भी मामूली है

मेरा सबसे अच्छा दोस्त – moral stories in Hindi for kids

मेरा सबसे अच्छा दोस्त – moral stories in Hindi for kids

एक बार की बात है, दो दोस्त एक रेगिस्तान से गुजर रहे थे। यात्रा के कुछ बिंदु के दौरान, उनके पास एक तर्क था, और एक दोस्त ने दूसरे को चेहरे पर थप्पड़ मारा। जिसे थप्पड़ मारा गया वह आहत था। इन सबसे ऊपर, उन्होंने कुछ भी नहीं कहा,

हालांकि, उन्होंने रेत में लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा” और  वे तब तक चलते रहे जब तक कि उन्हें एक नखलिस्तान नहीं मिला, जहां उन्होंने स्नान करने का फैसला किया क्योंकि यह वास्तव में गर्म था।

अचानक, जिसको थप्पड़ मारा गया था, वह घोड़ी में फंस गया और डूबने लगा, दूसरे दोस्त ने बिना हिचके उसे बचा लिया। पास में डूबने से उबरने के बाद, उसने लिखा एक पत्थर पर, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई”। जिस ने थप्पड़ मारा था और सबसे अच्छे दोस्त को बचाया था, उसने उससे पूछा, “जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा था, तो तुमने इसे रेत में लिखा था और अब, तुमने इसे एक पत्थर पर लिखा है! क्यों?

दूसरे दोस्त ने जवाब दिया, “जब कोई हमें चोट पहुंचाता है, तो हमें इसे रेत में लिखना चाहिए जहां माफी की हवाएं उसे मिटा सकती हैं।” लेकिन, जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करता है, तो हमें इसे एक पत्थर पर उकेरना चाहिए, ताकि कोई हवा इसे कभी न मिटा सके। ”

शिक्षा – हमेशा कोशिश करें और लोगों में अच्छाई देखें। लालच इंसान को कभी खुश नहीं करता।

मेहनत का फल Kids Kahani In Hindi

मेहनत का फल Kids Kahani In Hindi

एक टिटहरी थी | उसके अंडे एक बार समुद्र बहा कर ले गया | टिटहरी को बहुत दुःख हुआ | उसने सोचा की में समुद्र में से अपने अंडे ज़रूर निकल कर लाऊंगी | ऐसा सोचकर टिटहरी अपनी चोंच में मिटटी भरती और समुद्र में डाल देती |

उसके इस कार्य को महर्षि अगस्त्य देख रहे थे उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ | महर्षि ने टिटहरी से इसका कारण पूछा | टिटहरी ने बताया  – “महाराज ! मेरे अंडे समुद्र बहा कर ले गया है अब मैं इस समुद्र को मिटटी से भर दूंगी और अपने अंडे निकाल लाऊंगी |” 

महर्षि को इस छोटे से पक्षी के प्रयास को देखकर बहुत प्रशन्नता हुई और उन्होंने उसकी सहायता करने का निर्णय लिया | महर्षि अगस्त्य ने 3 अंजली में सारे समुद्र का पानी पी लिया | और टिटहरी के अंडे मिल गए |

कहानी से शिक्षा (Moral of the Story): कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती | इसलिए चाहे आप कितनी भी बड़ी मुश्किल में फँस गए हो लेकिन कभी अपने आप पर से विश्वास नहीं खोना चाहिए और न ही कभी हार मानना चाहिए। क्योंकि जिनके जीवन में कोई परेशानी नहीं आती वो जीवन में कोई उन्नति भी नहीं कर सकते |

एक अंधे की सफलता की कहानी A Success Story in Hindi

एक गांव में राहुल नाम का एक लड़का रहता था जो जीवन में हार मान चुका था| वह life में जो कुछ भी करता था, उसको अपनी हार पहले से ही नजर आती थी| स्कूल में अध्यापक और अन्य विद्यार्थी भी उसकी मजाक उड़ाते थे| वह अंधेरे कमरे में अक्सर रोता रहता था|

एक दिन उसकी सिसकती हुई आवाज को सुनकर एक अंधा आदमी उसके पास आया और पूछा, ‘तुम क्यों रो रहे हो’|

राहुल ने उस आदमी को सारी बात बताई|

यह सुनकर वह आदमी जोर-जोर से हंसा और बोला, तुम्हें पता है, ‘जब मैं पैदा हुआ और लोगों ने देखा कि इस बच्चे की तो आंखें ही नहीं है, तो उन्होंने मेरे माता-पिता को मुझे मार देने की सलाह दी’|

उन लोगों ने मेरे माता-पिता को कहा की यह तो अंधा है| यह जीवन भर तड़पता रहेगा,  इसलिए इसे मार देना ही अच्छा होगा| लेकिन मेरे माता-पिता ने उन लोगों की सलाह नहीं मानी| उन्होंने मुझे एक विशेष स्कूल में भेजा और  मुझे पढ़ाया-लिखाया| जब मैं कॉलेज में admission लेने गया तो कॉलेज प्रशासन ने मेरा admission करने से मना कर दिया|

फिर मैंने विदेशी विश्वविद्यालय का फॉर्म भरा और MIT की स्कॉलरशिप पर graduation और post graduation की डिग्री ली| लेकिन जब मैं वापस आया तो फिर मुझे महसूस हुआ कि नेत्रहीन(blind) होने के कारण मुझे कोई नौकरी नहीं देना चाहता|

फिर मैंने अपनी कंपनी शुरू की| इसलिए नहीं कि मेरे पास बहुत पैसा था यह मेरे पास कोई अनोखा आईडिया था| मैंने कंपनी इसलिए शुरू की क्योंकि मेरे पास और कोई चारा ही नहीं था| लेकिन आज मुझे खुशी है कि आज मैं अपनी कंपनी के जरिए मेरे जैसे 5000 लोगों को नौकरी दे पाया हूं|

जीवन में जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर करती है,

मान लो तो हार है और ठान लो तो जीत है|

आदमी की बात को सुनकर राहुल ने पूछा आप की कहानी से मेरा क्या वास्ता?

वह आदमी बोला, जैसे आज लोग तुम्हारी हंसी उड़ाते हैं, वैसे ही जिंदगी भर लोगों ने मेरी भी निंदा की, मेरा भी मजाक उड़ाया| लेकिन मैंने खुद को कभी कमजोर नहीं समझा|

जब दुनिया मुझे नीची नजरों से देखती थी और यह कहती थी कि तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते| तब मैं उनकी आंखों में आंखें डाल कर बोलता था कि मैं कुछ भी कर सकता हूं| जैसे मैंने इतना सब कुछ किया वैसे ही तुम भी बहुत कुछ कर सकते हो| इसलिए हिम्मत मत हारो| दुनिया क्या कहती है, इस बात की परवाह मत करो|

सीख:- दुनिया आपको कैसे देखती है यह महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन आप खुद को कैसे देखते हैं, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है

झूठ पकड़ा गया Kids Story In Hindi

झूठ पकड़ा गया Kids Story In Hindi

एक दिन एक घुड़सवार अपने गुस्सैल घोड़े को बेचने के लिए बाजार ले जा रहा था। चलते-चलते उसे भूख लगी और वह खाना खाने के लिए एक बाग़ में रुक गया। उसने एक पेड़ से घोड़े को बांध दिया। घोड़ा पेड़ के नीचे लगी घास को खाने लगा और वह घुड़सवार भी खाना खाने लगा। तभी एक व्यक्ति अपने गधे के साथ आया और उसी पेड़ पर अपने गधे को बांधने लगा। यह देख घोड़े का मालिक बोला, ‘भाई अपने इस गधे को इस पेड़ पर मत बांधो। मेरा घोड़ा बहुत ही गुस्सैल है वह तुम्हारे इस गधे को मार डालेगा।’

गधे का मालिक बोला, “यह पेड़ केवल तुम्हारा नहीं है और मैं इस पर ही अपने गधे को बाँधूँगा।” घोड़े का मालिक बोला, “यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे तो तुम खुद इसके जिम्मेदार होंगे।” गधे का मालिक नहीं माना और गधे को उसी पेड़ पर बांधकर चला गया।

घोड़े ने उस गधे को लाते मारकर नीचे गिरा दिया। इससे पहले की घोड़े का मालिक उसे संभाल पाता घोड़े ने लात मार-मार कर गधे को मार दिया। तभी गधे का मालिक आया हो और अपने मरे हुए गधे को देखकर चिल्लाने लगा, “अरे यह क्या, तुम्हारे घोड़े ने मेरे गधे को मार दिया है। अब मुझे मेरा गधा ला कर दो। नहीं तो मैं तुम्हें यहां से नहीं जाने दूंगा।”

घोड़े का मालिक बोला, ‘मैंने तो तुम्हें पहले ही कहा था कि मेरा घोड़ा गुस्सैल है। वह तुम्हारे इस गधे को मार देगा। पर तुमने मेरी बात ना मानी। अब इसकी जिम्मेदारी तुम्हारी है, क्योंकि मैं पहले ही तुम्हें सावधान कर चुका था।’ दोनों व्यक्ति बहस करने लगे। तभी एक राहगीर यह देख उनके पास आया और बोला, ‘तुम दोनों को राजा के दरबार जाना चाहिए। वहीं न्याय करेंगे। दोनों सलाह मानकर राजा के दरबार की और न्याय के लिए चल दिए।

दरबार में राजा ने गधे के मालिक से पूछा पूरी बात बताओ, तुम्हारा गधा कैसे मरा? गधे का मालिक बोला, “महाराज मेरा गधा और इसका घोड़ा एक ही पेड़ पर बंधें थे कि अचानक इसका घोड़ा पागल हो गया और उसने मेरे गधे को मार दिया।”

राजा ने घोड़े के मालिक से पूछा, ‘क्या तुम्हारे घोड़े ने ही गधे को मारा है? बताओ। तुम बोल क्यों नहीं रहे हो। क्या यह सच है? बार-बार पूछने पर भी घोड़े का मालिक कुछ नहीं बोला। राजा बोला, “क्या तुम बहरे और गूंगे हो? क्या तुम बोल नहीं सकते?

फिर गधे का मालिक अचानक बोला, “महाराज, यह व्यक्ति गूंगा बहरा नहीं है। पहले तो यह मुझसे खूब चीख-चीख कर बोल रहा था कि अपने घोड़े को इधर मत बांधों, मेरा घोड़ा इस गधे को मार देगा। अब आपके सामने गूंगा-बहरा बनने का नाटक कर रहा है।” यह सुन घोड़े का मालिक बोला, “महाराज क्षमा करें, यह व्यक्ति बार-बार झूठ बोल रहा था। मैंने चुप रहने का नाटक किया जिससे यह अपने मुंह से सच्चाई बोल दे और इसने ऐसा ही किया।

यह सुनकर राजा मुस्कुराने लगा और बोला, “इसका मतलब इसने तुम्हें पहले ही सावधान कर दिया था कि घोड़ा गुस्सैल है गधे को यहाँ मत बांधों। पर तुमने इसकी बात नहीं मानी और फिर भी अपना गधा वही बाँध दिया। तुम्हारा झूठ पकड़ा गया है और अब तुम इसके लिए खुद जिम्मेदार हो।”

कहानी से शिक्षा (Moral Of The Story) 
दोस्तों, कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिये। सच को कितना भी छिपा लें, सच सामने आ ही जाता है और झूठ पकड़ा जाता है।

असली विजेता मोहन – A moral story in Hindi

असली विजेता मोहन – A moral story in Hindi

एक गांव में मोहन नाम का लड़का रहता था| उसके पिताजी एक मामूली मजदूर थे| एक दिन मोहन के पिताजी उसको अपने साथ शहर ले गए| उनको एक मैदान साफ करने का काम मिला था जिसमें एक दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना था|

मोहन मैदान देख कर बहुत खुश हुआ| उस दिन उसे भी दौड़ने का शौक चढ़ गया| जब यह दोनों गांव लौटे तो मोहन ने अपने पिता से जिद की कि हमारे गांव में भी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होना चाहिए| मोहन के पिता ने गांव के प्रधान के सामने यह सुझाव रखा।

कुछ ही दिनों में प्रतियोगिता की तैयारी शुरू हो गई और आसपास के सभी गांव के बहुत सारे बच्चे दौड़ में हिस्सा लेने के लिए आ गए|

मोहन के दादा जी सब शांति से देख रहे थे| हालांकि प्रतियोगिता बहुत कठिन थी| लेकिन मोहन ने ठान रखा था कि उसे जीतना ही है|सीटी बजते ही सारे प्रतिभागी रेस लाइन की तरफ दौड़ने लगे|

कड़क धूप और पथरीले रास्ते को पार करते हुए मोहन ने रेस जीत ली| पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा| मोहन की एक के बाद एक जीत का सिलसिला शुरू हो गया|

मोहन के दादा जी मन ही मन यह देख कर बहुत दुखी होते थे| एक दिन दादाजी ने मोहन के लिए एक खास दौड़ का आयोजन किया| दौड़ के नाम पर मोहन खुशी-खुशी मैदान में आया|

दादाजी ने उससे कहा बेटा, हर रेस में जीतने के अलग-अलग तरीके होते हैं| सोच समझकर दौड़ना|मोहन को कुछ समझ नहीं आया|

आसपास के सभी गांव के लोग दौड़ प्रतियोगिता देखने आए थे|मोहन ने देखा कि इस प्रतियोगिता में उसके अलावा केवल दो ही प्रतिभागी थे| हमेशा की तरह सिटी बजते ही मोहन रेस लाइन की तरफ दौड़ा| वह लाइन तक पहुंचने ही वाला था कि उसने देखा कि बाकी के दोनों प्रतिभागियों ने अभी तक दौड़ना भी शुरू नहीं किया है|

मोहन ने देखा कि एक प्रतिभागी लंगड़ा है और दूसरा प्रतिभागी अंधा| मैदान में चुप्पी छाई हुई थी| मोहन अपनी जगह पर वापस गया और दोनों प्रतिभागियों के हाथ पकड़कर, धीरे-धीरे उन्हें रेस लाइन तक साथ में लेकर आया| तीनों प्रतिभागियों ने एक साथ रेस लाइन को पार किया| यह देखकर पूरा मैदान तालियों की गूंज से भर उठा|

मोहन के दादा जी बोले, आज मुझे यकीन हो गया है कि तुम असली विजेता हो।

सीख:-जीवन की हर रेस में जीतना ही जरूरी नहीं होता है

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शुक्रिया

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3 Responses

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